एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के घरेलू उपाय : Acidity in Hindi

औद्योगिक जीवनचर्या एसिडिटी जैसे रोगो की जननी है। जिसमे भोजन का विकास स्वास्थ्य के लिए नहीं बल्कि स्वाद, सौंदर्य और पेट भरने के लिए किया गया है। जिससे गले में एसिडिटी, पेट में गैस बनना आदि समस्याए जन्म लेती है। जिनसे बचने के लिए एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के उपाय के रूप में, एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार किया जाता है। जिसके त्वरित उपाय को एसिडिटी का तुरंत इलाज और, स्थायी निदान को एसिडिटी का परमानेंट इलाज कहते है।

एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के उपाय

खट्टी डकार और एसिडिटी एवं एसिडिटी और सीने में जलन, का आपस में गहरा तालमेल है। जिसके कारण एक की उपस्थिति होने पर दुसरे का होना स्वाभाविक है। ऐसा होने पर पेट में जलन और दर्द होना देखा जाता है। इसके लिए एसिडिटी और सीने में जलन का अचूक इलाज की आवश्यकता होती है। जिसको आंग्ल भाषा में एसिडिटी ट्रीटमेंट एट होम कहते है। जबकि हिंदी में इसे अनेक नामो से जानते है। जैसे -पेट में एसिड बनने के घरेलू उपाय आदि।

पेट में गैस होने पर भी ऐसिडिटी होती है। जिसके समाधान में गैस और एसिडिटी के लिए घरेलू उपाय का उपयोग है। वही गैस को समूल नष्ट करने में, पेट की गैस को जड़ से ख़त्म करने का उपाय अत्यंत लाभकारी है। जो होम रेमेडीज फॉर एसिडिटी एंड गैस प्रॉब्लम कहलाता है। जिनके द्वारा एसिडिटी और गैस के लक्षण का शमन, सार्वभौम चिकित्सीय सिद्धांत आयुर्वेदादी शास्त्रों में निर्धारित है।

Table of Contents

एसिडिटी की परिभाषा और अर्थ (definition of acidity or acidity definition & acidity meaning in hindi)

एसिडिटी क्या है या एसिडिटी क्या होती है? पेट रोगियों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। जिसको व्हाट इस एसिडिटी इन हिंदी भी कहते है। विज्ञान की विशेष शाखा रसायन के अनुसार, अम्लता को पी एच पैमाने पर आका जाता है। जिसमे सात संख्या को आदर्श या उदासीन माना गया है। जबकि सात से अधिक होने पर क्षार और उससे कम होने पर अम्ल कहा जाता है। अम्लता को रोकने में अदरक प्रभावकारी है। जिसको व्यवहारिक जगत में अदरक के फायदे कहा जाता है।

व्यवहारिक धरातल पर क्षार और अम्ल का विभेद स्वाद के आधार पर होता है। जिसमे नमकीन को क्षार तथा खट्टे को अम्ल कहते है। जब किसी कारण से अम्लता ( खट्टापन ) की व्याप्ति मानव शरीर में हो जाती है। तब उसे एसिडिटी कहा जाता है। जिसको समझने के लिए एसिडिटी क्या होता है पूछा जाता है। इसको ही आधुनिक विज्ञान में अम्लता के नाम से भी जानते है। आयुर्वेदानुसार यह युवा प्रधान रोग है। जिसका मूल चिकित्सा शास्त्रों में युवावस्था को पित्त प्रधान माना गया है।

एसिडिटी से होने वाली बीमारियों में दो लक्षण मुख्यता से देखने को मिलते है। पहला जलन और दूसरा खट्टापन। जिनको आयुर्वेद में पित्त रोगो की संज्ञा दी गई है। जिनके चारित्रिक लक्षणों में एसिडिटी में पाए जाने वाले लक्षण को बताया गया है। इस कारण ही चिकित्सीय ग्रंथो में एसिडिटी ( अम्लता ) को पित्त प्रधान रोग कहा गया है। जिसमे एसिडिटी को पेट के, अग्रिम भाग का रोग माना गया है। जिसमे आमाशय, छाती, गला और मुख प्रमुख रूप से प्रभावित होता है। जिससे एसिडिटी सीने में जलन आदि की समस्या पैदा करती है।

हाइपर एसिडिटी (hyper acidity in hindi)

आयुर्वेद में वर्णित अम्लपित्त को ही आंग्ल भाषा में हाइपर एसिडिटी कहते है। यहाँ हाइपर शब्द का अभिप्राय एसिडिटी की तीव्रता से है। जिसके कारणों की चर्चा आगे की गई है। ज्यादातर अवस्थाओं में एसिडिटी एंड गैस को ही हाइपर एसिडिटी समझा जाता है। जिसके उपचार में हाइपर एसिडिटी की आयुर्वेदिक दवा उपयोगी है। वही हाइपर एसिडिटी के घरेलू उपाय भी अत्यंत लाभकारी है। इनके निदान में सोंठ को गुणकारी माना गया है। जिसको आमतौर पर सोंठ के फायदे और नुकसान कहा जाता है।

एसिडिटी क्यों होती है (acidity reason in hindi)

एसिडिटी होने के कारण की वृहद् विवेचना आयुर्वेदादी शास्त्रों में है। जिसमे प्रमुखता से एसिडिटी का कारण पित्त को स्वीकारा गया है। जिसके हेतुओ के अनेको कारण है। जैसे – कम पानी पीना, मिथ्या आहार – विहार (अधिक मात्रा में भोजन करना, असमय में भोजन करना, विरुद्ध आहार करना आदि ),  बासी, सड़े – गले, तले – भुने और सूखे अन्न का परिरम्भण ( सेवन ), दुर्बल पाचकाग्नि तथा वमनादि पंचकर्मो का अनुचित प्रयोग आदि है।

हाइपर एसिडिटी के कारण 

जिसमे आजकल बाजारों में मिलने वाला रिफाइंड खाद्य पदार्थादि है। उदहारण के लिए रिफाइंड तेल, रिफाइंड घी, रिफाइंड चीनी आदि। यहाँ पर रिफाइंड का मतलब परिष्करण को समझा जाता है। किन्तु आयुर्वेद में तेल, घी आदि को परिष्कृत करने का निषेध है। जिसका मूल कारण तेल आदि का, बिना उष्मा ( ताप ) के परिमार्जन संभव नहीं। और ऐसा करने पर तेल को, आक्सीकृत होने से बचाने की कोई विधा नहीं। जिसके कारण अत्यधिक गर्म या जले तेल का सेवन हानिकारक है। जो मोटापा आदि का जन्मदाता है।

जबकि बाजार में बनने वाली लगभग सभी खाद्य वस्तुओ में इनका ही प्रयोग होता है। जिनसे पित्त भड़कता है। इस कारण इसको एसिडिटी के कारण इन हिंदी कहा जाता है। एसिडिटी और गैस एवं एसिडिटी और जलन का, आपस में गहरा सम्बन्ध है। जिनको समझने या जानने के लिए एसिडिटी क्यों बनती है? जैसे प्रश्न किये जाते है। जिसके उपचार को एसिडिटी और गैस का इलाज कहते है। जिसमे एसिडिटी की सबसे अच्छी दवाई कौन सी है? प्रमुखता से पूछी जाती है। जबकि रोग निदान ग्रंथो में एसिडिटी के लक्षण और उपाय, दोनों पर गहनता से विचार किया गया है।

एसिडिटी के लक्षण (acidity symptom or symptoms for acidity in hindi)

गैस एसिडिटी के लक्षण और पित्त रोग के लक्षणों में, ज्यादातर एक जैसे लक्षण पाए जाते है। जिसका मूल कारण आयुर्वेद के अन्तर्गत त्रिदोषों में, एसिडिटी को पित्त दोष में स्थान दिया गया है। जिसके कारण पित्तादि दोषो से प्राप्त लक्षणों की अनुगति एसिडिटी आदि में होती है। जो इस प्रकार है –

  • पेट, गले, मल – मूत्र आदि में जलन होना
  • प्यास का बार – बार या अधिक लगना
  • मुँह सूखा रहना
  • चक्कर आना
  • त्वचा, चेहरे आदि में रूखापन रहना
  • खट्टी डकार आना
  • मुँह का स्वाद खट्टा अथवा कडुआ होना
  • अत्यधिक पसीना होना आदि।

हाइपर एसिडिटी के लक्षण (symptoms of hyper acidity in hindi)

हाइपर एसिडिटी में पाए जाने वाले, कुछ लक्षण एसिडिटी जैसे ही होते है। परन्तु भेद इनमे केवल इतना होता है कि इनकी तीव्रता अधिक होती है। वही कुछ लक्षण ऐसे भी होते है। जो एसिडिटी से बिलकुल अलग होते है। जैसे – एसिडिटी में जलन आदि होती है। वही हाइपर एसिडिटी में जलन के साथ मुँह भी सूखता है। जिसमे हाइपर एसिडिटी का घरेलू उपचार अत्यंत लाभदायक है।

खून में एसिडिटी के लक्षण (symptoms of acidity in blood in hindi)

खून में एसिडिटी को ही अँग्रेजी में ब्लड एसिडिटी कहते है। जिसमे मुख्य रूप से रक्त की अम्लता बढ़ती है। जिसके कारणों की चर्चा ऊपर की गई है। जिसका पता हमें हमारे शरीर से प्रकट होने वाले लक्षणों से पता चलता है। जैसे –

  • शरीर में लाल रंग के चकत्ते निकलना
  • मुँह में छाले ( एसिडिटी अल्सर ) या घाव होना
  • शरीर में छोटी छोटी लाल रंग की फुंसिया होना
  • खुजली होना
  • दाद और खाज होना
  • खुजलाते खुजलाते चमड़ी का रंग बदलना और मोटी हो जाना

गले में एसिडिटी के लक्षण (acidity in throat in hindi)

एसिडिटी में गले और जलन का आपस मे घनिष्ठ सम्बन्ध है। जिसमे भोजन का महत्वपूर्ण योगदान है। जिसमे विसंगति होने से पाचन क्रिया में कठिनाई होती है। जिनके कारण यकृत आदि के द्वारा अधिक मात्रा में अम्ल का श्रावण हो जाता है। जिससे एसिडिटी की समस्या में गले के लक्षणों की उपस्थिति होती है। जैसे –

  • गला जलना
  • गले में चुभन होना
  • एसिडिटी से गले में छाला पड़ना
  • भोजन निगलने में कठिनाई आदि। 

गैस और एसिडिटी में अंतर (acidity vs gas in hindi)

पित्त दोष प्रधान रोगो का मूल स्थान आयुर्वेद में उदर को माना गया है। जिसमे शरीर के सर्वाधिक महत्व रखने वाले अंगो का समावेश है। जैसे – आमाशय, यकृत, प्लीहा, आंते, गुर्दे आदि है। यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह है कि गैस व एसिडिटी भी पेट में होने वाले रोग है। जिसमे होने वाले अंतर को एसिडिटी एंड गैस डिफरेंस कहते है। कभी – कभी गैस एसिडिट  की समस्या एक साथ भी देखी जाती है। जिसको कुछ लोग एसिडिटी और कब्ज के साथ जोड़ते है। जिसके कारण दोनों में भेद करने में कठिनाई होती है।

सामान्यतः पेट में गैस होने पर पेट में दर्द आदि होता है। जबकि एसिडिटी होने पर जलन होती है। यह दोनों में मूल अंतर है। पेट की गैस का मुख्य स्थान पेट है। जबकि एसिडिटी का मूल स्थान छाती, गला और मुँह है। यहाँ दोनों में भेद उनमे पाए जाने वाले, लक्षणों के आधार पर ही किया जा सकता है। जो निम्नलिखित है।

इसकारण गैस होने पर पेट फूलना, पेट साफ़ न होना, पेट गुडगुडाना, पेट में मरोड़ होना, हिचकी आना, शरीर भारी लगने जैसे लक्षण प्राप्त होते है। वही एसिडिटी होने पर खट्टी डकार आना, उल्टी या कै होना, छाती जलना आदि समस्याए देखने में आती है। जिसके लिए गले में एसिडिटी का इलाज किया जाता है। सबसे मजेदार बात यहाँ यह है कि दोनों प्रकार के लक्षण पित्त रोगो का है। व्यक्ति विशेष में एसिडिटी से सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है। जबकि एसिडिटी के कारण सांस लेने में तकलीफ प्रायः देखने में आती है। 

लिवर एसिडिटी (liver acidity ke lakshan in hindi)

यकृत की बड़ी हुई अम्लता को ही लिवर एसिडिटी कहा जाता है। जिसकी पहचान लिवर एसिडिटी सिम्पटम्स के द्वारा होती है। जिसमे शरीर की आंतरिक या वाह्य अवस्थाओं के चलते, अम्ल का निर्माण और एकत्रीकरण विकृति के कारण होने लगता है। जिससे यकृत के आकार में वृद्धि, गलन आदि समस्याए होने लगती है। जिनके हेतुओ की चर्चा एसिडिटी के कारणों में की गई है। जिनको फैटी लीवर, लिवर का बढ़ना आदि कहा जाता है।

एसिडिटी सर दर्द (acidity with headache in hindi)

एसिडिटी में सर दर्द भी कुछ लोगो में देखा जाता है। जिसका कारण पेट में जमा अम्ल और गैस का निष्कर्षण ऊपर से ही होता है। जिससे मस्तिष्क की नशो पर दाब पड़ता है, और सिर में दर्द होने लगता है। जिसको एसिडिटी से सिर में दर्द होना कहा जाता है। इसलिए एसिडिटी और सर दर्द एक साथ पाए जाते है। एसिडिटी से सिर दर्द सभी में नहीं पाया जाता।

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए (acidity food & acidity diet in hindi)

आयुर्वेद के अंतर्गत उदर रोगो में पानी, पानी में उत्पन्न शाक – पात, जलीय जीव आदि के भक्षण का निषेध किया गया है। जिसको एसिडिटी में परहेज आदि भी कहा गया है।  जबकि आज की विज्ञान एसिडिटी होने पर पर्याप्त जल का सेवन लाभकारी मानती है। एसिडिटी उपचार में एसिडिटी के लिए प्रतिषेधक उपायों को भी, एसिडिटी का इलाज चिकित्सीय दृष्टि में माना जाता है। इस कारण एसिडिटी में दही का उपयोग प्रायः नहीं किया जाता। अम्ल और दही दोनों का स्वाद खट्टा होने के कारण ऐसा है।

खाने को लेकर इस प्रकार की विविधताएँ होने के कारण ही एसिडिटी होने पर क्या खाना चाहिए का प्रश्न खड़ा होता है। और एसिडिटी की तीव्रावस्था को ही हाइपर एसिडिटी माना गया है। जिसके लिए हाइपर एसिडिटी में क्या खाना चाहिए पूछा जाता है। इस कारण दोनों परिस्थियों में भोजन की समझ आवश्यक है। जिसका उत्तर आयुर्वेदादी शास्त्रों के मर्मज्ञों ने बहुत ही गूढ़ता के साथ गुप्त रूप से सूत्र शैली में दिया है। जिसको पारखी गुरु के श्री चरणों में बैठकर शास्त्रों का अध्ययन और गोविंदानुग्रह होने पर ही प्राप्त किया जा सकता है। 

एसिडिटी एंड गैस में दूध और मठ्ठे की, भूरी – भूरी प्रसंशा आयुर्वेदादी शास्त्रों में की गई है। जिसका पान रात्रि भोजन के बाद और सुबह एवं दोपहर के भोजनोपरांत करने पर दाह ( जलन ) को मिटाने वाला बताया गया है। जबकि पित्त रोगियों में मधुर मठ्ठा पीना औषधि के सामान बताया गया है। शुद्ध सात्विक भोजन जैसे – जौ, मूंग, शालीचावल आदि के साथ आसव, आरिष्ट का सेवन करना एसिडिटी में हितकारी माना गया है।

एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए (acidity causing food or acidity in food in hindi)

आयुर्वेदादी ग्रंथो में भोजन को रोग के हेतुओ में स्थान दिया गया है। इसलिए एसिडिटी में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए को जानना आवश्यक है। इस आधार पर अनुकूल भोजन को बेस्ट मेडिसिन फॉर गैस एंड एसिडिटी मानना अनुचित नहीं। एसिडिटी का इलाज में अन्य रोगो की भाँती अन्न, जल आदि का विशेष महत्व ख्यापित होता है। इन्ही वजहों से इनको जानना और गैस एसिडिटी का उपचार में इनको सहायक माना गया है।

आयुर्वेद में शास्त्र सम्मत, सुपाच्य और स्वादिष्ट भोजन को गैस कब्ज एसिडिटी की दवा बताई गई है। जिनको घरेलू रेमेडीज फॉर एसिडिटी और एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार आदि भी कहा जाता है। जिससे एसिडिटी और सीने में जलन आदि के साथ – साथ अन्य समस्याओ का भी समाधान प्रायः हो जाता है। आजकल प्रायः परिस्कृत वसा का ही उपयोग होता है। जिससे एसिडिटी जैसे रोगो के पनपने की संभावना बढ़ जाती है।

एसिडिटी में गर्म प्रकृति, नमकीन, खट्टे, जलकारक और देर से पचने वाले भोजन का प्रतिषेध है। जिसमे आजकल बाजारों में मिलने वाले लगभग सभी खाद्यान्न जैसे – चाट, चाउमीन, स्नैक्स, केक, बिस्किट, डोसा आदि है। जिनकी निर्मिती में तलने – भुनने जैसी अनेको प्रक्रियाए होती है। जिससे उपरोक्त गुणों का संधारण उनमे हो जाता है। जिनका सेवन करने से एसिडिटी जैसे रोगो की प्राप्ति होना स्वाभाविक है।

एसिडिटी के लिए एक्सरसाइज (acidity exercise in hindi)

स्वास्थ्य को स्थिर रखने में व्यायाम आदि का महत्वपूर्ण योगदान है। जो आजकल की जीवनचर्या में धीरे – धीरे लुप्त होता जा रहा है। जिसका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर रोगादि के रूप में दिखाई पड़ रहा है। जिसमे महायंत्रो का सर्वाधिक योगदान बाजार के माध्यम से व्याप्त है। जिसने आज सभी  के जीवन पर सवालिया निशान लगा दिया है। इन्ही महायंत्रों को हमारे घरो में  संजोवाना ही बाजारवाद का मुख्य उद्देश्य है। जिसमे वे दिन रात लगे है।

एसिडिटी के व्यायाम 

इनके अंधाधुंध प्रयोग ने कसरत, व्यायाम आदि की आवश्यकता को और अधिक बढ़ा दिया है। अब चारो और महानगरों को विकास के नाम पर विकसित किया जा रहा है। जिससे लोग शहरो में निवास करते है। जिनके कारण एसिडिटी जैसे रोगो की अनुगति लोगो में देखने को प्राप्त हो रही है। जिससे लोग गैस और एसिडिटी के लिए एक्सरसाइज की बात करते है।

पर चिकित्सा शास्त्रों में पेट रोगो में अधिक परिश्रम करने का प्रतिषेध किया गया है। जिससे ऐसी कोई भी एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए जिससे पेट पर अत्यधिक दबाव पड़े। जबकि कुछ व्यायाम ऐसे है। जिनको नियमित रूप से करने पर अत्यंत फलदायी है। जैसे – आसानी से पैदल चलना, आगे की झुकना, हाथो को ऊपर खींचना, शनैः शनैः कदमताल करना आदि है।

एसिडिटी का परमानेंट इलाज ( how to cure acidity permanently in hindi )

एसिडिटी अत्यधिक पीड़ादायी और दुखदायी रोग है। जिसमे जलन होने के साथ अन्य लक्षणों की प्राप्ति होती है। जिससे निजात पाने के लिए एसिडिटी को कैसे खत्म करे जैसे प्रश्न किये जाते है। जब गैस और एसिडिटी साथ में पाए जाते है। तब उनके उपचार को गैस एंड एसिडिटी ट्रीटमेंट कहा जाता है। कभी – कभी एसिडिटी कब्ज के साथ भी पायी जाती है। जिसके उपचार को ही एसिडिटी और कब्ज का इलाज कहा जाता है। जबकि कब्ज का रामबाण इलाज ही कब्ज का पूर्ण समाधान है।

आयुर्वेदानुसार किसी भी रोग ( कायिक ) को स्थायी रूप से, उपचारित करने के लिए व्याधि के कारण पर विचार करना आवश्यक है। जिसमे मुख्य रूप से रोगी के असंतुलित दोष को परखा जाता है। तदनुकूल उपायों का आलम्बन लेकर त्रिदोषों को सम ( संतुलित ) किया जाता है। जिसके लिए स्नेहन, स्वेदन, वमन ( विरेचन ), अनुवासनवस्ति एवं निरूहवस्ति ( कमजोर रोगियों में ) आदि का प्रयोग चिकित्सार्थ होता है। जिसे कुछ आचार्यो ने संशोधन भी कहा है।

ऐसा करने का मूल ध्येय रोगी में दोष को अपने स्थान से छुड़वाना और बाहर निकलवाना है। जिससे तीनो दोषो में संतुलन साधा जा सके। प्रायः रोगी के रोग ग्रस्त होने पर कमजोरी आदि देखी जाती है। जिसके वारण के लिए शक्ति वर्धक द्रव्यों का प्रयोग करना ही समस्त रोगो का पूर्ण समाधान है। जिस पर आयुर्वेदादी शास्त्रों में गंभीरता से विचार किया गया है। जिसके लिए आधुनिक जीवन की स्वस्थ दिनचर्या का पालन आवश्यक है।

एसिडिटी में घरेलू उपचार ( acidity home remedy or acidity home remedies in hindi )

एसिडिटी के लिए घरेलू उपाय में पानी का सर्वाधिक उपयोग है। जिसमे इसकी गुणवत्ता और महत्ता दोनों पर विचार किया गया है। जिसकी अशुद्धि और सेवन विधा में विसंगति होने से ही पित्त दोष की प्राप्ति होती है। जिसके निवारण में पानी की दोनों गड़बड़ियों को सुधारना अत्यावश्यक है। इसके बाद औषधि सेवन का विधान है। जिसमे गैस कब्ज एसिडिटी के घरेलू उपचार, एसिडिटी का आयुर्वेदिक दवा और एसिडिटी की अंग्रेजी दवा आदि है।

एसिडिटी के घरेलू उपचार

मानव पेट पाचन क्रिया के दौरान पाचक रस छोड़ता है। जिसको आधुनिक विज्ञान हाइड्रोक्लोरिक अम्ल कहती है। जिसका स्वभाव ही खट्टा और जलन कारक है। जो हर व्यक्ति में अलग – अलग दर और मात्रा में श्रावित होता है। उसके प्रकृति के अनुरूप। कहने का आशय किसी में कम, किसी में बहुत कम, किसी में अधिक तो किसी में बहुत अधिक निकलता है। जिस पर नियंत्रण कर पाना लगभग असंभव है। जिनमे यह अधिक पाया जाता है। उन्हें ही एसिडिटी आदि की समस्या प्रायः रहती ही है। जिसको दूर करने में पेय जल का उपयुक्त विधानुरूप सेवन अनिवार्य है।

इस कारण देहानुरूप भोजन और पानी का चयन, किसी औषधि से कम नहीं। क्योकि इस बढे हुए अम्ल को धोने का काम गुनगुना पानी करता है। इसलिए ही आयुर्वेद में गुनगुने पानी को इन रोगो की महौषधि कहा गया है। जिसका सेवन प्रातः, सायः और भोजन के एक घंटे पहले तथा दो घंटे बाद करना नितांत आवश्यक है। जिससे बिना किसी व्यय के इन रोगो से पार पाया जा सके। आयुर्वेद में तो पानी के गलत उपयोग से, अनेको प्रकार के रोग जैसे -अपच, डिस्पेपसिया ( बदहजमी या अजीर्णता ), एसिडिटी आदि जन्म लेती है।

एसिडिटी के घरेलू उपाय ( home remedy for acidity in hindi )

घरेलू उपायों की प्रसिद्धी भारत और इससे सम्बद्ध देशो में सदियों से रही है। जिनका वर्णन आयुर्वेदादी शास्त्रों में विस्तार से प्राप्त है। इन उपायों की यह विशेषता है कि यह जितने छोटे और सरल है। उतने ही अधिक प्रभावशाली भी। जिसके कारण रोग होने पर लोगो के जुबान पर होते है। हमारे आस पास अक्सर उम्रदराज लोगो द्वारा घरेलू उपाय अनायास ही उनके मुँह से निकल पड़ता है। जिससे यह सिद्ध हो जाता है कि कभी न कभी उनके द्वारा इनको उपयोग में लाया गया होगा। अतः यह भी एक प्रामाणिक उपाय है।

उदहारण के लिए छोटे बच्चे को जब भी कुछ खाने के लिए पूछा जाता है। तब वह किसी न किसी मीठी सामाग्री का ही नाम बताता है। जिसका कारण बच्चे ने पहले उसका सेवन किया है। और उसे वह पसंद है। ऐसा करने के लिए उसको अपने मस्तिष्क पर कोई जोर नहीं लगाना पड़ता। बल्कि सहज ही उसके मुँह से निकल पड़ता है। ठीक उसी प्रकार जैसे एसिडिटी गैस का घरेलू उपचार में गुनगुने पानी की याद आती है।

गैस कब्ज एसिडिटी के लिए घरेलू उपाय (home remedies for acidity and gas problem in hindi)

लगभग सभी रोगो के कुछ न कुछ घरेलू उपाय है। इसलिए एसिडिटी का घरेलू उपाय क्या है? एसिडिटी के घरेलू उपाय बताओ, एसिडिटी का इलाज बताओ, एसिडिटी के घरेलू उपाय बताइए जैसे प्रश्न उपस्थापित होते है। जिससे आसानी से रोग और अनावश्यक परेशानी आदि से बचा जा सके। आजकल रोग से अधिक ख़तरा दवाइयों के दुष्प्रभाव का देखा जाता है। जिसके कारण इस प्रकार की दवाओं का प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करना चाहिए। वही घरेलू दवाइयों की उपयुक्त मात्रा का प्रयोग दुष्प्रभाव रहित है। 

एसिडिटी का घरेलू इलाज को ही घरेलू नुस्खे फॉर एसिडिटी कहते है। वही आजकल एसिडिटी का इलाज बाबा रामदेव भी प्रचलित है। जिसमे विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से विमिश्रित दवाइयों का प्रयोग चूर्ण, टेबलेट आदि के रूप में किया जाता है। जबकि एसिडिटी राजीव दीक्षित जी द्वारा होम रेमेडी ऑफ़ एसिडिटी की बात कही गई है।

जिनमे मुख्यतः परहेज, घरेलू दवाओं द्वारा उपचार आदि के बारे में बताया गया है। जैसे – दोपहर के खाने में अजवाइन के छौक लगाना, दही में नमक मिला न खाना इत्यादी। यह सभी रोग पाचन क्रिया की गड़बड़ी के कारण होता है। जिसके लिए पाचन क्रिया कैसे सुधारे को जानना और समझना अनिवार्य है।

गैस एसिडिटी कब्ज उपचार घरेलू ( Home Remedies for acidity in hindi )

गैस कब्ज एसिडिटी चिकित्सा में तीनो को अलग – अलग रोग माना है। वही व्यवहार में एक रोग होने पर दूसरे की अनुगति भी देखी जाती है। जिसका वर्णन आयुर्वेद में दोषो की प्रधानता के साथ किया है। कब्ज और गैस को प्रमुखतः वात एवं एसिडिटी को पित्त रोग माना जाता है। इसकारण इन तीनो के होने पर, द्विदोष प्रधान चिकित्सा की जरूरत पड़ती है।

एसिडिटी गैस का इलाज में जिन घरेलू औषधियों का प्रयोग होता है। उनमे वात और पित्त दोनों का ध्यान रखा जाता है। जिसको गैस और एसिडिटी के घरेलू उपचार ( acidity ka gharelu upchar ) कहा जाता है। जिनको कब्ज गैस एसिडिटी के उपाय भी कहते है। जो निम्नलिखित है –

  • आँवला, हरड़, बहेड़ा को समान मात्रा में चूर्ण बनाकर खाना लबकारी है। अब तो यह त्रिफला चूर्ण के नाम से बाजारों में उपलब्ध है।
  • नियमित आंवले का सेवन चूर्ण, जूस, अचार आदि के माध्यम करना।
  • अदरक का जूस और दूध की सम मात्रा में मिलाकर पीना हितकारी है।

एसिडिटी का तुरंत इलाज घरेलू ( acidity instant relief in hindi )

अभी तक एसिडिटी प्रॉब्लम सलूशन के घरेलू उपायों की बात गई। अब एसिडिटी का तुरंत इलाज gharelu की बात करते है। क्योकि एसिडिटी से जल्द आराम में इनका उपयोग है। जो इस प्रकार है – 

  • आवश्यक मात्रा से अधिक पानी पीना। 
  • खाने में अधिक से अधिक क्षारीय पदार्थो का सेवन करना। जैसे – काला नमक, जीरा आदि।
  • लौकी का जूस पीना।
  • पुदीना को जीरा और काले नमक के साथ पीना।
  • तुलसी की पत्ती का जूस या काढ़ा बना क्र पीना।
  • आर ओ ( रिवर्स आस्मोसिस ) का पानी न पीना।

एसिडिटी आयुर्वेदिक उपचार (acidity treatment in ayurveda in hindi)

आयुर्वेद में पित्त रोगो ( एसिडिटी ) के शमन के अनेको उपाय सुझाये है। जिनको योग, क्वाथ, चूर्ण, प्रयोग आदि कहा गया है। इनको हम व्यवहारिक भाषा में आयुर्वेदिक इलाज कहते है। इनके माध्यम से हाइपर एसिडिटी का इलाज इन हिंदी भी किया जाता है। आजकल एसिडिटी आयुर्वेदिक उपचार patanjali प्रसिद्द है। जिसको एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार patanjali भी कहते है।

आजकल रिफाइंड चीजों के खाने का प्रचलन है। जैसे – चीनी, आयोडीन नमक, मैदा आदि। जिनके कारण एसिडिटी अटैक की समस्या देखी जाती है। जिसका मुख्य रूप से दो कारण है। पहला रिफाइन प्रक्रियाओं में अम्लीय सामाग्रियो का उपयोग है। दूसरा इन प्रक्रियाओं में इनका आक्सीकरण होना। ऐसा होने से उससे विनिर्मित वस्तुओ इनका अंश आना तय है। जिसको पृथक करने की आज भी कोई विधा नहीं है। जिससे यह विष जैसी हो जाती है। जिसका सेवन करने पर कैंसर, मधुमेह और एसिडिटी आदि समस्याए जन्म लेती है।

इसकारण एसिडिटी के उपचार में इनका सेवन बंद करना, किसी दवा से कम नहीं है। जबकि आयुर्वेद में एसिडिटी के अनेको उपाय सुझाये गए है। जैसे –

  • सोंठ, जमालगोटा की जड़, वायविडंग, पिप्पली, चित्रमूल – इन सभी को समान मात्रा में और हरीतकी को दूनी मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना ले। इस चूर्ण का सेवन गरम पानी से करने पर एसिडिटी ठीक होती है।

एसिडिटी की दवा (acidity medicine & acidity remedies in hindi)

एसिडिटी में दवा की बात की जाय तो आयुर्वेदिक ( घरेलू ), अंग्रेजी, होम्योपैथिक आदि एसिडिटी दवा है। जिनका प्रयोग एसिडिटी के उपचार में किया जाता है। जिसमे आयुर्वेद में बतायी गई एसिडिटी की दवाई को, गैस एसिडिटी की आयुर्वेदिक दवा कहते है। जबकि पतंजलि एसिडिटी की दवा में त्रिफला चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण आदि का प्रयोग है। इनको ही पतंजलि एसिडिटी चूर्ण भी कहा जाता है।

एसिडिटी का आयुर्वेदिक दवा में हिमालय आयुर्वेदिक मेडिसिन फॉर एसिडिटी भी अच्छी मानी जाती है। जबकि हाइपर एसिडिटी के लिए आयुर्वेदिक दवा और हाइपर एसिडिटी की अंग्रेजी दवा दोनों का उपयोग होता है। जिसमे आयुर्वेद की अनेको औषधियों का प्रयोग आयुर्वेदज्ञों द्वारा सदियों से किया जाता रहा है। जैसे – पांचो नमक ( सेंधा, विरिया, काला, समुद्री, सोंचा ), हरण, आंवला, बहेड़ा, कटकी, अनार, त्रायमाणा, मीठा वच, गोमूत्र, पीपल, सोंठ, काली मिर्च, चित्रकमूल,थूहर, हल्दी, परवल की जड़, वायविडंग आदि।

एसिडिटी की टेबलेट (acidity tablets or acidity tablet in hindi)

एसिडिटी की अंग्रेजी दवा एसिडिटी टेबलेट का प्रयोग होता है। जिनको एसिडिटी का तुरंत इलाज tablet ( एसिडिटी टेबलेट्स ) कहते है। कुछ एसिडिटी टेबलेट नाम इस प्रकार है –

  • हिमालय एसिडिटी
  • बीजैन ओमयो ( Bjain Omeo )

एसिडिटी सिरप (acidity syrup in hindi)

  • झंडू पंचारिष्ट
  • वैद्यनाथ पंचासव
  • द्राक्षासव

एसिडिटी का होम्योपैथिक इलाज (acidity homeopathic medicine in hindi)

होम्योपैथी में एसिडिटी के लिए कार्बोवेज, सल्फर, कोलोसिंथ, लाइकोपोडियम, कैल्केरिया फॉस इत्यादी दवाओं का प्रयोग होता है। जिसका चुनाव रोगी से प्राप्त होने वाले, लक्षणों के आधार पर करने पर ही लाभ मिलता है। सीने में होने वाली एसिडिटी की दो तिहाई समस्या कार्बोवेज से ठीक हो जाती है।

हाइपर एसिडिटी का होम्योपैथिक इलाज (hyper acidity ka ilaaj in homoeopathy in hindi)

एसिडिटी की भाँती हाइपर एसिडिटी की होम्योपैथिक दवा का भी चयन किया जाता है। जिसमे उपरोक्त दवाओं के अतिरिक्त अर्जेंटीकम आदि का प्रयोग होता है।

एसिडिटी से बचाव के उपाय (precautions of acidity in stomach in hindi)

एसिडिटी मुख्य रूप से पित्त दोष का परिणाम है। जिसके उत्सर्जन में हेतुओ को समझना अनिवार्य है। जिसको एसिडिटी में परहेज कहा गया है। जिसमे भोजन और ऋतुचर्या इत्यादि का सर्वाधिक योगदान है। जो इस प्रकार है –

  • पर्याप्त पानी पिए।
  • अत्यधिक तली – भुनी चीजे न खाना। जैसे – स्नैक्स, बाजारू चिप्स, चाउमीन, समोसे, चाट, आदि न खाना।
  • अत्यधिक चीनी का प्रयोग न करना। जैसे – चाय, कार्बोनेटेड वाटर ( कोल्ड ड्रिंक ), डिब्बों में पैक फ्रूट जूस आदि।
  • देर से पचने वाले पदार्थो का सेवन न करना। जैसे – कोप्ते, पूड़ी, पराठे, तरह – तरह की मिठाईया, छोले आदि।
  • विदाहकारक ( जलन करने वाली ) चीजों का सेवन न करना। जैसे – बिस्कुट, चॉकलेट, केक, पेस्टी आदि।
  • बहुत तीखी और चटपटी नमकीन आदि न खाना।
  • अत्यधिक गर्म भोजन न करना।
  • तिल का प्रयोग न करना।
  • अभिष्यंदी पदार्थ का सेवन न करना। जैसे – चावल के आटे से बनने वाली वस्तुए आदि।
  • आयोडीन नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करे।
  • चीनी या रिफाइंड चीनी के स्थान पर गुड़ का प्रयोग करे।
  • बासी भोजन भूलकर भी न करे।

एसिडिटी के लिए योगासन (acidity yoga in hindi)

एसिडिटी के लिए अनेको प्रकार के योग और आसन है। जिनका अभ्यास कुशल और अनुभवी प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में करना लाभदायी है। जिसको कुछ लोग एसिडिटी का तुरंत इलाज yoga के नाम से भी जानते है। ऐसा होने का कारण योग का प्रकट फल है। अर्थात जैसे ही हम योग करते है। गैस और एसिडिटी आदि की समस्या में शीघ्र लाभ होता है। नियमित इनका अभ्यास करने से इन समस्याओ से बचा जा सकता है।

ठीक ऐसा ही एक्यूप्रेशर में भी होता है। जिसमे शरीरांगों पर स्थित विशेष मर्म बिंदु पर दाब डाला जाता है। जिससे रक्त वाहिनियों में बहने वाले रक्त का बहाव प्रभावित होता है। जिससे अंग विशेष को अधिक दाब के साथ अधिक मात्रा में रक्त प्राप्त होता है। इसको ही एसिडिटी का तुरंत इलाज एक्यूप्रेशर कहा जाता है। जिसमे एसिडिटी उपचार बिना दवा के किया जाता है। एसिडिटी का तुरंत इलाज acupressure अर्थात ऐसा करने से, कुछ ही क्षणों में आराम मिलने लगता है।

आयुर्वेद के अनुसार एसिडिटी पित्त बर्धक रोग है। जिसके वारण के लिए ऐसे सभी आसान उपयोगी है। जिनसे पित्त दोष को शरीर से बाहर निकाला जा सके। जबकि आयुर्वेद में उदर रोगो में अधिक श्रम से बचने का भी विधान निर्देशित है। जिसको ध्यान में रखकर दोनों में तालमेल बिठाकर योगासन का अभ्यास करना चाहिए। जैसे – शवासन, हलासन, सिंहासन, भ्रामरी, सूर्य नमस्कार आदि।

FAQ

एसिडिटी की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

भोजन के कुछ समय पूर्व सेंधा नमक और अदरक के रस का सेवन करने पर एसिडिटी की समस्या कभी नहीं होती।

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?

एसिडिटी में हल्का, सुपाच्य और  स्वादिष्ट भोजन करना चाहिए। जबकि अत्यधिक तला – भुना, तैलीय और गरिष्ट पदार्थो के सेवन से बचना चाहिए।

एसिड बने तो क्या करना चाहिए?

पेट में एसिड बने तो गुनगुने पानी का सेवन सर्वप्रथम करना चाहिए। इसके बाद शुद्ध भोजन आदि का प्रबंध करना चाहिए।

पेट में एसिड बनने पर क्या खाना चाहिए?

पेट में एसिड बनने पर क्षार का प्रयोग करना चाहिए। जैसे – लौकी, तुलसी, पुदीना आदि।

एसिड क्यों बनती है?

पाचक अंगो में विकृति, दोष प्रधानता और दूषित खाद्य पदार्थो ( फ़ास्ट, जंक फ़ूड आदि ) के सेवन इत्यादी से शरीर में एसिड बनता है।

एसिडिटी का परमानेंट इलाज क्या है?

सही समय पर उपयुक्त मात्रा में भोजन और दिन के भोजनांत मठ्ठा और रात्रि के भोजन के बाद दूध का सेवन सभी प्रकार के पेट रोगो में उपयोगी है।

एसिडिटी कैसे भगाएं?

युक्त आहार – विहार, संयम, शांत एकांत निवास और भगवत भजन से एसिडिटी को सदा के लिए भगाया जा सकता है।

गैस और एसिडिटी में क्या अंतर है?

गैस होने पर प्रायः पेट में चुभन, मरोड़, भारीपन, जी घबराने जैसी समस्याए होती है। जबकि एसिडिटी होने पर जलन और खट्टापन आदि की समस्या होती है।

12 thoughts on “एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के घरेलू उपाय : Acidity in Hindi”

  1. Pingback: हिचकी आने का कारण, लक्षण, उपचार, बचाव एवं खानपान
  2. Pingback: सिर दर्द से जल्दी छुटकारा पाने के उपाय | how to get rid of headache fast
  3. Pingback: माइग्रेन के लक्षण, कारण, नुकसान, खानपान और उपचार
  4. Pingback: पेट साफ न होने के लक्षण, कारण और उपचार - भोजन विज्ञान

Leave a Comment

%d bloggers like this: