सिर दर्द के घरेलू उपाय | सिर दर्द ( शिरः शूल ) : headache in hindi

आज की अत्याधुनिक और विसंगति से परिपूर्ण जीवनशैली में, सिर दर्द किसको नहीं होता। परन्तु समस्या तब कष्टकारी हो जाती है, जब स्थाई हो जाती है। जिसके निदान में सिर दर्द के घरेलू उपाय अत्यंत सुरक्षित, चिकित्सीय सिद्धांतो के अनुकूल एवं प्रभावी है। जिनके माध्यम से सिर दर्द का पक्का इलाज होता है। इसके समानार्थी सैद्धांतिक शब्द को सिर दर्द का मंत्र भी कहते है। जबकि सिर दर्द की आयुर्वेदिक दवा सर्वाधिक उपयुक्त है। वही चिकित्सीय उपायों में सिर दर्द की दवा, सिर दर्द का एक्यूप्रेशर पॉइंट आदि का भी उपयोग है। 

सिर दर्द के घरेलू उपाय 

आयुर्वेदान्तर्गत शिरो रोग का अभिप्राय मस्तिष्क में, होने वाली समस्त व्याधियों को द्योतित करती है। जबकि सिर या सर दर्द शिर रोग का आंशिक भाग है। जिसमे वातादि दोषो की प्रधानता होती है। अर्थात जब वातजन्य दोषो की विकृति सिर को प्राप्त होती है। तब सिर में दर्द होता है। ठीक उसी प्रकार जैसे वात दोषो का संचय होने पर पेट में गैस बनती है। जिसके लिए पेट की गैस को जड़ से ख़त्म करने के उपाय किये जाते है। 

आधुनिक चिकित्सा की माने तो सिर दर्द एक लक्षण है। जो सिर में होने वाले अनेक रोगो में पाया जाता है। इसकी आक्रमण प्रक्रिया, अवधि और वेग में बहुत से प्रकार की विविधताएँ पायी जाती है। जैसे वात दोषान्तर्गत होने वाला दर्द पेट दर्द का कारण बनता है। जिसके आधार पर विशेषज्ञ रोग की तीव्रता का आकलन करते है। जिससे अनुकूल चिकित्सा निर्धारित करने में सहायता मिलती है।

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शिरोरोग क्या है ( what is mental disease )

पौराणिक और आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों में, सिर में होने वाले दर्द के नाम में भेद है। जो उनके अपने सिद्धांतो के अनुसार है। जैसे शास्त्रों में दर्द के लिए शूल शब्द का प्रयोग है। जो वात नामक दोष का वाचक है। जैसे वात की अधिकता से पेट में गैस बनने की समस्या का जन्म होता है। जबकि आंग्ल भाषान्तर्गत चिकित्सा में दर्द के स्थान पर पेन का प्रयोग है। वही अंग्रेजी में सिर दर्द ( sir dard in english ) को हेडेच सम्बोधन प्राप्त है। 

शास्त्रों और आयुर्वेदज्ञों के मत में, शिर ( सिर ) को सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान दिया है। जिसको इस प्रकार परिभाषित किया गया है – जिसमे प्राणियों के प्राण ( जीवनी शक्ति ) तथा सम्पूर्ण इन्द्रिया आश्रित हो एवं शरीर के सभी अंगो में उत्तम अंग को शिर कहते है। जिसमे होने वाली वेदना ( पीड़ा ) को शिर के रोग कहते है। जो सभी प्रकार के मस्तिष्क रोगो में पाया जाता है। 

सामान्यतया मष्तिष्कीय विकृतियों को ही, सिर के रोगो के नाम से जाना जाता है। जैसे लीवर बढ़ने पर होने वाले दर्द को सामान्यतः पेट का दर्द ही समझा जाता है। जबकि गहनता से छानबीन करने पर ही, उपयुक्त कारण का पता चल पाता है। जिसके कारण इसको आम और विशेष रोगो के अंतर्गत रखा गया है। 

सिर दर्द क्या है ( what is headache )

आयुर्वेद में सभी शिरोरोगो को त्रिदोषज ( सन्निपातज ) माना गया है। जिसके अनुसार सभी दोषो का मिला जुला रूप सर दर्द ( sir dard ) है। वही देहगत दोष की प्रधनता को आयुर्वेद ने रोग का प्रबल हेतु बताया है। जिसके कारण यह सन्निपातिक होते हुए भी दोष प्रधान रोग है। जबकि चिकित्सीय दृष्टि में इसके सम और विषम नामक दो दोष गिनाये गए है। जिसकी प्रभावशीलता के कारण भी सिर के दर्द में भेद है। जैसे बुखार में देखा जाता है। जिसका शमन करने के लिए बुखार की सबसे अच्छी दवा आवश्यकता पड़ती है। 

सनातन और चिकित्सीय शास्त्रों को मानव देह सप्तधातुमय स्वीकार्य है। जिसके आधार पर धातुगत दोषो की क्षीणता ( रक्त, वसा आदि ) को भी कुछ आचार्यो ने सिर दर्द का हेतु स्वीकारा है। जिसके कारण शिरोरोग को क्षयज कहा गया है। इसलिए धातुओ के क्षीण होने के कारण वात दोष कुपित हो जाता है। जिससे सहसा धातुओ का अपचय ( कमी ) हो जाता है। जिससे सिर में दर्द होने लगता है। 

इसप्रकार किसी भी कारण शिर में दर्द होना सिर दर्द कहलाता है। फिर चाहे यह धीरे – धीरे हो, माध्यम हो या तीव्र होकर अत्यंत तीव्रता के साथ हो। सिर का दर्द किसी स्थान विशेष या पूरे सिर में हो सकता है। कभी – कभी यह सिर के एक हिस्से में होता है। एक बिंदु से शुरू होकर पूरे सिर में फैलता है, या किसी एक स्थान पर होने लगता है। जिसके कारण सिर दर्द में होने वाले दर्द की प्रकृति भी बदलती है। किसी में यह टपकन, जलन, जकड़न आदि प्रभेदों को भी प्रदर्शित करता है।  

सिर दर्द का अर्थ ( headache in hindi meaning )

व्यवहारिक रूप से किसी भी कारण से सिर में होने वाले दर्द को ही सिर दर्द समझा जाता है। जिसमे आंतरिक और वाह्य दोनों प्रकार के कारणों का समावेश हो जाता है। जिसके कारण सिर दर्द का उपचार अत्यंत गूढ़ है। जिसमे सही कारण का विभेद करना कठिन है। जिसको न समझ पाने और समझने वालो के द्वारा भी सिर में दर्द है क्या करें पूछा जाता है। जबकि आमतौर पर सिर दर्द क्यों होता है पूछते है।

परन्तु सभी प्रकार के दर्दो की प्रकृति और उनके कारणों में भेद आयुर्वेद को स्वीकार्य है। जिसको अभेद करने पर स्वतः रोग की शांति हो जाती है। जिसकी आयुर्वेद में वृहद् मीमांसा की गई है। जिसको जानना, समझना और व्यवहार में उतारना चिकित्सा विशेषज्ञ का कर्तव्य है। विशेषज्ञ की बात का यथावत परिपालन परिचारक और रोगी का कर्तव्य है। जिसको आयुर्वेद में चतुष्पाद चिकित्सा से ख्यापित किया है। 

सिर दर्द के कारण ( sir dard ke karan )

अधारणीय वेगो ( मल – मूत्रादि )को रोकने, अधिक सोने, अधिक जागने, जोर से बोलने, ओस में सोने, पूर्वीय हवा ( पुरवईया ) के लगने, अतिमैथुन, दुर्गन्ध को सूघने से, तथा धुल और धुँआ के सेवन से, सिर पर चोट लगने से, वाष्पनिग्रह तथा अधिक रोदन ( रोने से ) करने इत्यादि कारणों से, वात दोष प्रकुपित होकर शिर के रक्त को दूषितकर सिर दर्द पैदा करते है।  

कुछ अन्य सिरदर्द के कारण ( other headache causes ) 

उपरोक्त कारणों के साथ – साथ सिर दर्द के अन्य कारण इस प्रकार है –

अधिक पानी पीने, अधिक जल – क्रीड़ा करने, अधिक मद्यपान ( शराब पीने ) करने, सिर में कृमियो के उत्पन्न होने, तकिये पर सिर को टेढ़ा – मेढ़ा रखने, शरीर की शुद्धि ठीक से न करने, अभ्यंग न करवाने ( सिर पर मालिस और तेल न रखवाने ), निरंतर नीचे देखने ( जैसे मोची इत्यादि का काम करने ), असात्म्य गंध से, आमगन्ध से, बहुत बोलने इत्यादि कारणों से कुपित दोष सिर में जाकर सिर दर्द जैसे रोग उत्पन्न करते है।    

इनको आयुर्वेद में सिर दर्द का कारण ( sir dard ka karan ) माना गया है। जिनका उपयोग रोग निवारण में करना चिकित्सीय विधाओं के अनुरूप है। जबकि आधुनिक समय में सिर दर्द के अन्य कारण भी है। जैसे – 

  • अत्यधिक ठन्डे खाद्य वस्तुओ का सेवन करना।
  • अनावश्यक दवाओं जैसे – कैफीन, गर्भनिरोधक गोलियों आदि का सेवन करना। 
  • न्यून मात्रा में जल का सेवन।
  • अपौष्टिक, अनुपयुक्त और अमात्रात्मक भोजन करना।
  • किसी प्रकार का रोग होना। जैसे – बुखार आदि होना। 

सिर दर्द के प्रकार और कारण ( types of headache and reason )

आयुर्वेदादी शास्त्रों में सिर दर्द के प्रकार में विभेद है। जिसका मूल दोषगत विकृतिनुसार नामकरण है। जो इस प्रकार है –

  1. वातजनित सिर दर्द : वात दोष की प्रधानता से यह सिर दर्द होता है। 
  2. पित्तजनित सिर दर्द : पित्त दोष की प्रधनता से पित्तजनित सिर दर्द होता है। 
  3. कफ या श्लेषमजनित सिर दर्द : कफ नाम दोष के प्रकुपित होने पर कफजनित सिर दर्द होता है। 
  4. सन्निपातज सिर दर्द : वात, पित्त और कफ नामक दोषो के सम्मिलन से सन्निपाटिक सिर दर्द होता है। 
  5. रक्तज सिर दर्द : रक्त के दूषण से रक्तज सिर दर्द होता है। 
  6. कृमिजनित सिर दर्द : आंतरिक और बाहरी कृमियो के कारण कृमिजनित सिर दर्द होता है। 
  7. क्षयज सिर दर्द : रस, रक्तादि धातुओ के क्षय से क्षयज सिर दर्द होता है। 
  8. सूर्यावर्त सिर दर्द : सूर्य किरणों की प्रतिक्रया के कारण सूर्यावर्त सिर दर्द होता है। 
  9. अनंतवात सिर दर्द : त्रिदोषों के कुपित होने से नाड़ियो के पीड़ित होने से होने वाला सिर दर्द अनंतवात सिर दर्द कहलाता है। 
  10. अर्धावभेदक सिर दर्द : सिर के आधे भाग में होने वाले सिर दर्द को अर्धाभेदक सिर दर्द कहा जाता है। 
  11. शंखक सिर दर्द : वात, पित्त, कफ, रक्त शिरा और धमनियों में आश्रित होते है। तब शंख प्रदेश ( कंजो ) में दर्द होने लगता है। जिसको शंखक सिर दर्द के नाम से जाना जाता है। 

सिर में दर्द के लक्षण ( headache symptoms )

देहगत दोष की प्रधानता से अलग – अलग व्यक्ति में, सिर दर्द के लक्षण ( sir dard ke lakshan ) भिन्न होते है। जिसके कारण सिर दर्द के लक्षणों में विभेद है। जबकि सिर में दर्द के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार है – 

  • कनपटियों में चुभने जैसा तेज दर्द होना 
  • दोनों भौहो के बीच में दर्द होना 
  • माथे में दर्द होना 
  • चक्कर आना 
  • प्रकाश न सहन होना 
  • नाक बहना 
  • बुखार होना 
  • आँखों में जलन होना 
  • अरुचि 
  • शिर में भारीपन 
  • सिर में जकड़न होना 
  • आलसपन 
  • आँखों के चारो और सूजन होना आदि। 

सिर दर्द से बचने के उपाय 

आयुर्वेद में कारण का सर्वथा निषेध किया गया है। क्योकि कारण की विद्यमानता कार्य की अनुगति का परिचायक है। इस कारण ही निषेधाज्ञा का पालन करने पर दोष आदि की विकृति नहीं होती। जिससे सिर दर्द होने की संभावना दुर्बल हो जाती है। जिनके कारण इनकी प्रसिद्धी सिर दर्द रोकने के उपाय में है। जो इस प्रकार है – 

  • दिवा शयन न करे
  • अधारणीय वेगो ( मल – मूत्रादि ) को न रोके
  • अधिक रात्री जागरण न करे
  • मादक पदार्थो के सेवन से बचे 
  • जोर बोलने से बचे
  • पूर्व दिशा की हवा का सेवन न करे
  • ओस में रहने या घूमने से बचे
  • अतिमैथुन से बचे 
  • असात्म्य गंध को न सूँघे
  • धुँआ, धूलि, धूप और हिम सेवन से बचे 
  • गुरु, खट्टे और कच्चे ( हरे ) पदार्थ का सेवन न करे
  • अत्यधिक शीतल जल के सेवन से बचे
  • आम दोष, ज्यादा रोना, पानी में खेलना, मन के संताप आदि से बचे 
  • सिर में चोट लगने से बचाव करे। जैसे – वाहन चलाते समय हेलमेट, सीट बेल्ट आदि का प्रयोग करे।
  • बारिश में न भीगे

सिर दर्द का इलाज ( sir dard ka ilaj ) 

सिर दर्द का इलाज

आजकल सर दर्द का इलाज ( sir dard ka ilaaj ) करने की अनेको प्रणालियाँ है। जिसमे सबसे अधिक प्राचीन आयुर्वेद है। तदुपरांत होम्योपैथी और एलोपैथी आदि का उल्लेख है। जिनको आज नवीन चिकित्सीय विधा के रूप में स्वीकारा जाता है। जिनमे प्रायः औषधि का ही प्रयोग होता है। जो आज के समय में डाइलूशन और टेबलेट आदि के रूप में उपलब्ध है। 

परन्तु सनातनी चिकित्सा में मलापनोदन की वाह्य एवं आंतरिक विधिया बतलाई गई है। जिसका कारण आयुर्वेद ने मल संचय को ही रोग का हेतु स्वीकारा है। जिसके निवारण के लिए प्रकुपित दोषो के संशमन पर प्रथम दृष्टि डाली गई है। क्योकि रक्त और पित्त दोष की विकृति से होने वाला सिर दर्द दिन में अधिक और रात को शांत हो जाता है। जबकि वात और कफ दोष की विकृति से होने वाला सिर दर्द रात्रि में अधिक और दिन में कम होता है। एसिडिटी में भी सर दर्द देखा जाता है। जो पित्त दोष का परिणाम है। जिसके लिए एसिडिटी को जड़ से ख़त्म करने के उपाय अपनाए जाते है। 

इस कारण यदि सिर में दर्द हो रहा है तो सिर दर्द का उपचार दोषप्राधान्यता के आधार पर करना उचित है। यद्यपि शिरोरोग प्रायः त्रिदोषज होते है। फिर भी दोषो की प्रधानाप्रधनता का विचार कर सर्वप्रथम प्रधान दोष की चिकित्सा करने पर शीघ्र लाभ होता है। इसलिए यदि सिर दर्द हो रहा है तो उपरोक्त कारणों को दूर करने के प्रयास करने चाहिए। जिसमे स्वेदन तथा उपनाह, बंधन, गण्डूष और कवलधारण आदि है। जिसके लिए उर्दू भाषी सिर दर्द उपचार को सिर दर्द की दुआ ( sir dard ki dua ) कहते है। 

सर दर्द के उपाय ( sir dard ke upay )

आधुनिक समय में सिर दर्द के उपाय अनेको है। जिन्हे सिर दर्द के टोटके आदि नामो से भी जाना जाता है। इन सभी का एकमात्र उद्देश्य सिर दर्द से छुटकारा दिलाना है। जिसमे औषधियों, दवाओं आदि का उपयोग है। जो आज की प्रचलित एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद आदि में है। जिनका उपयोग उनके अपने सिद्धांतानुरूप है। यद्यपि सभी उपचार पद्धतियाँ है। सभी अपने – अपने स्थान पर लाभकारी है। अंतर केवल इतना है कि कुछ आपात स्थिति से निपटने में उपयोगी है। कुछ बचावकारी है तो कुछ रोग को स्थाई रूप से समाप्त करने की योग्यता रखती है।

आज का समय मशीनों का है। जिसमे कार्य करने वाले भी मशीनों जैसे है। जबकि शास्त्रों में मानव को जीवो में सर्वोपरि स्थान दिया गया है। जिसमे आत्मा, मन और विविध प्रकार के अंगो का युग्मन है। जिसका सम्मिलित स्वरूप ही स्थूल शरीर कहलाता है। जिसमे होने वाला रोग व्याधि कहलाता है। जिसके आधार पर मानव को भी मशीन या यन्त्र माना जा सकता है। परन्तु आयुर्वेद शास्त्रों में स्थूल के मूल में सूक्ष्म, सूक्ष्म के मूल में कारण शरीर का वर्णन है। जिसके आधार पर मनुष्य शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं सहित अविद्या ग्रस्त है। जिसमे स्थूलगत देह की पीड़ा व्याधि और मन की पीड़ा आधि है।  

इस कारण जिस शरीर में जो रोग है। उसकी निवृत्ति के उपाय को आयुर्वेद में चिकित्सा के रूप में ख्यापित किया गया है। इसलिए शरीरगत रोग की पहचान शरीरगत दोष के आधार पर करने का विधान आयुर्वेदोक्त सिद्धांत है। जो सिर में दर्द क्यों होता है के निर्धारण उपयोग होता है। जो सिर में दर्द होने पर भी लागू होता है। जिसमे सिर दर्द की घरेलू दवा (headache home remedies ) अत्यंत प्रभावकारी सिद्ध है। ठीक उसी प्रकार जैसे फैटी लीवर में फैटी लीवर का घरेलू उपचार।  

सिरदर्द के घरेलू उपाय ( home remedies of headache )

आयुर्वेदीय चिकित्सा के अंतर्गत हमारे आपके घर के आस – पास, पायी जाने वाली औषधियों से होने वाली चिकित्सा को घरेलू उपाय कहते है। जब इनसे सिर दर्द का उपचार किया जाता है। तब सिर दर्द का घरेलू उपचार (home remedies for headache) कहलाता है। सिरदर्द के घरेलू उपचार सस्ते, आसानी से उपलब्ध, शीघ्र असरकारी और स्थायी है। इसलिए इनको जन कल्याणकारी चिकित्सीय उपाय के रूप में देखा जाता है। शायद इसी कारण क्या है सिर में दर्द का घरेलू उपाय पूछा जाता है। 

हमारी रसोई में पाई जाने वाली औषधिया, इतनी प्रभावशाली और उपयोगी है। कि हर प्रकार की बीमारी में प्राथमिक उपचार के तौर पर प्रयोग होती है। यदि निर्बाध रूप से इनकी निरंतरता बनायी राखी जाय तो स्थाई उपचार के जैसी कार्यशील है। इन्ही विशेषताओं के कारण लोग सिर दर्द के घरेलू उपाय बताएं की बात करते है। रोजमर्रा के खान – पान में उपयोगिता स्वाद और गंध आदि से हम परिचित होते है। जिनके कारण इनको ढूढ़ना और उपयोग करना आसान है। 

आयुर्वेद में सिर दर्द घरेलू उपाय (sir dard ke gharelu upay) निम्न है – 

  • पानक के रूप में सर्दी के दिनों में बादाम, पोस्ता के दाने आदि का। गर्मी के दिनों में अनार, अंगूर, नारंगी, बदरीफल आदि का प्रयोग करने से सिर दर्द शांत होता है।
  • पित्तजन्य सिर दर्द में चंदनादि तेल, ब्राह्मी तेल, हिमांशु तेल की मालिस करने से लाभ होता है।
  • वात और कफ जन्य सिर दर्द में बादाम तेल, नारायण तेल, लक्ष्मीविलास तेल की मालिस उपकारक है। 
  • अपराजिता की जड़ या फल के स्वरस से नस्य देने पर सिर दर्द ठीक हो जाता है।
  • अपराजिता की जड़ को कान में बाँधने से सिर दर्द नष्ट हो जाता है।

सर दर्द की दवा ( sir dard ki dawa )

आयुर्वेद सिर दर्द की दवा ( headache medicine ) और उपचार दोनों से समृद्ध है। जिसमे अलग – अलग आचार्यो के अपने मत है। जिसमे उपचार की विधि और औषधि योगो में भेद है। जो उनके अपने अनुभव और विद्या के आधार पर उल्लेखित है। जिसमे दर्द नाशक वनस्पतियो के कल्क, स्वरस या क्वाथ से सिद्ध घी, दुग्ध एवं तेल का पान और मालिस तथा सेक, लेप, प्रदेह, धूम, नस्य, अभ्यंग, शिरोबस्टी, आस्थापन, अनुवासन, विरेचन, वमन, शिरोविरेचन, गण्डूषधारण, अवपीड़न और शिरावेध का वर्णन है।  

जिनकी सहायता से सिर दर्द शमन के उपाय किये जाते है। जिसमे नस्य की विरेचन, वृहण और शमन की विधि का भी वर्णन है। जिसमे शिरोविरेचन का प्रयोग सिर में होने वाले दर्द में किया जाता है। वृहणकारी द्रव्यों का प्रयोग वात के कारण होने वाले सिर दर्द में किया जाता है। जबकि शमनकारी नस्यो का प्रयोग नेत्ररोग एवं केशदोषो में किया जाता है। वही शिरोरोग में आचार्य सुश्रुत ने शिरोबस्ती का अत्यधिक महत्व स्वीकारा है। इसलिए प्रायोगिक धरातल पर सिर दर्द के संशमन के लिए अत्यधिक लाभदायी भी है।

जबकि पतंजलि सिर दर्द की दवा में पतंजलि बाम का प्रयोग होता है। जिसका निर्माण उनके नियमावली के आधार पर होता है। तिल्ली बढ़ने पर भी पतंजलि की दवाई लाभदायी है। 

सिर दर्द की दवा टेबलेट नाम ( headache tablet name)

एलोपैथी में अनेक रोगो में पेरासिटामोल टैबलेट का उपयोग होता है। जिसमे पेरासिटामोल 650 mg
इत्यादि है। जिनका उपयोग सिर दर्द की गोली ( sir dard ki tablet ) जैसा होता है। वही ए पी सी पाउडर भी सर दर्द का शमन करता है। जिसमे एस्प्रिन 5 ग्रेन, फेनासीतीं 3 ग्रेन, कैफीन साइट्रस 2 ग्रेन मिला होता है। जिसको खरल में पीस कर ठन्डे पानी के साथ लेने पर सर दर्द को शांत करता है। जबकि कुछ प्रमुख सिर दर्द की टेबलेट नाम लिस्ट (sir dard ki tablet name) इस प्रकार है –

  • सिर दर्द के लिए पेरासिटामोल – paracetamol for headache
  • सिर दर्द के लिए पानामोल – panamol for headache
  • सिर दर्द के लिए डोलो – dolo 650 for headache
  • सिर दर्द के लिए क्रोसिन – crocin for headache
  • सिर दर्द के लिए डिस्प्रिन – disprin for headache
  • सिर दर्द के लिए एस्पिरिन – aspirin for headache
  • सिर दर्द के लिए आइबूप्रोफेन – ibuprofen for headache

यह सभी दवाई निद्राजनक औषधियों के योग से तैयार किये गए है। जिसमे आइबूप्रोफेन टैबलेट आदि के अतिरिक्त सिर दर्द का बाम (headache balm) भी प्रयोग होता है। जिसको सिर दर्द बाम ( sir dard balm ) के नाम से जानते है। सिर दर्द के लिए रोल ऑन ( roll on for headache ) का भी प्रयोग होता है। जिसमे ए पी सी पाउडर का ही मिश्रण अन्य योगो के साथ डाला जाता है। जिसका नियमित प्रयोग करने पर इसकी लत भी लग सकती है। 

सिर दर्द की आयुर्वेदिक दवा ( headache ayurvedic medicine )

आयुर्वेद में सिर दर्द को समाप्त करने के अनेको योग है। जिसमे नस्य, लेप, चूर्ण, तेल, कल्क, क्वाथ आदि का वर्णन है। जिनसे होने वाले उपचार को सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार कहते है। जिसमे सिर दर्द की प्रकृति, देहगत दोष आदि के बलाबल का विचार किया गया है। जिनसे सिर दर्द की अभिसात्मक चिकित्सा की जाती है। जिनके कुछ योग इस प्रकार है –  

  • नवसादर और चूने को महीन पीसकर जल से गीला करके सूघने सिर की पीड़ा शांत हो जाती है। 
  • फिटकिरी और कपूर के चूर्ण का नस्य लेने पर सिर में होने वाला दर्द शीघ्र ही बंद हो जाता है।
  • षडबिन्दु तेल की 3 – 3 बूँद दोनों नासा छिद्रो में डालने से जल्दी ही सिर दर्द ठीक हो जाता है। 
  • कुमारी तेल, कनक तेल, तपतराज तेल, रूद्र तेल और भृंगराज तेल भी सिर दर्द में उपयोगी है।
  • महालक्ष्मी विलास रस को दो रत्ती प्रमाण में लेकर सेवन करने से सिर दर्द नष्ट होता है। 
  • सोंठ के फायदे सिर दर्द में भी है। जिसमे सोंठ के तीन माशे को दूध के साथ पीसकर, छानकर नस्य देने से सिर दर्द नष्ट होता है।  

सिर दर्द की होम्योपैथिक दवा ( headache medicine in homeopathy )

एलोपैथी और आयुर्वेद की भाँती होम्योपैथी भी सिर दर्द की उपचार पद्धति है। जिसमे अनेको प्रकार की दवाई है। जिनसे सिर में होने वाले दर्द इत्यादि का उपचार किया जाता है। जिसकी कुछ प्रचलित दवाई निम्न है – 

एकोनाइट : सर्दी लगने से होने वाले सिर दर्द में उपयोगी है। जिसमे खांसी आने की समस्या के साथ बुखार आना, घबराहट आदि भी देखा जाता है। 

ग्लोनाइन : लू लगने से दृष्टि केंद्रित होने पर यह लाभकारी है। 

एण्टियम क्रूड : अत्यधिक गर्मी बढ़ने से बेहोश होने की स्थिति होने और सिर में दर्द होने पर गुणकारी है। 

जेल्सीमियम : जेल्सीमियम का सिर दर्द माथे के बीच में होता है। जिससे आँखे अनायास ही बंद पड़ने लगती है। 

सिर दर्द में क्या खाना चाहिए ( headache food ) 

सभी जीवो को भूख स्वाभाविक रोग के रूप में प्राप्त है। जिसकी पूर्ति भोजन से होती है। परन्तु भोजन का अनुकूल संबंध जहा हमें निरोग रखता है। वही इसकी प्रतिकूलता रोग में हेतु है। फिर चाहे यह जानबूझकर हो या अनजाने में हो। इस कारण रोग से उपरत होने में इनका परहेज अत्यावश्यक है। ऐसा न करने पर रोग की अनुगति नित्य सिद्ध है। इस कारण कुछ ऐसे द्रव्य है। जिनका सेवन सिर दर्द में लाभकारी है। जैसे –

अन्नो में साठी और शाली चावल खाना हितकारी है। सब्जियों में बथुआ, करेला, दाख और सहजन खाना उत्तम है। वही फलों में आम, अनार, विजयरा नीबू खाना गुणकारी है। द्रव्य पेय पदार्थो में तेल, छाछ, जूस, दूध, नारियल और नारियल पानी पीना श्रेष्ठ है। 

सिर दर्द में क्या नहीं करना चाहिए ( don’t do in headache)

सिर में दर्द होने पर छींक, जम्भाई, नींद, आंसू और मल – मूत्रादि के वेग को नहीं रोकना चाहिए। साथ ही दूषित जल का सेवन, विरुद्ध अन्न का सेवन, नदियों से निकलने वाले जल का सेवन, दिन में शयन। सिर के रोगियों को नहीं करना चाहिए। 

सिर दर्द के लिए एक्यूप्रेशर पॉइंट ( acupressure points for headache )

सिर दर्द के लिए एक्यूप्रेशर पॉइंट

जिस प्रकार सिर दर्द का जड़ी बूटी सिर दर्द को दूर भगाती है। उसी प्रकार एक्यूप्रेशर भी सिर दर्द की समस्याओ से निजात दिलाती है। जिसमे किसी भौतिक द्रव्य की आवश्यकता नहीं होती। बल्कि शरीरंगो पर स्थित मर्म बिन्दुओ पर दाब डालकर रक्त दाब को प्रभावित किया जाता है। जिससे रक्त की संकुलता सकारात्मक रूप से अपना प्रभाव दिखाती है। जिससे सिर दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। 

सिर में होने वाले दर्द को भगाने के लिए एक्यूप्रेशर में निम्नलिखित युक्तियाँ बताई गई है –

  • दोनों भौहो के मध्य का स्थान
  • अंगूठे और तर्जनी के बीच का स्थान
  • गर्दन के आस – पास का हिस्सा
  • कंधे के ऊपरी हिस्से का स्थान  

सिर दर्द का योग ( yoga for headache )

आजकल सिर दर्द का घरेलू उपाय ( sir dard ka gharelu upay ) की भाँती योग का भी बोलबाला है। जिसमे आसन और प्राणायाम सर्वाधिक लोकप्रिय है। परन्तु ध्यान रखना आवश्यक है कि यम – नियम के बिना इनका कोई विशेष लाभ सिद्ध नहीं होता। फिर भी व्यायाम के तौर पर होने वाले लाभ इनसे प्राप्त होते है। जिसमे विविध प्रकार की शारीरिक गतिविधियों से तंत्रिकाओं और स्नायु का मर्म बिंदु सहित रक्तचाप आदि के द्वारा सम्प्रेषण होता है।

जिससे रक्तवाहिकाओं में स्पंदन होता है। परिणामस्वरूप शरीर में एकत्रित मल का निष्कर्षण धीरे – धीरे होने लगता है। जिसको यथा विधि निर्बाध रूप से बनाये रखने पर पूर्णतया मल विक्षेप होने पर सहज स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। जिसका उपयोग हम ज्ञान और कर्म को विकसित करने आदि के लिए करते है। समग्र शास्त्रों में विधि – निषेध की चर्चा आती है। जिसके कारण सिर दर्द में कौन से आसान और प्राणायाम करने चाहिए, कौन से नहीं करने चाहिए इसकी भी चर्चा है।  

सिर दर्द के लिए प्राणायाम

सिर दर्द के लिए प्राणायाम

आज के योग विशेषज्ञ प्राणायाम को सिर दर्द की दवा के जैसा मानते है। जबकि योग दर्शन के अनुसार मलापनोदन की क्रिया योग के द्वारा भी संभव है। जिसमे प्राणो पर विभिन्न संक्रियाओं के माध्यम से नियंत्रण साधा जाता है। जिसमे श्वास – प्रश्वास पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। जिससे मन शुद्ध होता है। साथ ही मस्तिष्क में पायी जाने वाली तंत्रिका तंत्रो पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिससे सिर दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। 

जिसके लिए योग दर्शन में निम्नलिखित प्राणायाम बताये गए है –

  • भ्रामरी
  • अनुलोम – विलोम
  • कपालभाती
  • उद्गीथ
  • उज्जायी 

उपरोक्त सभी प्राणायाम को सिर के दर्द में लाभकारी बताया गया है। जिसकी उपयोगिता सभी प्रकार के शिर में होने वाले रोगो सिद्ध है। प्राणास्पंदन की प्रक्रिया का आनुसांगिक रूप प्राणवायु है। जिसका उपयोग प्राणायाम में होने के कारण अनुपूरक है।  

सिर दर्द के लिए आसन

सिर दर्द के लिए आसन

आजकल लोग आसन को ही योग का नाम देते है। जबकि योग दर्शनानुसार मानव शरीर में पाए जाने वाले अंगविन्यास के संकुचन और प्रसार में संलिप्त मांसपेशियों की देखभाल है। जिसमे सन्निहित सूक्ष्म नलिकाओं में पाए जाने वाले रक्त की शुद्धि शिरा और धमनियों के माध्यम से होती है। जिसमे निम्नलिखित आसान उपयोगी है –

  • ताड़ासन
  • शशकासन
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सिर दर्द व्यायाम ( headache exercise )

आयुर्वेदादी शास्त्रों में स्वास्थ्य संरक्षण और पुनः स्वास्थ्य की, प्राप्ति के लिए परिश्रम की बात स्वीकारी गई है। जिसमे मुख्य रूप से शरीर के अंदर और बाहर पाए जाने वाले अंगो की क्रियाशीलता को प्रभावी बनाना है। जिसके लिए समस्त शारीरिक अंगो का पूरक और सामंजस्य पूर्ण व्यवहार है। जिसकी अबाधकता स्वास्थ्यानुकूल है। वही इनकी बाधकता रोगकारक है। जिसको बनाये रखने में व्यायाम आदि का अभूतपूर्व योगदान है। 

जिसके लिए कर्म सम्पादन सभी जीवो के लिए विहित है। इस कारण शहरी और ग्रामीण दोनों स्थानों पर निवास करने वाले वयस्क, अवयस्क और वृद्ध सभी के लिए अनिवार्य है। अंतर केवल व्यायाम के समय और प्रकार में है। जिसका पालन निरोगी रहने की इच्छा रखने वाले को निरंतर करते रहना चाहिए। इसलिए सिर दर्द से निजात पाने के लिए व्यायाम का सानुकूल अभ्यास अपेक्षित है। 

उपसंहार :

अत्याधुनिक समय में भी सिर दर्द के घरेलू उपाय सर्वाधिक लोकप्रिय है। जिसका मुख्य कारण यह जितने प्रभावशाली और असरकारक है। उतने ही सस्ते और आसानी से उपलब्ध है। प्रतिदिन इनका उपयोग भोजन आदि में होने के कारण हानिरहित सरीखे है। साथ ही आयुर्वेदीय सिद्धांतो के अनुरूप है। जिससे यह हमारी आस्था और विशवास पर खरे उतरते है। जिसके कारण इन नुस्खों का उपयोग, निसंदेह सिर दर्द की दवा है।

यह नुस्खे अनादि काल से प्रायोगिक और प्रामाणिक है। जिनके कारण ये हमारी निष्ठा की परिपुष्टि भी करते है। अब तो इनकी क्रियाशीलता की उपयुक्तता आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करता है। जिनके कारण इनको आज भी सर्वाधिक विश्वशनीय समझा जाता है। वही आज की विकसित चिकित्सा भी उपयोगी है। पर कितनी प्रभावशाली और भरोसेमंद है। यह आज भी शोध का विषय है। 

मानव सहित सभी जीवो का स्वास्थ्य अनेक आयामों पर निर्भर है। जिसमे भोजन पानी, दिनचर्या आदि का सम्मिलन है। जिसकी अनुकूलता सिर दर्द जैसे सभी रोगो पर विजय दिलाती है।    

FAQ

सिर दर्द में किस तेल की मालिश करें?

आयुर्वेद में शीत ऋतु में उष्ण तेल ( बाद तेल ) और ग्रीषम ऋतु में ठन्डे ( तिल ) तेल के उपक्रम की बात बतायी गई है। परन्तु तिल तेल एकमात्र ऐसा तेल है। जिसका प्रयोग सभी प्रकार के सिर दर्द में, सभी ऋतुओ में किया जा सकता है।  

सिर दर्द की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

वत्सनाभ और मुलेठी के महीन चूर्ण की बहुत ही अल्प मात्रा ( 1/4 रत्ती ) सूघने से तत्काल सिर दर्द शांत हो जाता है। जो लगभग – लगभग सभी तरह के सिर को दूर करने में उपयोगी है।  

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