दूध के बाद सबसे अधिक अगर कोई चीज प्रयोग में लाई जाती है, तो वह है दही। दही में प्रोटीन, कैल्शियम कई तरह के इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल आदि पाए जाते है। जिसके कारण लोग दही का प्रयोग पकवानों के साथ – साथ भोजन के रूप में भी करते है। लेकिन आजकल मीठे की मनाही से सवाल उठने लगा है कि क्या दही में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं।

भारतीय संस्कृति में दही को मंगलकारक माना जाता है। जिसके कारण हम भारतीय सभी शुभ कार्यों में दही का प्रयोग करते है। फिर चाहे वह शादी – विवाह हो या किसी कार्य की सिद्धी के लिए घर से बाहर निकलना हो। अक्सर दही का इस्तेमाल होता ही है।
किन्तु दही को आयुर्वेद ने रसायन की श्रेणी में रखा है। जिससे इसकी उपयोगिता में चार चाँद लग जाते है। लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से दही में नमक के नुकसान बताये गए है। जिससे लोगों के मन में संशय बना रहता है कि दही में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं। जैसे शुगर में दही खाना चाहिए या नहीं का बना रहता है।
दही में नमक मिलाकर खाना चाहिए या नहीं ( dahi mein namak khana chahie ya nahin )
दही ( कर्ड ) का निर्माण किण्वणीकरण की प्रक्रिया के द्वारा होता है। जिसमे दूध के लैक्टोबैसिलस अम्ल की उपस्थिति में दही को बनाते है। जिससे दही में बैक्टीरिया ( जीवाणु ) की भरमार हो जाती है। यह जीवाणु इतने छोटे होते है कि सामान्य आँख से इन्हे नहीं देखा जा सकता।
जीवाणुओं की उपस्थिति के कारण ही आजकल की भाषा में इसे प्रोबायोटिक के नाम से जाना जाता है। जो हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही गुणकारी है। जिसमे मिश्री, शक्कर या गुड़ मिलाने से इनकी संख्या में कई गुना की बढ़ोत्तरी हो जाती है। जिससे यह हमारे और भी उपकारी बन जाते है।
लेकिन जिन लोगों को दही का स्वाद नमक के साथ भाता है। उनमे संशय बना ही रहता है कि दही में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं। लेकिन आजकल कुछ कथाकथित लोगों का मानना है कि दही में नमक के फायदे है। जिससे वे दही में नमक मिलाकर खाना चाहिए की सिफारिस करते है।
दही के साथ नमक खाना चाहिए कि नहीं ( dahi ke sath namak khana chahie ki nahin )

हालाकिं दही में चीनी मिलाकर खाने के फायदे है न कि नमक के। परन्तु आजकल चीनी खाने के भी बहुत से नुकसान है। विशेषकर मधुमेह इत्यादि रोगों में। इस कारण बहुत से लोगों को नमक खाना मजबूरी है। जिससे वे दही में नमक के फायदे और नुकसान की तलाश करने निकल पड़ते है।
लेकिन कोई भी खाद्य सामाग्री अपने भीतर अपने स्वाभाविक गुणों को समाहित रखती है। जिसके बगैर न तो उस वस्तु कोई सत्ता है और न ही कोई उपयोगिता। इस कारण हमें सैद्धांतिक रूप से यह जानना आवश्यक है कि दही में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं। इतना जानने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दही में नमक डालकर क्यों नहीं खाना चाहिए?
जब हम दही में नमक को मिलाते है। तो दही में बनने वाले सूक्ष्म जीवाणु मर जाते है। जिससे दही हमारे लिए उतना फायदेमंद नहीं रह जाती। जितना कि बिना नमक मिलाये हुआ करती है। जिसको न समझ पाने वाले लोगों को शंका बनी रहती है कि दही में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं।
ध्यान रहे : नमक मिलाकर दही खाने के नुकसान है न कि फायदा। जबकि दही में काला नमक और काली मिर्च खाने के फायदे है। जैसे गर्मियों के समय दही से बनी लस्सी का सेवन करने से लाभ होता है।
दही खाने के फायदे

चरक सूत्र अध्याय 27 श्लोक 225- 228 में दही के गुण बतलाये गए है। जोकि इस प्रकार है –
यह रुचिकारक, अग्नि को बढ़ाने वाला, वीर्यवर्धक, स्निग्धता देने वाला, बलवर्धक, विपाक में अम्ल रस वाला, उष्णवीर्य, वातनाशक, मंगल ( शुभशकुन ) कारक तथा मांस तत्व को बढ़ाने वाला होता है।
वही पीनस ( प्रतिश्याय ) रोग में, अतिसार में, शीतज्वर में, विषमज्वर में, अरुचि में, मूत्रकृच्छ ( मूत्र के कष्ट से निकलने में ), और कृशता में दही का प्रयोग लाभदायक है।
जबकि शरद, ग्रीष्म और वसंत ऋतुओं में प्रायः दही का सेवन ( उष्णवीर्य होने के कारण ) वर्जित है। जबकि ज्यादातर लोग दही को गर्मियों के दिनों में खाना अच्छा मानते है। जोकि पूणतः अन्याय संगत है। बल्कि दही के स्थान पर छाछ का प्रयोग न्याय संगत है।
अतः शेष तीन ऋतुओं ( हेमंत, शिशिर, और वर्षा ) में दही का सेवन लाभदायक होता है। रक्तपित्त तथा कफज विकारों में दही का सेवन अहितकर होता है। यह सब बाते नमक मिले दही पर लागू नहीं होती। बल्कि मीठा मिलाये गए या संस्कारित दही पर ही लागू होती है।
निष्कर्ष :
भावप्रकाश निघण्टु में स्पष्ट रूप से शक्कर मिला हुआ दही श्रेष्ठ कहा गया है। जिसमे प्यास, रक्तविकार, और दाह को नष्ट करने वाले गुण पाए जाते है। जबकि गुड़ मिले हुए दही को वातनाशक, वीर्यवर्धक, रस रक्तादिवर्धक, तृप्तिकारक तथा गुरु कहा गया है। लेकिन आयुर्वेद में कहीं भी दही में नमक डालकर खाने की बात नहीं कही गई है। जबकि संस्कार विशेष से दही का सेवन सदैव होता ही है।
किन्तु दही में नमक मिलाकर खाने की बात पूरे आयुर्वेद में कही भी नहीं मिलती। इसका अर्थ यह नहीं कि आयुर्वेद ने दही में नमक का सेवन नहीं करने को कहा है। बल्कि दही को छौंक – बघार करके बहुत ही सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। न कि बिना बघारे। नहीं तो बिना नमक मिले दही का सेवन भी ऋतुनुसार किया जा सकता है।
उद्धरण :
- चरक संहिता सूत्र अध्याय 27
- भावप्रकाश निघण्टु दधिवर्ग
FAQ
दही में क्या मिलाकर खाना चाहिए?
मीठी चीजे जैसे गुण, राब, सक्कर अथवा चीनी मिलाकर दही का सेवन किया जा सकता है।
दही में क्या मिलाकर नहीं खाना चाहिए?
लवण अर्थात नमक को दही में मिलाकर खाना हानिकर है।
दही में कौन सा नमक डालना चाहिए?
दही में समुद्री या आयोडीन नमक का बिलकुल भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि किसी कारणवश करना भी हो तो काले नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है। वो भी संस्कारित करके।
क्या दही खाने से पिंपल्स होते हैं?
नहीं, पिंपल्स होने की मुख्य वजह फास्ट और जंक फ़ूड होते है। जिसमे उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स पाया जाता है। जिसको बनाने में कई तरह के मिनरल और वेजिटेबल आयल आदि का प्रयोग किया जाता है। जिससे हमारे पेट में कब्ज की प्रवणता पायी जाने लगती है।
दही किन लोगों को नहीं खाना चाहिए?
जिन लोगों को हड्डियों, घुटने आदि में दर्द रहता है। उन्हें दही का सेवन नहीं करना चाहिए। माहवारी के दौरान भी दही का सेवन हानिकर है।