शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं

आजकल शुगर ( टाइप 2 ) होने का सबसे बड़ा कारण पोषण को माना जाने लगा है। जिसको पूरा करने में अमूमन लोग दूध की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते है। लेकिन आयुर्वेद में मधुर, स्निग्ध, शीतल और स्तन्य आदि दूध के मूल गुण माने गए है। जबकि आजकल की मधुमेह चिकित्सा में शर्करा सेवन का निषेध किया जाता है। इस कारण सवाल उठना स्वाभाविक है कि शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं?  

शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं

एक ओर दूध में कैल्शियम और प्रोटीन जैसे आवश्यक और महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते है। वही दूसरी ओर इसमें कार्बोहाइड्रेट भी पाया जाता हैं। जो आपके शरीर में पाई जाने वाली ग्लूकोज़ की मात्रा को प्रभावित कर सकता हैं। जैसा कि गेहू खाने से होता है। इसलिए अब यह जानना और भी जरूरी है कि शुगर में गेहूं खाना चाहिए या नहीं

आमतौर पर शुगर के लक्षण और इलाज में खानपान पर, विशेष ध्यान रखने की सलाह खाद्य विशेषज्ञ देते है। लेकिन अक्सर हमारा ध्यान धन – मान ( कैरियर – पैसे ) पर ही रहता है। जिससे न तो हमें खानपान से सम्बंधित खाद्य निषेधाज्ञाओं की जानकारी हो पाती है, और न हम इनका पालन कर पाते है। 

इससे हमारे भीतर धीरे – धीरे पोषकता की कमी पनपने लगती है। जो कुछ दिनों तक जारी रहने पर, किसी न किसी रोग के रूप में प्रकट होती है। जिसकों आयुर्वेद में अपथ्य निमित्तज विकार कहा गया है। इसलिए मधुमेह को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए दूध और रक्त शर्करा के बीच के संबंध को समझना अत्यंत आवश्यक है। इस कारण डायबटीज रोगियों को जान लेना आवश्यक है कि डायबटीज में दूध पीना चाहिए कि नहीं?

डायबिटीज के प्रकार ( Type Of Diabetes )

यदि आप दूध के शौकीन है तो दूध आपके लिए का और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वही आयुर्वेद में स्वास्थ्य को संतुलित रखने में दूध को आवश्यक माना गया है। क्योकि इसमें जीवनी शक्ति पायी जाती है। ऐसे में शुगर रोगियों को यह जानना आवश्यक है कि शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं?  

आमतौर पर दो प्रकार की शुगर देखने को मिलती है –

  • सहज ( Diabetes Type 1 )
  • और असहज ( Diabetes Type 2 )

वही कुछ मामलों में शुगर के दो प्रकार और भी पाए जाते है –

जिन्हे

  • Diabetes Type 3
  • और Diabetes Type 4  

जिन्हे आयुर्वेदानुसार असहज प्रमेह अथवा मधुमेह कहा जाता है। 

ब्लड शुगर के लक्षण

दोष और धातुओं के क्षय हो जाने से अलग – अलग रोगियों में, शुगर के लक्षणों में भिन्नता पाई जाती है। परन्तु आमतौर पर ब्लड शुगर में निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते है –

  • बार – बार मीठा पेशाब होना 
  • बार – बार प्यास लगना
  • थकान होना
  • आँखों से धुंधला दिखाई पड़ना
  • घाव का जल्दी न भरना
  • शरीर की रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाना
  • बिना कारण के शरीर का भार कम होते जाना, आदि।  

दूध के गुण

दूध के गुण

आमतौर पर आयुर्वेद में दूध को निम्नलिखित गुणों से युक्त माना गया है – 

दूध मधुर, स्निग्ध, शीतल, स्तन्य माना गया है। यह तुष्टिकारक मांस को बढ़ाने तथा पुष्ट करने वाला, वीर्यवर्धक, बुद्धि के लिए हितकर, बलवर्धक, मन को प्रसन्न करने वाला, जीवनी शक्ति को बढ़ाने वाला, थकावट को दूर करने वाला, श्वास और कास का विनाशक है।

यह रक्त पित्त का नाशक, टूटी हूत हड्डियों को जोड़ने तथा घाव को भरने में सहायक होता है। सभी प्राणियों के लिए अनुकूल दोषशमक एवं स्रोतसों का शोधक है। तृष्णा को मिटाता है। जठराग्नि को प्रदीप्त करता है। कमजोर पुरुषों के लिए और घाव को भरने में दूध को श्रेष्ठ कहा गया है। 

इतना ही नहीं दूध अत्यंत वाजीकरण, अवस्था को स्थिर रखने वाला, आयु को बढ़ाने वाला, सन्धानकारक तथा रसायन है। इतने गुणों के पाए जाने के बाद भला ऐसा कौन होगा जो दूध का सेवन नहीं करना चाहेगा। लेकिन जब बात मधुमेह की हो तो सभी के मन में एक ही प्रश्न होता है कि शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं?

शुगर में दूध पीना चाहिए या नहीं

आमतौर पर पुरुषों में शुगर के लक्षण और महिलाओं में शुगर के लक्षण का पता, रक्त शर्करा के स्तर को माप कर ही लगाया जाता है। मगर पेशाब में शुगर के लक्षण का पता, पेशाब में पायी जाने वाली शर्करा को जांच कर लगाया जाता है। पर इसके लिए पेशाब की जांच करने की आवश्यकता होती है। 

परन्तु शुगर रोगियों के मूत्र त्यागने वाले स्थान पर, अक्सर चीटियां लगने लग जाती है। जिससे शुगर से ग्रसित होने का एक अनुमान लगाया जा सकता है। जिसको नियंत्रित या दूर करने के लिए अमूमन मीठे से परहेज अत्यंत आवश्यक हो जाता है। 

रह गई बात दूध की तो दूध को लोग मीठा नहीं मानते। लेकिन स्वाभाविक गुण के कारण दूध में चीनी ( शुगर ) पायी जाती है। जिससे डायबटीज रोग के शिकार लोगों में यह भ्रम बना रहता है कि शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं?

आखिर शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं ( sugar me dudh pina chahiye ki nahi )

परन्तु सुश्रुत संहिता आदि में शुगर के लक्षण पाए जाने पर, दूध को वर्ज्य माना गया है। जिससे महिलाओं और पुरुषों में शुगर के लक्षण पाए जाने पर दूध के सेवन से बचना अनिवार्य है।

फिर कुछ लोगो का मानना है कि हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग – अलग होती है। जिससे इनके उपचार में भेद होना आवश्यक है। वही कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि महिला और पुरुष के शरीर में भेद होता है। इसलिए पुरुष और महिलाओं में शुगर के लक्षण और उपाय अलग – अलग होने चाहिए। 

 जबकि अनेक प्रकार के रोग और दोष को दूर करने में, दूध पीने के फायदे है। इस कारण यह सवाल बना ही रहता है कि अक्सर शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं?

शुगर मरीज को दूध पीना चाहिए की नहीं 

परन्तु रोग कारण एक होने पर स्त्री हो या पुरुष दोनों के उपचार में साम्यता होना कोई अचरज नहीं। क्योकि आनुपातिक रक्त शर्करा के स्तर ( average blood sugar level ) पर ही तो शुगर की पहचान होती है। जिसे हम HBA1C के नाम से जानते है। 

परन्तु आजकल विकास के चपेट में आकर लोग खान – पान, रहन – सहन आदि पर ध्यान नहीं दे पाते। जिससे आयु के लोग भी इसके चपेट में आ जाते है। 

इसलिए आयुर्वेदानुसार शुगर में दूध का सेवन विपरीत आहार की श्रेणी में रखा गया है। जिसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए काल है। परन्तु आजकल केवल जानवरों का दूध ही नहीं किया जाता है।

आजकल तो नारियल, टिल आदि से भी दूध बनाया जाता है। जिसको आमतौर पर वीगन डाइट वाले लोग इस्तेमाल करते है। जिसका सेवन मधुमेह में किया जा सकता है। 

शुगर में दूध कितना पीना चाहिए?

अमूमन लोग दूध का संतुलित आहार मानते है। जिससे हम हर प्रकार के रोग के रोकथाम और उपचार में दूध को शामिल कर ही लेते है। लेकिन आयुर्वेदीय चिकित्सीय खान पान के विधान के अनुसार, शुगर में दूध का सेवन हानिकर है।     

निष्कर्ष :

दूध न केवल हमारी रसोई का अभिन्न अंग है। बल्कि अवस्था को स्थिर एवं आयु को बढ़ाने वाला है। इसके साथ कामशक्ति और सन्धानकारक होने से रसायन है। इस कारण हम सभी के लिए दूध अमृत से कम नहीं है। परन्तु दूध रक्त शर्करा के स्तर पर, इसके प्रभाव को लेकर सवाल खड़े करता है कि शुगर में दूध पीना चाहिए कि नहीं?

लेकिन कुछ लोगों का मत है कि विशुद्ध भारतीय गोवंश का दूध सभी रोगों में लाभकारी है। परन्तु प्रमेह चिकित्सा में दूध को वर्ज्य पदार्थ की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए शुगर रोगियों को दूध के सेवन का विचार त्याग देना चाहिए। यह बात गौ ( जानवरों ) आदि से प्राप्त होने वाले दूध पर लागू होती है।

जबकि आजकल वीगन डाइट भी उपयोग की जाने लगी है। जिसमे नारियल आदि के माध्यम से दूध तैयार किया जाता है। जिसका सेवन शुगर आदि में आसानी से किया जा सकता है।     

उद्धरण :

  • भाव प्रकाश दुग्ध वर्ग  
  • चरक संहिता सूत्र अध्याय -27
  • चरक संहिता चिकित्सा अध्याय – 6
  • माधव निदान अध्याय – 33
  • सुश्रुत संहिता चिकित्सा अध्याय – 11
  • अष्टांग संग्रह चिकित्सा अध्याय – 
  • अष्टांग हृदय चिकित्सा अध्याय – 12
  • योगरत्नाकर उत्तरार्धगत प्रमेह और मेह चिकित्सा
  • भैषज्य रत्नावली अध्याय – 38

FAQ

६० साल की उम्र में शुगर कितना होना चाहिए?

60 साल या उससे अधिक उम्र वालों के लिए उपवास ( फास्टिंग ) रक्त शर्करा 70 – 120 mg/dl और जबकि भोजन के बाद की रक्त शर्करा 160 mg/dl से कम होनी चाहिए।  

शुगर पेशेंट को दूध पीना चाहिए कि नहीं?

शुगर के मरीज को सदैव दूध के सेवन से बचना ही हितकारी है।  

डायबिटीज कितने प्रकार के होते हैं?

आधुनिक चिकित्सा में मधुमेह के 4 प्रकार बतलाये गए है –

  • डायबिटीज टाइप 1
  • डायबिटीज टाइप 2
  • डायबिटीज टाइप 3 और
  • डायबिटीज टाइप 4

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