दही खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है। उतनी ही अधिक पौष्टिक भी होती है। बशर्ते इसे सावधानी पूर्वक खाया जाय नहीं तो बहुत सी शारीरिक समस्याए भी पैदा कर सकती है। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि आयुर्वेद के अनुसार रात में दही खाना चाहिए कि नहीं।

दूध और दही हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहे है। लेकिन आजकल की दौड़भाग भरी जिंदगी में न खाने का समय है और न नहाने का। समय है तो बस पैसे बनाने या कमाने का। जिसके चलते अक्सर लोग दही सेवन की निषेधाज्ञाओं का पालन तो दूर। इसकी जानकारी तक नहीं होती। जिससे लोगों के मन में दही के सेवन को लेकर संशय बना रहता है। जैसे शुगर रोगियों को शुगर में दही खाना चाहिए या नहीं को लेकर बना रहता है।
आजकल लोगों के पास दिन में कामकाज के चलते, सुबह खाना खाने का अवसर नहीं होता। जिससे ज्यादातर लोग रात में ही सुकून से भोजन कर पाते है। फिर गर्मियों में तो अनायास ही दही की याद सताने लगती है। जिसके कारण अधिकतर मामलों में लोग रात में ही दही खा लेते है। बिना यह जाने कि रात में दही खाना चाहिए या नहीं।
रात में दही क्यों नहीं खाना चाहिए?

इसमें कोई दो राय नहीं कि दही खाने के फायदे और नुकसान दोनों है। जब हम किसी भी वस्तु का सेवन आयुर्वेद संगत सिद्धांतों के अनुकूल करते है। तब हम हानि से बचकर स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ प्राप्त करते है। इस आधार पर यह जानना आवश्यक है कि रात में दही खाना चाहिए कि नहीं।
आमतौर पर दही अपने आप में रक्त, पित्त तथा कफ सम्बन्धी विकारों की जननी है। वही आयुर्वेद ने रात्रि के समय को कफ का समय बताया है। जिससे रात में दही का सेवन करने से अकफ प्रकृति का व्यक्ति कफ रोगो के चपेट में आ जाता है। फिर कफ प्रकृति के व्यक्ति का कहना ही क्या?
जबकि दही स्वाभाविक रूप से अम्लीय प्रकृति की होती है। जिससे यह पित्त विकारो को जन्म देने में सक्षम है। जिससे रात में दही सेवन करने पर पित्त कि प्रकृति न रखने वाले व्यक्ति भी पित्त के प्रकोप में आ सकते है।
दही खट्टी होने से रक्त को भी दूषित करती है। जिससे रक्त सम्बन्धी रोगो को हमारे शरीर में बल मिलता है। इसलिए रात में दही खाना चाहिए कि नहीं को जानना उतना ही आवश्यक है। जितना कि दही में नमक डालकर खाना चाहिए या नहीं।
रात में दही खाने के नुकसान
जब सामान्य व्यक्ति अंधाधुंध तरीके से दही का सेवन करता है। तब सुबह खाली पेट दही खाने के फायदे नुकसान से प्रभावित होता है। तो रात में दही का सेवन करने वाला भला क्यों नहीं प्रभावित होगा? अवश्य होगा।
आमतौर पर रात के समय दही खाने पर रक्त, पित्त और कफ विकार होने की गुंजाइस बढ़ जाती है। जिसके अंतर्गत अनेकों प्रकार के रोग आ जाते है। फिर चाहे आप इसके लिए कितनी भी सावधानी क्यों न रखे।
आयुर्वेद में दही के सेवन से सम्बंधित बहुत से विधान बतलाये गए है। जिसमे रात – दिन के अतिरिक्त किन महीनों में दही का सेवन गुणकारी और किनमे नहीं। इस तरह आयुर्वेद में सिक्के के दोनों पहलुओ को दिखाया गया है। जिसके आधार पर ही हमें रात में दही खाना चाहिए कि नहीं का निर्णय करना चाहिए।
दही खाने का सही तरीका

रात्रि में दही खाना कथमपि उचित नहीं है। जहाँ तक बन सके रात्रि के समय दही खाने से बचना चाहिए। इतना ही नहीं आयुर्वेद में तो दही का सेवन ऋतुनुकूल करने का भी विधान निर्धारित है। जिसका ज्यादातर लोग ध्यान नहीं रखते। जिससे अनायास ही रोग कि चपेट में आ जाते है।
आयुर्वेद के अनुसार रात्रि में दही कभी नहीं खाना चाहिए। यदि खाना ही पड़े तो इसे निम्नलिखित अनुपान के बिना रात में दही नहीं खाना चाहिए –
- घी और शक्कर के बिना
- मूंग की दाल व मधु किवा आँवला के बिना अथवा गरम न खाये
इसके अतिरिक्त आयुर्वेद का उत्तम पक्ष तो यही है कि दही का सेवन रात्रि में न करे। किन्तु यदि दही में पानी और घी मिलाया गया है। तब इसका सेवन रात में भी किया जा सकता है। वह भी बहुत ही सीमित मात्रा में। किन्तु रक्त, पित्त तथा कफ सम्बन्धी विकारों में जल और घी मिला हुआ दही खाना भी अहितकर है।
दही खाने का सही समय
आयुर्वेद में रात में दही खाने के नुकसान बताये गए है। वही सुबह में दही खाने के फायदे भी बतलाये गए है। जिससे एक बात स्पष्ट है कि सुबह सुबह दही खाने के फायदे है। लेकिन अधिकांश लोग दही खाने का सही समय नहीं जानते। इस कारन सवाल करते है कि क्या रात में दही नहीं खाना चाहिए?
हमें आयुर्वेदीय सिद्धांतों पर दही खाने का सही समय और तरीका जानना आवश्यक है। न कि कल्पना, मौसम और स्वाद पर आधारित। लेकिन अक्सर लोग स्वाद को अधिक महत्व देते है, न कि स्वास्थ्य को। इसलिए रात में दही खाने से स्वस्थ दिखने पर भी अस्वस्थ हो जाते है। जिससे मन ही मन सोचते रहते है कि क्या रात में दही खाना चाहिए या नहीं।
आयुर्वेद के अनुसार दिन में दही खाने के फायदे है, न कि रात्रि में। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद में ऋतु के अनुसार भी दही के सेवन कि बात बतलाई गई है –
जिसमे तीन ऋतुओ में दही का सेवन करना चाहिए
- हेमंत ( अगहन – पूस )
- शिशिर ( माघ – फागुन )
- वर्षा ( सावन – भाद्र )
और तीन ऋतुओ में दही का सेवन नहीं करना चाहिए
- शरद ( क्वार – कार्तिक )
- ग्रीष्म ( जेठ – आषाढ़ )
- वसंत ( चैत्र – वैशाख )
इसलिए रात में दही खाना चाहिए कि नहीं को जानना ही पर्याप्त नहीं। बल्कि ऋतुओ के अनुकूल भी दही के सेवन की बात भी हमें जाननी आवश्यक है।
निष्कर्ष
समस्त खाद्य सामाग्रियों में दूध के बाद यदि कोई सामाग्री सबसे अधिक उपयोग की जाती है। तो वो है दही। जिसका इस्तेमाल हम अनेको प्रकार से करते है। जैसे – पेय ( लस्सी, मठ्ठा आदि ), व्यंजन ( रायता, दही बड़ा आदि ) में। बिना यह जाने कि रात में दही खाना चाहिए कि नहीं।
जबकि आयुर्वेद में रात्रि में दही के सेवन की मनाही है। जिसका अतिरेक करने पर हमे बीमारियों के लगने की संभावना बढ़ जाती है। जिसमे साध्य और असाध्य दोनों तरह के रोग आते है। जैसे – सर्दी – जुकाम से लेकर मधुमेह आदि तक। इतना ही नहीं यदि व्यक्ति कफादि रोगों से भी पीड़ित है। तब दिन में भी हम सब को दही खाने से बचना चाहिए।
हालाकिं आयुर्वेद हमारे स्वास्थ्य और स्वाद दोनों की देखभाल करता है। जिससे आयुर्वेदविद अनुपान की संज्ञा देते है। इसलिए दही से बनी चीजों का सेवन सीमित मात्रा में अनुपान भेद से रात में भी कर सकते है। इसलिए कहा जाता है कि दही खाना स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। बशर्ते इसका सेवन विधि पूर्वक किया जाय। न कि मनमानी ढंग से।
उद्धरण
- चरक संहिता सूत्र अध्याय – 27 श्लोक – ( 225 – 227)
- भावप्रकाश निघण्टु दधिवर्ग
FAQ
रात में दही चुरा खाना चाहिए कि नहीं
रात में दही चूड़ा नहीं खाना चाहिए।
रात में दही चावल खाना चाहिए या नहीं?
रात के समय दही खाना वर्जित है। जिससे रात में दही चावल खाने से बचना चाहिए।
रात में दही रोटी खाना चाहिए या नहीं?
आयुर्वेद रात में दही के सेवन को अच्छा नहीं मानता। जिससे रात में दही रोटी नहीं खाना चाहिए।
दही खाने का सही समय क्या है?
दही खाने का सबसे उपयुक्त समय सूर्योदय के दो घंटे बाद से लेकर सूर्यास्त से दो घंटे पूर्व का है।
दिन में दही खाने से क्या होता है?
दिन में दही खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। लेकिन शुगर इत्यादि रोगों में दही खाना हानिकर होता है।