पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना : upper abdominal pain in hindi

सामान्यतः छाती से लेकर श्रोणि के बीच होने वाले दर्द को पेट दर्द कहते है। जिसके अनेक कारण हो सकते है। जिससे दर्द के स्थान में भेद पाया जाता है। जिसमे पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होने पर, नाभि के ऊपर पेट दर्द होना कहते है। यह प्रायः पेट के ऊपरी भाग में दर्द उत्पन्न करता है। जिसको दूर करने के लिए पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के कारण को समझकर। तदनुकूल पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के उपाय करने चाहिए। जिससे समय रहते रोग को भड़कने और रोगी को अनावश्यक दर्द से बचाया जा सके। 

पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के कारण upay (pet ke upari hisse mein dard)

पेट के ऊपरी भाग में कई महत्वपूर्ण अंग, उपांग और मांसपेशियां होती है। जिनके कारण ऊपर के पेट दर्द (upper abdominal pain) के, मूल हेतु का पता लगाना कठिन होता है। यदि आप पेट के इन हिस्सों में दर्द, महसूस करते है तो इसकी अनेको वजह हो सकती है। जिसको अपर स्टमक पेन (upper stomach pain in hindi) भी कहते है। जबकि अलग – अलग लोगो में पेट दर्द होने के कारण लक्षण अलग है। 

ऊपरी पेट दर्द के कुछ कारण दुसरे कारणों की तुलना में आसान होते है। जिससे वे जिस प्रकार के दर्द पैदा करते है। उनसे उनकी पहचान होती है। यदि आपके भी पेट का दर्द कुछ समय से बना हुआ है, या रुक – रुक कर बार – बार आता रहता है। तब आपको भी चिकित्सा विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। जो सम्भवतः तीन प्रकार का हो सकता है –

  1. मरोड़ वाला दर्द (cramping pain)
  2. जलन वाला दर्द (burning pain)
  3. तेज या चुभने वाला दर्द (sharp or stabbing pain)

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ऊपरी पेट दर्द क्या है (what is upper abdominal pain)

पेट दर्द एक ऐसी समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। जिसे हम अक्सर मामूली समझकर अनदेखा करते है। जिससे इनको दिन ब दिन प्रबल होने का मौका मिलता है। जंतु विज्ञान के अनुसार नाभि को शरीर का केंद्र कहा जाता है। जो मानवो में भी पेट के बीचोबीच स्थित होती है।

जिसके उर्ध्व भाग में होने वाले दर्द को, पेट के ऊपर दर्द होना कहते है। जिसमे उपरोक्त तीनो प्रकृति का दर्द अनुभवित हो सकता है। यह बीच बीच में रुक – रुक कर अथवा लगातार भी हो सकता है। जिसमे मरोड़ होना आदि मुख्य है। जिसके लिए लोग पेट के मरोड़ से छुटकारा कैसे पाए पूछते है। 

पेट के ऊपरी भाग का दर्द ह्रदय, फेफड़ो, गुर्दो, बॉडी वाल, रक्तवाहिकाओं से जुड़ा हो सकता है। इसके साथ अन्न प्रणाली की गड़बड़ी से होने वाला दर्द, पेट के ऊपरी हिस्से में महसूस हो सकता है।

दिल के दौरे का आना, फेफड़ों की कोई समस्या जैसे निमोनिया या फुफ्फुस का दर्द छाती में होता है। जो पेट के ऊपर स्थित होते है। जिनका प्रभाव भी ऊपरी पेट दर्द में होता है।

पित्ताशय थैली या यकृत में जब दर्द होता है। तो यह पेट के ऊपरी हिस्सों सहित आंतो में भी हो सकता है। जो सूजन और संक्रमण से सम्बंधित हो सकता है।

यदि आपको पेट में दर्द होते 2 दिन से अधिक हो गए है। जिसके साथ अन्य दिक्क़ते जैसे – पेट में गंभीर दर्द, सांस लेने में कठिनाई, खून की उल्टी, मल त्याग करने में कठिनाई, मलत्याग करते समय रक्त आने जैसी समस्या होने पर शीघ्र चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए।

पेट / नाभि के ऊपर पेट दर्द के कारण (causes of upper abdominal pain)

ऊपरी पेट में दर्द के कारण (cause of pain in upper abdomen)
नाभि के ऊपर पेट दर्द होने का कारण (reason of upper abdomen pain) अनेक है। जिसकी प्रकृति का ऊपर वर्णन किया गया है। 

ऐठन वाले दर्द का कारण 

अधिक गैस

यदि आप पेट के ऊपरी भाग में दर्द महसूस करते है। तो आप अधिक गैस बनने का शिकार हो सकते है। जिसमे दर्द बीच बीच में आकर चला जाता है। यह मुख्यतः पाचन तंत्र ( डाइजेस्टिव सिस्टम ) में बनती है। इसमें गैस को जड़ से ख़त्म करने के उपाय उपकारक है। 

गॉल ब्लैडर स्टोन (gall bladder stone)

गंभीर मरोड़ ( क्रैम्प ) पेट में आने जाने का कारण, पित्त नली में पित्त की पथरी का अटकना भी हो सकता है। जिसको पित्तज शूल (biliary colic) कहते है। जो कई घंटो तक, आपके पेट में लहरों के सामान बना रह सकता है। कभी – कभी वसा से भरपूर, चिकनाई युक्त भोजन करने पर भी इस प्रकार का दर्द होता है। जो चर्बी जमने वाले लोगो को अधिक होता है। 

इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) और इंफ्लेमेटरी बोवेल डिजीज (IBD)

आई बी डी और आई बी एस पेट साफ न होने की समस्या है। जिसमे पेट में मरोड़ आदि हो सकती है। जिसके लिए पेट कैसे साफ करे को जानना चाहिए। 

जलन वाले दर्द का कारण 

एसिड रिफ्लक्स (acid reflux)

एसिड रिफ्लक्स वह स्थिति है। जिसमे भोजन से बनने वाला अम्ल आंतो में, जाने के बजाय वापस इसोफेगस की और चढ़ने लगता है। जिससे अन्नप्रणाली की अलाइनिंग में परेशानी होती है। इसके साथ आपके गले और छाती में, अप्रिय सनसनी होने लगती है। इससे आपको मिचली भी आ सकती है। जिससे आपके मुँह का स्वाद खट्टा हो सकता है।

गैस्ट्रिटिस (gastritis)

पेट के ऊपरी भाग में जलन और दर्द होना गैस्ट्राइटिस भी हो सकता है। यह वह स्थिति है, जिसमे पेट के परत में क्षय होने के कारण सूजन आ जाती है। जो जीवाणु संक्रमण के कारण भी होता है। जबकि अन्य कारणों में अत्यधिक शराब पीना, कोकीन और नॉन – स्टेरायडल एंटी – इंफ्लेमेटरी ड्रग्स का इस्तेमाल करना आदि।

पेप्टिक अल्सर (peptic ulcer)

पेप्टिक अलसर पेट या छोटी आंतो की परतो में क्षय के कारण होता है। जिसके कारण पेट के ऊपरी भाग में जलन और दर्द होता है। यह अक्सर जीवाणु संक्रमण आदि के कारण होता है। 

अपच (indigestion)

पेट में अपच होने पर भी गले, मुँह और पेट में जलन होती है। जिसमे छाती के सहित पेट में दर्द हो सकता है।

तेज और चुभने वाले दर्द का कारण  

अग्न्याशय शोथ ( Pancreatitis)

पैंक्रियाटाइटिस में पेट के ऊपरी हिस्से में, तेज चुभने वाले दर्द का संकेत हो सकता है। अग्न्याशय की सूजन का दर्द अचानक या धीरे – धीरे बना रह सकता है।  

कुछ अन्य पेट के ऊपरी भाग में दर्द होने का कारण (causes of pain in upper stomach)

पेट के ऊपर दर्द क्यों होता है

वायरल इंफेक्शन (Viral infection)

कुछ ऐसे वायरस होते है जो पेट में दर्द पैदा करते है। जैसे – गैस्ट्रोइन्टेराइटिस आदि। 

पेट खाली रहना (empty stomach)

अधिक समय तक खाना न खाने से, पेट में गैस आदि की समस्या हो जाती है। जो अक्सर व्रत और त्योहारों में होता है। जिससे पेट मी अन्य तकलीफो के साथ दर्द होता है। 

मांसपेशियों में खिचाव

बच्चो को खेलते समय और वयस्कों भारी सामान आदि, उठाने के कारण पेट में खिचाव होता है। जिसके कारण भी कभी – कभी दर्द होता है। 

नाभि खिसकना

नाभि के असंतुलित होने से पेट के अंगो पर दबाव पड़ता है। जिससे पेट में रहने वाले अंगो की क्रिया प्रणाली में व्यवधान होता है। जो पेट में मरोड़ और दर्द का कारण हो सकता है।  

अतड़ियो में रुकावट होना

आंतो में रुकावट होना पेट साफ न होने के लक्षण है। पेट साफ न होने से आते अवरुद्ध होती है। जिसके कारण भोजन को पचाने और पोषक तत्वों का, अवशोषण करने में कठिनाई होती है। जिससे कब्ज होने की संभावना प्रबल होती है। जिसके लिए कब्ज का रामबाण इलाज कराना चाहिए। 

खाद्य विषाक्तता (Food Positioning)

दूषित और विषयुक्त खाद्य पदार्थो के सेवन से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। जिसके कारण ऊपर पेट में दर्द हो सकता है।    

पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के कारण हिंदी आदि है। जिनसे पेट के ऊपरी भाग में दर्द होने की संभावना होती है। 

ऊपरी पेट दर्द के लक्षण (symptoms of upper abdominal pain)

गंभीर ऊपरी पेट दर्द (severe upper abdominal pain)

ऊपरी पेट दर्द में अनेक लक्षण होते है। जैसे – 
  • पेट फूलना 
  • गले में खरास होना 
  • साँसों की बदबू 
  • कर्कस आवाज
  • मतली और उल्टी होना
  • भूख में कमी आना
  • वजन कम होना
  • मल में खून आना
  • अचानक वजन कम होना
  • छाती में जलन के साथ पेट दर्द आदि। 

प्रेगनेंसी में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द (upper abdominal pain in pregnancy)

गर्भावस्था अनेको प्रकार के उतार चढ़ाव से भरी होती है। जिसका मुख्य कारण गर्भगत शिशु का विकसित होना है। जिसके कारण महिलाओ में कई तरह के बदलाव आते है। जिनके कारण पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द आ सकता है। यह सामान्य घटना है। जो बहुत सी महिलाओं में होती है। यह दर्द तेज और धीमा दोनों प्रकार का हो सकता है।

प्रायः सभी गर्भवती महिलाओ को आरम्भिक अवस्था में, पेट दर्द होना आम है। यह दूसरी तिमाही के मध्य तक चला जाता है, और तीसरी तिमाही आरम्भ होते ही फिर से आ जाता है। ऐसा होने पर यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। यदि आपको निम्न लक्षण मिलते है तो

  • पूरे शरीर में खुजली के साथ पेट में दर्द होना
  • जी मिचलाने, उल्टी आदि के साथ बुखार होना
  • पेट में अचानक या तेजी से दर्द होना
  • पेट में दर्द के साथ योनि से रक्तस्राव होना  

ऊपरी पेट दर्द को कैसे दूर करें (how to relieve upper abdominal pain)

अगर पेट में दर्द हो तो क्या करें (agar pet mein dard ho to kya karen)

आयुर्वेदीय चिकित्सा शास्त्रों के अनुसार, पेट रोग मिश्रित दोष समूह से उत्पन्न होते है। जिनकी शांति के लिए त्रिदोषज चिकित्सा का निर्देश है। परन्तु अतिसार, ग्रहणी, पेट में चुभन आदि भी उदर रोग है। जो पेट के किसी एक भाग में होते है। जिनके कारण इनको साध्य की श्रेणी में रखा गया है। जिनका समाधान सफलता पूर्वक किया जाता है। जिनमे अनेको प्रकार के औषध योग, खाद्य निषेध आदि है। जिनका समुचित अनुष्ठान करने पर, यह स्वतः शांत होने लगते है। परिणामतः हमे स्वाभाविक स्वास्थ्य की समुपलब्धि होती है।

किसी भी रोग की पहचान, सामान्यतः रोग का निदान कहा जाता है। जिसमे रोगी से प्राप्त होने वाले लक्षणों पर, अधिक बल दिया गया है। जिससे पेट के ऊपरी हिस्से में अपर स्टमक पेन रिलीफ (upper stomach pain relief) मिलता है। जिसमे आवश्यकता पड़ने पर अपर स्टमक पेन मेडिसिन (upper stomach pain medicine) का भी प्रयोग किया जाता है। जो नाभि के ऊपर होने वाले पेट दर्द (nabhi ke upar pet dard hona) में सहायक है। जिसके लिए नाड़ी आदि देखी जाती है। जबकि आधुनिक विधियों में निम्न है – 

  • भौतिक परीक्षण ( फिजीकल एग्जामिनेशन ) 
  • चिकित्सीय इतिहास
  • रक्त परीक्षण
  • इमेजिंग सिस्टम ( सिटी स्कैन और अल्ट्रासॉउन्ड ) 

नाभि के ऊपर पेट दर्द का इलाज (upper abdominal pain treatment)

पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द का इलाज (pet ke upari hisse me dard ka ilaj)

ऊपरी पेट दर्द होने के सामान्य कारणों में, नाभि खिसकना, अफरा, बदहजमी आदि है। जिसके कारण पेट में दर्द, पेट का फूलना आदि पाया जाता है। जिनमे प्रायः खिसकने की समस्या देखी जाती है। जिसको दूर करने के लिए आयुर्वेदान्तर्गत नाभि बैठाने की प्रक्रिया है। जिसके जानकार लोग नाभि की स्पंदन आदि के, ज्ञान के आधार पर नाभि या धारण की जांच करते है। जिसमे विसंगति पाए जाने पर, पेट की मालिस आदि के द्वारा नाभि को बैठाया जाता है।

जबकि विशेष रोगो में विशिष्ट चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है। जो प्रायः जीर्ण होते है। जिनका प्रभुत्व समग्र शरीर पर होता है। जिनको जीतना अर्थात उपचारित करना कठिन है। जिसकी साध्यासाध्यता का विचार विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए। जिसमे आवश्यक होने पर सर्जरी आदि भी कराई जा सकती है। जिससे रोगी को रोग से छुटकारा दिलाया जा सके। जबकि सामान्य समस्या होने पर छोटे – मोठे उपाय ही काफी है। जिनके माध्यम से पेट को साफ किया जाता है। जिसमे पेट को साफ करने के लिए क्या खाना चाहिए भी है।   

इसके साथ ही ऊपरी पेट दर्द का इलाज करने की अन्य विधिया भी है। जिसमे घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार के सहित और भी उपाय है। जिन्हे आजकल होम्योपैथी और एलोपैथी कहाँ जाता है। जिनका प्रयोग उनके अपने सिद्धांतो के आधार पर करने का विधान निर्धारित है। जो इस प्रकार है –   

पेट दर्द का घरेलू उपचार ( pet dard ka gharelu ilaaj )

पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द का घरेलू उपाय निम्न है। 

  • अदरक को कूटकर गुड़ के साथ काढ़ा बना पीने से पेट दर्द में लाभ होता है। यह प्रयोग पेट दर्द में अदरक के फायदे है। 
  • गुनगुने पानी में एक चुटकी हींग मिलाकर पीने से आराम मिलता है। 
  • अजवाइन और काला नमक को सामान मात्रा में लेकर, कूटकर आपस में मिला ले। जिसका सेवन गर्म पानी से करे।
  • अनार के दानो को काले नमक के साथ खाने से, गैस से होने वाली पेट दर्द की समस्या में आराम मिलता है। 
  • नींबू, काला नमक, जीरा और अजवाइन को पानी में मिलाकर। पीने से अपच आदि के कारण होने वाले, पेट दर्द से छुटकारा मिलता है।  

पेट दर्द की आयुर्वेदिक दवाई (pet dard ki ayurvedic dava)

पेट के दर्द से व्यथित व्यक्ति प्रति क्षण, पेट दर्द से छुटकारा कैसे पाए का विचार करता है। जिसमे निम्न औषधिया उपयोगी है – 

अभयारिष्ट : सभी प्रकार के रोगो में आरिष्ट और आसव आयुर्वेद समधिगम्य है। जिनका आश्रय लेने से पेट रोगो का शमन होता है। पेट में गैस, जलन, तीखी और खट्टी डकार में लाभकारी है। इसके साथ जी मिचलाना, भूख न लगना आदि को भी दूर करती है। कफ सम्बन्धी सभी विकारो में विशेष रूप से गुणकारी है। 

दशमूलारिष्ट : सभी प्रकार के वाट विकारो में लाभदायी है। जैसे – पेट में गैस बनना, जोड़ो में दर्द आदि होना। 

द्राक्षासव : यह निद्राविकार, भूख न लगना, अपच, कमजोरी आदि को दूर करता है।

कुमारी असाव : बालको में यह विशेष रूप से उपयोगी मानी गई है। जैसे – भूख की कमी, दूध हजम न होना, पेट फूलना आदि। 

पंचसकार चूर्ण : पेट की सभी समस्याए, अक्सर पेट साफ न होने पर ही होती है। जिसको नियमित रात्रि में उपयोग करने से पेट साफ होने लगता है। 

पेट दर्द की दवा होम्योपैथिक (pet dard ki homoeopathic dava)

कार्बो वेज : स्वरभंग, कलेजे या छाती में जलन, गले में घड़घड़ाहट, श्वास में कष्ट और सदा बदबूदार बलगम निकलने पर उपयोगी है। पेट में वायु इकठ्ठा होकर पेट फूलने पर प्रभावी है। यदि पेट में शूल जैसा दर्द हो, जो सोने पर बढ़ जाता हो।

नक्स वोमिका : अतिसार के साथ अफरा होने पर लाभकारी है।

लाइकोपोडियम : कब्ज और कड़े मल के साथ अफरा होने पर उपयोगी है।

ऐसाफिटिडा : पेट में बहुत ज्यादा वायु होकर अफरा होने पर उपयोगी है।

रैफेनस सैटाइवा : यदि ऊपर और नीचे किसी भी रास्ते से वायु न निकले तो फायदा करती है। 

चाइना : पेट में वायु के साथ कब्ज रहता है। इसकी वायु या डकार में खटास या बदबू रहती है।  

ध्यान रहे : कार्बो में भोजन के लगभग एक घंटे बाद पेट और पाक – स्थली फूल जाती है। छाती में जलन होती है। खाने – पीने की कोई चीज हजम नहीं होती। बिलकुल हल्की चीज खाने पर भी ऐसा लगता है, जैसे वह भाप में बदल गई हो। जबकि लाइकोपोडियम में भोजन करते ही या भोजन करके के उठते ही पेट फूल जाता है। 

पेट दर्द टेबलेट नाम (pet dard tablet name)

पेट के उर्ध्व हिस्से में दर्द (pet ke upari hisse me dard), होने पर निम्न दवाई उपयोगी मानी जाती है – 

  • यदि आपके पेट अधिक मात्रा में गैस बन रही है। पेट भारी – भारी लग रहा है। पेट में वायु इकठ्ठी हो रही है। जिसके कारण पेट फूल रहा है, या फूला – फूला सा लग रहा है। इन परिस्थियों में माइलान्टा (Mylanta), गैस – एक्स (Gas – X) दवा प्रभावकारी है।
  • यदि पेट में जलन और जलन के साथ दर्द है तो पेप्सिड (Pepcid), जेनटेक (zantec) जैसी दवाई प्रयोग होती है। 

सारार्थ : 

पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाले दर्द ज्यादातर सामान्य होते है। जो घरेलू इलाज आदि के द्वारा ठीक हो जाते है। परन्तु अधिक से होने वाला पुराना पेट दर्द घातक हो सकता है। जिसके लिए शीघ्रता से, विधि – विधान पूर्वक विशेषज्ञ चिकित्सा की अपेक्षा है। जिसमे लापरवाही या संकोच संकट खड़ी कर सकती है।

प्रायोगिक धरातल पर कायिक जीर्ण रोगो को, पूर्ण रूप से उपचारित होने में समय लगता है। जिसमे धैर्य न रखने पर, प्रायः इन रोगो में पुनरावृत्ति देखी जाती है। जिसमे औषधि से अधिक लाभ भोजन को ही औषधि बनाने में है। यदि इसमें साथ दिनचर्या और योगादि में, सम्मिलित कर दिया जाय तो सोने में सुगंध।

ध्यान रहे : किसी भी दवा का प्रयोग बिना चिकित्सीय परामर्श के न करे। खासकर गर्भवती महिलाओ, बच्चो और जीर्ण रोग आदि में। 

FAQ :

पेट को इंग्लिश में क्या कहते है?

एब्डोमेन 

पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द के क्या कारण है?

पेट फूलना, गैस होना, अफरा, अपच आदि कारण है। 

सन्दर्भ / रिफरेन्स (reference) : 

चरक संहिता चिकित्सा अध्याय 13

भैषज्य रत्नावली 

लाइवहेल्थली 

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