पेट दर्द : abdominal pain in hindi

पेट दर्द वह दर्द है जो छाती और श्रोणी क्षेत्रों के बीच होता है। जिसके दर्द में ऐंठन, मरोड़, चुभन, सुस्ती रुक – रुक कर या तेजी से होता है। जिसके लिए पेट दर्द की दवाई का उपयोग होता है। जिसमे पेट दर्द के लिए एंटीबायोटिक आयुर्वेदिक दवाएँ है। जिनमे कुछ पेट दर्द के घरेलू उपाय ऐसे है। जो पेट दर्द का अचूक उपाय है। जिसको सामान्यतः पेट दर्द का इलाज कहा जाता है। जिसमे पौराणिक पद्धति में आयुर्वेदिक और आधुनिक पद्धति में एलोपैथिक उपाय आदि है। जिनका अपने – अपने स्थान पर अपना – अपना उपयोग है। 

पेट के रोग दूर करने का मंत्र

स्थान विशेष में होने वाला पेट दर्द स्थानीय कहलाता है, जिसका क्षेत्र सीमित होता है। जो किसी अंग विशेष की समस्याओ के कारण होता है। इसका सबसे आम कारण पेट का अल्सर ( पेट के अंदरूनी परत पर होने वाला खुला घाव ) माना जाता है। जबकि विशेष कारणों में पेट साफ न होने के लक्षण आदि है। 

जबकि ऐंठन वाला पेट दर्द दस्त, कब्ज, पेट फूलने या सूजन से जुड़ा हो सकता है। वही महिलाओं में यह दर्द प्रसव, मासिक धर्म, गर्भपात और प्रजनन सम्बन्धी समस्याओ की वजह से भी हो सकता है। इस तरह का दर्द लगातार भी हो सकता है, और रुक – रुक कर आ – जा भी सकता है। यह कभी – कभी बिना उपचार के भी ठीक हो जाता है। और कभी – कभी उपचार भी कराना पड़ सकता है। is तरह की प्रतिकिया माइग्रेन के लक्षण और उपाय में पाया जाता है। 

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पेट दर्द क्या है (what is abdominal pain)

मानवो में छाती और श्रोणि के मध्य असहज और असुविधा का अनुभव ही पेट दर्द (abdominal pain) कहलाता है। जिसको पेट क्षेत्र या पेट का क्षेत्र भी कहते है। जो प्रायः पेट के अंदर अनुभव होने वाला दर्द है। जिससे हम सभी कभी न कभी जूझते ही है। जो हल्का और तेज दोनों प्रकार का हो सकता है। यह अल्पकालीन ( तीव्र ) और दीर्घकालीन भी हो सकता है। जो स्थानीय जैसे – गैस, अपच, कब्ज से होने के कारण पेट में पनपते है। जबकि विशेष परिस्थितियों में दुसरे अंगो से भी आ सकते है। जैसे – 

  • पेट
  • यकृत 
  • पित्ताशय
  • अग्न्याशय
  • बड़ी और छोटी आंत आदि

यह सभी अंग हमारे पाचन तंत्र से सम्बंधित है। फिर भी दर्द हमारे पेट की दीवार, हमारे पेट के बाहरी आवरण ( मांसपेशियों और त्वचा ) में भी हो सकता है। किन्तु कभी – कभी जो दर्द हमें पेट में महसूस होता है। वह इनके अतिरिक्त पसलियों, पीठ, कूल्हे आदि से भी आ सकता है।

जिससे पेट का दर्द कई रूप ले सकता है। जिसका मतलब कई चीजों से हो सकता है। जिसका दर्द शरीर के दोनों भागो में हो सकता है। पश्च भाग में कंधो से लेकर, कमर तक या नितम्बो तक भी हो सकता है। अग्र भाग में वक्षस्थल से लेकर, कटिप्रदेश तक भी अनुभव किया जाता है। जो सामान्यीकृत, स्थानीयकृत अथवा पेट में ऐंठन जैसा भी महसूस हो सकता है। यदि आपके पेट में ऐंठन या बेचैनी है तो यह गैस, सूजन, कब्जादि के कारण हो सकता है। अथवा किसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति का भी संकेत हो सकता है।  

उदर प्रदेश में उदरशूल का दर्द आता है और चला जाता है। एक पल आप अच्छा महसूस करते है, और अगले पल आपको पेट में अचानक तेज दर्द होने लगता है। जो गुर्दे की पथरी और पित्त की पथरी में अक्सर देखने को मिलता है।  

पेट में दर्द क्यों होता है (pet mein dard kyon hota hai)

पेट दर्द क्यों होता है (pet dard kyon hota hai)

चिकित्सीय दृष्टि से पेट दर्द होने का कारण बताना मुश्किल है। बहुत प्रयास करने पर, केवल अनुमानित कारण ही बताये जा सकते है। जिसके विभिन्न भेद है। जो रोग के साथ और रोग के बिना भी पाए जाते है। जिनमे स्वतंत्र और रोग में अनुगत दोनों कारणों की प्रशक्ति है। 

सभी शारीरिक ( कायिक ) रोग, जठराग्नि के मंद पड़ने पर उत्पन्न होते है। इसके साथ पेट रोगो में अग्नि की मंदता होती है। जिसको पेट दर्द होने का मूल कारण भी, आयुर्वेदादी शास्त्रों ने माना है। इसके अतिरिक्त अजीर्ण होने, दूषित आहार का सेवन करने, उदर ( पक्वाशय ) में मल का संचय हो जाने से भी पेट दर्द होता है। जिससे पेट अच्छे से साफ नहीं होता। जिसके लिए पेट साफ कैसे करे का प्रश्न लोग पूछते है।   

पेट में दर्द का अर्थ (abdominal pain meaning in hindi)

शरीर रचना और व्यवहारिक रूप से, पेट शरीर के अग्र भाग में स्थित है। इसमें भी छाती से लेकर श्रोणि के बीच का स्थान पेट कहलाता है। जिसमे न केवल भोजन पचता है, बल्कि पाचनोपरान्त मात्रानुकूल पोषक तत्वों का वितरण अमुक – अमुक अंगो को करना होता है। जिसकी अपनी प्रक्रिया है। जिसमे आंतरिक अथवा बाहरी व्यवधान प्राप्त होने पर पीड़ा का अनुभव होता है। जिसे पेट दर्द कहते है। पेट दर्द इन इंग्लिश एब्डोमिनल पेन कहा जाता है।

पेट दर्द का कारण (causes of abdominal pain)

आयुर्वेदानुसार वातादि दोष जलधातु का वहन करने वाले स्रोतों को ऊपर तथा नीचे की ओर से रोककर प्राणवायु, जठराग्नि और अपानवायु को दूषित करके त्वचा एवं मांस की संधि में पहुंचकर उदरप्रदेश में आध्यमान को पैदा करके उदररोग को उत्पन्न करते है।   

जबकि आधुनिक परिपेक्ष्य में, पेट दर्द के अनेक संभावित कारण माने गए है। जिसमे सबसे साधारण अपचन, अफरा, मांसपेशियों में खिंचाव आदि है। जो आमतौर पर गंभीर नहीं होते। परन्तु स्थिति बिगड़ने पर, तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

जबकि पेट दर्द का स्थान और प्रकार, कारण निर्धारित में महत्वपूर्ण संकेतक है। जिससे चिकित्सा में आसानी होती है। जिनको तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है। तीव्र, जीर्ण और प्रगतिशील।

तीव्र पेट दर्द न्यून अवधि में थोड़े समय के लिए विकसित होता है। जो कुछ पहर ( घंटो ) से लेकर कुछ दिवसों तक हो सकता है। पुराना पेट दर्द विश्राम दे – दे कर होता है। यह आहिस्ता और तेज होकर आता – जाता रहता है। जिसका दर्द सप्ताह से लेकर माह या वर्षो तक भी बना रह सकता है। कुछ पुराने मामलो में प्रगतिशील दर्द होता है। जो समय के साथ बद से बदतर होता जाता है। जिससे रोगी की स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती जाती है।

तीव्र

तेज पेट दर्द का कारण बनने वाली विभिन्न स्थितियां, आमतौर पर अन्य लक्षणों के साथ होती है। जो कुछ घंटो से लेकर दिनों तक विकसित होती है। इसके कारण मामूली स्थिति से लेकर, गंभीर आपात चिकित्सीय स्थितियों तक हो सकते है। यह उपचार या बिना उपचार के भी ठीक हो जाते है, जिसमे शामिल है –

  • पेट की महाधमनी में फैलाव
  • पथरी
  • चोलैंगाइटिस (पित्त नली में सूजन)
  • पित्ताशय
  • सिस्टिटिस (मूत्राशय की सूजन)
  • डायबिटीज़ संबंधी कीटोएसिडोसिस
  • विपुटीशोथ
  • डुओडेनाइटिस (छोटी आंत के पहले भाग में सूजन)
  • एक्टोपिक गर्भावस्था (जिसमें निषेचित अंडा गर्भाशय के बाहर प्रत्यारोपित और विकसित होता है, जैसे कि फैलोपियन ट्यूब में)
  • फेकल इंफेक्शन (कठोर मल जिसे हटाया नहीं जा सकता)
  • दिल का दौरा
  • चोट
  • अंतड़ियों में रुकावट
  • अत्रावेष्टांश (बच्चों में) – ऊतकों की दीवार में मौजूद कणों के बीच नए कणों के जमा होने से सेल की सतीह क्षेत्र में में वृद्धि  
  • गुर्दा संक्रमण (पायलोनेफ्राइटिस)
  • गुर्दे की पथरी
  • जिगर का फोड़ा (यकृत में मवाद से भरी पुटिका)
  • मेसेंटेरिक इस्किमिया (आंतों में रक्त के प्रवाह में कमी)
  • मेसेंटेरिक लिम्फैडेनाइटिस (झिल्ली की परतों में सूजन लिम्फ नोड्स जो पेट के अंगों को जगह में रखते हैं)
  • मेसेन्टेरिक थ्रॉम्बोसिस (आपकी आंतों से रक्त को दूर ले जाने वाली नस में रक्त का थक्का)
  • अग्नाशयशोथ
  • पेरिकार्डिटिस (हृदय के आसपास के ऊतकों की सूजन)
  • पेरिटोनिटिस (पेट की परत का संक्रमण)
  • फुफ्फुस (फेफड़ों के आसपास की झिल्ली की सूजन)
  • न्यूमोनिया ( निमोनिया )
  • फुफ्फुसीय रोधगलन (फेफड़ों में रक्त के प्रवाह में कमी)
  • रेप्चर्ड स्पलीन
  • सल्पिंगिटिस (फैलोपियन ट्यूब की सूजन)
  • स्क्लेरोज़िंग मेसेन्टेराइटिस
  • दाद
  • प्लीहा संक्रमण
  • प्लीहा फोड़ा (तिल्ली में मवाद से भरी पुटिका)
  • फटा हुआ बृहदान्त्र
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
  • वायरल आंत्रशोथ (पेट फ्लू) 

जीर्ण ( आंतरायिक या  प्रासंगिक )

पुराने पेट दर्द के कारण का निर्धारण करना मुश्किल होता है। जिसके लक्षण हल्के से गंभीर दर्द के आने और जाने तक हो सकते है, लेकिन जरूरी नहीं की समय के साथ बिगड़ते जाय। पुराने पेट दर्द का कारण बनने वाली स्थितियों में शामिल है – 

  • एनजाइना (हृदय में रक्त का प्रवाह कम होना)
  • सीलिएक रोग
  • इन्डोमेट्रोसिस (endometriosis)
  • कार्यात्मक अपच
  • पित्ताशय की पथरी
  • गैस्ट्रिटिस (पेट के परत की सूजन)
  • गैस्ट्रोओसोफेगल 
  • क्स रोग (जीईआरडी)
  • हियाटल हर्निया
  • वंक्षण हर्निया
  • संवेदनशील आंत की बीमारी (IBS)
  • ओव्यूलेशन दर्द (Mittelschmerz)
  • अंडाशय पुटिका
  • पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी)
  • पेप्टिक अल्सर (छाला)
  • दरांती कोशिका अरक्तता ( सिकेल सेल एनीमिया )
  • पेट की मांसपेशियों में खिंचाव 
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस (एक प्रकार का आंत्र रोग सूजन )

प्रगतिशील

ऐसा पेट दर्द जो समय के साथ बिगड़ता जाता है। अधिकतर अन्य लक्षणों के विकास के साथ, आमतौर गंभीर होता जाता है। प्रगतिशील पेट दर्द के कारणों में शामिल है – 

  • कैंसर
  • क्रोहन रोग
  • बढ़े हुए प्लीहा (स्प्लेनोमेगाली)
  • पित्ताशय की थैली का कैंसर
  • हेपेटाइटिस
  • गुर्दे का कैंसर
  • सीसा विषाक्तता ( लेड पोइज़निंग )
  • यकृत कैंसर
  • गैर हॉगकिन का लिंफोमा
  • अग्नाशय का कैंसर
  • आमाशय का कैंसर
  • ट्यूबो-डिम्बग्रंथि का फोड़ा (एक फैलोपियन ट्यूब और एक अंडाशय से युक्त मवाद से भरी पुटिका)
  • यूरेमिया (हमारे रक्त में निर्मित अपशिष्ट उत्पाद)  

पेट में दर्द होने के लक्षण (abdominal pain symptoms) 

पेट में दर्द होने के अनेक लक्षण है। हालांकि इसके मुख्य लक्षणों में निम्न शामिल है – 

  • भूख न लगना
  • भोजन देर से पचना
  • आहार के पचने का ज्ञान न हो पाना
  • तृप्ति का सहन न होना
  • लगातार बल का क्षय होना
  • थोड़ा भी परिश्रम करने पर सांस फूलने लगना
  • पेट में अधिक मल बनना, किन्तु इसके निकलने में कठिनाई होना
  • पैरो में सूजन होना
  • कम भोजन करने पर भी पेट तना हुआ लगना
  • उदरप्रदेश की रेखाओ के निशान का मिट जाना 
  • पेट में जलन और दर्द होना
  • तन्द्रा ( उँघाई ) होना 
  • शरीर में ढीलापन आना 
  • बुखार लगना या होना
  • खट्टी डकार आना
  • पेट में गुड़गुड़ाहट होना 
  • उल्टी होना
  • पेट फूलना
  • पेट में गैस बनना ( अधिक मात्रा में )
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • मल के साथ खून आना
  • पेट में भारीपन लगना
  • पेट में सुई चुभने जैसा दर्द होना
  • पेट में रुक – रुक कर दर्द होना
  • पेट को स्पर्श करने पर मुलायम महसूस होना
  • कुछ मामलो में उल्टी के साथ खून आना
  • कुछ मामलो में उल्टी के साथ मल आना 
  • कभी – कभी पेशाब करते समय पेट में दर्द होना आदि। 

पेट दर्द के प्रकार (types of abdominal pain)

पेट दर्द से पीड़ित व्यक्ति के मन में अनेक जिज्ञासाए होती है। जिनमे पेट दर्द कितने प्रकार का होता है? आदि। पेट दर्द की विविधताओं के आधार पर, इसके निम्न प्रकार हो सकते है। 

दर्द की तीव्रता के आधार पर (depending on the intensity of the pain)

  1. धीमा पेट दर्द (slow abdominal pain)
  2. मध्यम पेट दर्द (medium abdominal pain)
  3. तेज पेट दर्द (severe abdominal pain) 

दर्द से प्रभावित समय के आधार पर (depending on the time affected by the pain)

  1. तीव्र पेट दर्द (acute abdominal pain) 
  2. पुराना पेट दर्द (chronic abdominal pain)
  3. प्रगतिशील या बसा हुआ पेट दर्द (settled abdominal pain)
  4. आवर्ती पेट दर्द (recurrent abdominal pain)

दर्द के स्थान के आधार पर (depending on the location of the pain)     

  1. पेट के बीच में दर्द (middle abdominal pain)
  2. पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द (upper abdominal pain)
  3. पेट के निचले हिस्से में दर्द (lower abdominal pain)
  4. पेट के राइट साइड में दर्द (abdominal pain right side)
  5. पेट के लेफ्ट साइड में दर्द (left side abdominal pain)
  6. बाईं ओर पेट के निचले हिस्से में दर्द (lower abdominal pain left side)
  7. बाईं ओर पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द (upper left abdominal pain)
  8. दाहिनी ओर पेट के निचले हिस्से में दर्द (lower right abdominal pain) 
  9. दाहिनी ओर पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द (upper right abdominal pain)

आद्र ( गीलेपन ) के आधार पर (depending on the wetness) 

  1. जलरहित पेट दर्द (waterless abdominal pain)
  2. जलयुक्त पेट दर्द (watery abdominal pain)

शोथ ( सूजन ) के आधार पर (based on inflammation)

  1. बिना सूजन वाला पेट दर्द (non – inflammatory abdominal pain)
  2. सूजन वाला पेट दर्द (inflammatory abdominal pain)

पेट में दर्द हो तो क्या करें (pet me dard ho to kya kare)

पेट में दर्द हो तो क्या करे (pet me dard ho to kya kre)

आयुर्वेद सिद्धांत के अनुसार दोषो का संचय, पेट रोग का आधायक है। जिसके होने से स्रोतों के मार्ग अवरुद्धित होकर पेट रोग को उत्पन्न करते है। इसके बहुत से कारण बताये गए है। जैसे – खान – पान की विकृति, दिनचर्या विकार, कर्म सम्पादनात्मक दोष और शारीर के अधारणीय वेगो को धारण करना आदि। जिसमे दैवीय विकृति का भी सन्निवेश मान्य है। जैसे – षडऋतुओ की पुनरावृत्ति, पाप – कर्म में निबद्धता आदि। होने पर जठराग्नि मंद पड़ती है। तथा पूर्व में जीर्ण रोग होने पर भी, जठराग्नि धीमी होने की संभावना होती है। हालांकि सभी रोगो की उत्पत्ति, जठराग्नि की न्यूनता के कारण मान्य है।    

आधुनिक विधा में मल संचयन को पेट दर्द का वाहक माना गया है। जिसमे विशेषकर आहार पर बल दिया जाता है। जो किसी न किसी अंश में आयुर्वेदिक्त सिद्धांत का ही अनुकरण है। यहाँ मल और दोष दोनों समानार्थी शब्द है। जिनके नाम में भेद होने पर भी अर्थ में भेद नहीं है।   

पेट दर्द के निवारण में निदान और उपचार दोनों सम्मलित है। जिसमे दोष ( कारण ) की परख रोग की तीव्रता आदि के आधार पर की जाती है। जिसको रोग की पहचान ( डिजीज डाइग्नोसिस ) भी कहते है। मलापनोदन या दोषापनोदन की क्रिया, उपक्रियादि को उपचार कहा जाता है। जिसमे तालमेल साधने पर चिकित्सा सम्भव है, जिनका उचित समय तक पालन करने पर चिकित्सा पूर्ण होती है। अपूर्ण चिकित्सा की दशा में, रोग की पुनरावृत्ति होने की संभावना होती है। 

जिसमे रोगी को प्रतिदिन विरेचन आदि कराने का निर्देश है। जिससे उदरस्त संचित मल विगलित होकर, बाहर निकल जाए। इसके परिणामस्वरूप बिद्ध वाही स्रोत, प्राणवायु, अपानवायु और जठराग्नि अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त हो सके। जिनके बहुआयामी योगो की चर्चा आगे की गई है।       

पेट दर्द से छुटकारा कैसे पाएं (Pet dard se chutkara kaise paye)

पेट दर्द से कैसे छुटकारा पाएं  (Pet dard se kaise chutkara  paye)

किसी भी रोग के सामान्य और विशेष दो प्रकार के कारण होते है। जिसमे सामान्य कारणों के ऊपर विशेष कारण अपना प्रभाव दिखाते है। जिसमे सामान्य को उपादान और विशेष को उपादेय कह सकते है। जिस प्रकार कार्य में कारण अदृश्य होकर विद्यमान रहता है। उसी प्रकार विशेष रोगो में, सामान्य रोग दिखाई न पड़ते हुए भी स्थित रहते है। जिनकी निवृत्ति करने पर रोग दुर्बल पड़ जाते है। जिससे रोगी में केवल प्रधान लक्षण ही शेष रह जाते है। जिसकी प्रशांति लक्षण साम्यता के आधार पर, निर्धारित द्रव्य से कर दी जाती है। जिनकी पहचान पेट दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए आवश्यक है। जिसको सामान्य भाषा में औषधि कहा जाता है। 

द्रव्यगत औषधियों की मात्रा के निर्धारण में, रोगी के बलाबल का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा होने पर रोगी का शरीर दवा में सन्निहित गुणों का ग्रहण करता हुआ घटे अथवा बढे हुए दोष को सम करता है। जिनके प्रभाव से दोष संतुलित हो उठते है। और पेट दर्द जैसे रोगो से हमारा पीछा छूट जाता है। परन्तु रोग की पूर्ण निवृत्ति के लिए उचित काल तक, निषेधाचरण ( विशेष ) का पालन करना अनिवार्य है। जबकि आजीवन स्वस्थ रहने के लिए विधि – विधान से सामान्य नियमो का तत्परता पूर्वक आचरण अनिवार्य है। यही वास्तव में पेट दर्द दूर करने का मंत्र है। 

सामान्य रोगो का निराकरण होने पर, विशेष रोग की सत्ता ही समाप्त हो जाती है। जिससे इनकी उपयोगिता अर्थात दुःख ( पीड़ा ) का नाश हो जाता है। जिससे स्वाभाविक स्वास्थ्य की हमें समुपलब्धि हो जाती है।

ध्यान रहे : कारण की विद्यमानता होने पर कोटि – कोटि युक्तियों ( उपाय ) का आलंबन लेकर भी, कोटि – कोटि कल्पो में किसी को रोगमुक्त नहीं किया जा सकता। 

पेट दर्द का उपाय (pet dard ka upay)

पेट दर्द की समस्या को दूर करने की अनेको विधाए है। जिनमे रोग को ध्यान में रखकर, पेट दर्द का इलाज इन हिंदी किया जाता है। जिसमे कुछ साध्य होते है, और कुछ असाध्य होते है। जिसमे भेद करना अत्यंत दुरूह होता है। इसलिए छोटे या नए रोग का उपचार आसानी से हो जाता है। जबकि अधिक समय से विकसित रोग के उपचार असाध्य होने के कारण आसानी से नहीं हो पाता। इसकारण पेट रोग का अनदेखा न करके, जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए। 

आसान भाषा में पेट के कुछ रोग दवा से ठीक हो जाते है। कुछ में ऑपरेशन कराना पड़ सकता है। और कुछ ऐसे होते है जो किसी भी तरह से ठीक नहीं होते। हालांकि 80 से 85% रोग दवा से ठीक हो जाते है। 8- 10% में सर्जरी आदि करानी पड़ सकती है। बाकी बचे पेट रोग असाध्य होते है। रह गई बात दर्द की तो पेट रोगो में, भयंकर कष्टदायक दर्द होता है। जिसमे पेट दर्द का गोली (pet dard tablet),पेट दर्द की जड़ी बूटी आदि का प्रयोग होता है।

जबकि सामान्य से दिखने वाले उपाय अत्यंत उपयोगी है। जैसे – भोजन के पूर्व अदरक के रस और सेंधा नमक सेवन करना। यह अदरक के फायदे के रूप में जाना जाता है। दिन का भोजन करने के बाद छाछ पीना, और रात्रि भोजनोपरांत गुनगुना दूध पीना आदि। इनका संयम पूर्वक आलंबन लेता हुआ। समग्र आयुर्वेद के सिद्धांतो का पालन करने वाला, बीमार ही नहीं पड़ता। इससे बढ़कर हम सभी के लिए क्या फल हो सकता। लेकिन फिर भी हम भ्रांतियों के चपेट में पढ़कर, अंधेरे में ढेले फेकते है। 

पेट दर्द के घरेलू नुस्खे (pet dard ke gharelu nuskhe)

आयुर्वेद के असरकारी और कारगार उपायों को, पेट दर्द का घरेलू नुक्सा कहते है। जो सही समय पर उपयोग करने पर उत्कृष्ट कार्य करते है। ये न केवल शरीर के मल का आपनोदन करते है। बल्कि शरीर को आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करते है। जिससे रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जिससे रोगी रोग होने पर धैर्य पूर्वक चिकित्सा कर पाता है। जिनके कुछ योग इस प्रकार है –

  1. 10 मिली ताजे हरे पुदीने का रस, 10 मिली सहद, 2.5 मिली नीबू का रस 20 मिली ताजे पानी में मिलाकर पीने से पेट दर्द में लाभ होता है।
  2. अजवाइन आधा छोटा चम्मच को पीसकर, 1/4 छोटा चम्मच हिंग को गुनगुने पानी में मिलाकर लेने से अनेक प्रकार की पेट समस्याओ से छुटकारा मिलता है। जैसे – पेटदर्द, गैस, जी मिचलाना आदि।
  3. 2 – 2 ग्राम सोंठ, काली मिर्च, सेंधा नमक और हींग को सिलबट्टे में महीन पीसकर मिला ले। फिर रोगी को पीठ के बल लेता दे। उसकी नाभि पर गीले आटे से कटोरीनुमा बनाकर, गुनगुने पानी में उपरोक्त चूर्ण को मिलाकर दाल दे। ऐसा करने पर पेट के शूल वाले दर्द में आराम मिलता है। इनको पेट रोगो में सोंठ के फायदे कहते है। 
  4. 2 नग भीगी हरड़, 1 ग्राम काला नमक, 1 ग्राम अजवाइन और एक नग पीपर को अच्छी तरह पीसकर गर्म पानी के साथ देने से पेट दर्द में आराम मिलता है। साथ ही पेट भी साफ़ होने लगता है। 
  5. अजवाइन 1 ग्राम और सोंठ 1 ग्राम को पीसकर। गुनगुने पानी के साथ लेने पर पेट का दर्द ठीक होता है। 

बच्चो के पेट दर्द का घरेलू उपाय (bache ke pet dard ka gharelu upay)

बच्चों के पेट दर्द के घरेलू उपाय (bache ke pet dard ke gharelu upay)

बच्चे देखने में जितने प्रिय होते है, उतने ही मासूम। इनके अविकसित कोमल और सौम्य अंग, हम सबको अपनी और आकर्षित करते है। जिसके कारण इनके खानपान आदि की, गड़बड़ी होने से पेट की समस्याए इनको हो जाती है। फिर चाहे केवल दूध पीने वाले बच्चे हो, या अन्न जल आदि ग्रहण करने वाले। यदि पेट में समस्या हो तो इनका रोना – धोना लगा रहता है। जिससे बच्चा अंदर से क्रूर और क्रोधी हो जाता है। न सोता है, न खाता – पीता है। बेसुध पड़ा रहता है, कुछ भी देने पर फेक देता है। जिससे बच्चों की माँ सहित पूरा परिवार चिंचित हो जाता है। 

ऐसे में बच्चों के पेट में दर्द हो तो क्या करें ? यह तब अधिक भयावह लगने लगता है। जब रात के समय होता है। ऐसे में बच्चे की तकलीफ किसी से नहीं देखी जाती। ऐसे में लोग अपने सहयोगियों से, बच्चों के पेट दर्द की दवा का नाम पूछने लगते है। जिनमे सर्वाधिक लोकप्रिय बच्चों में पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार है। जबकि ऐसी परिस्थियों से निपटने के अनेक उपाय है। जैसे – 

  • जायफल को नीबू के रस में मिलाकर चटाने से बच्चो का पेट दर्द ठीक हो जाता है। 
  • बच्चो के पेट पर पानी में हींग मिलाकर लगाने से दुधमुहे बच्चो के पेटदर्द में आराम मिलता है।  
  • कभी – कभी पानी चटाने से भी नवजात शिशुओ का पेट दर्द कम हो जाता है। ऐसे में बच्चा दोनों हाथ और पैर ऊपर उठाकर रोता है। 

पेट दर्द का आयुर्वेदिक दवा (pet dard kee ayurvedik dava)

आयुर्वेदादी शास्त्रों में सन्निहित द्रव्य गुण को, धारण करने वाले द्रव्य को आयुर्वेदिक दवा कहते है। जिसका उपयोग रोग से प्राप्त होने वाले, लक्षण साम्यता ( symptom similarity सिम्टम सिमिलॅरिटी ) के आधार पर होता है। जिनकी रोग से पार पाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। जिसके योग निम्न है – 

  • हिंग्वाष्टक चूर्ण : पेट में अत्यधिक मात्रा में वायु ( गैस ) बहुत ही उत्कृष्ट है। 
  • पंचसकार चूर्ण : पेट साफ न होने से होने वाले, समस्त प्रकार के पेट दर्द में उपयोगी है।  
  • नारायण चूर्ण : सभी प्रकार के पेट दर्द में नारायण चूर्ण अत्यंत गुणकारी है। इसके सामान आयुर्वेद में अन्य कोई औषधि नहीं। ऐसा आयुर्वेदज्ञ और आयुर्वेद शास्त्रों का कहना है। पेट रोगियों के लिए मठ्ठे के साथ इसका सेवन परमोपयोगी है। 
  • हपुषादी चूर्ण : यह सभी प्रकार के पेट दर्द की उत्तम आयुर्वेदिक दवा है। 
  • पाटोलादि चूर्ण : पेट दर्द होने पर विरेचन चूर्णों में इसका उपयोग है। जिससे मल का आपनोदन होकर, दोषो का संतुलन हो जाता है। 

उदर रोग नाशक लेप : पलाश के बीज, मदार की जड़, देवदारु,गजपिप्पली, सहिजन की छाल, असगंध। इन सबको सामान भाग में लेकर गोमूत्र के साथ पीसकर। गर्म करके पेट के ऊपर लेप करने से, सभी प्रकार के पेट दर्द में लाभ होता है। 

पेट दर्द की होम्योपैथिक दवा (pet dard ki homeopathic medicine in hindi)

आज के समय में लक्षणोपचारित चिकित्सा के रूप में होम्योपैथी प्रचलित है। जिसमे दवा की सूक्ष्मतम मात्रा का उपयोग, रोग को दूर करने में किया जाता है। जिससे शरीर में अन्तर्निहित शक्ति का उदय होता है, जो रोग की समाप्ति करता है। वैसे तो होम्योपैथी में पेट दर्द के हजारो दवाई है। जिनका उपयोग पेट के दर्द को दूर करने में होता है। जैसे – 

कोलोसिन्थ : में पेट का दर्द जोर से दबाने या सामने की ओर झुककर बैठने पर कुछ घटता है। इसमें पित्त की कै होती है। कभी – कभी कब्जियत रहती है।

डायस्कोरिया : इसके शूल का दर्द पुठ्ठे की जगह से आरम्भ होकर पूरे पेट में फैल जाता है। पीछे की ओर झुकने या चित्त होकर सोने पर यह घाट जाता है।   

प्लम्बम मेटालिकम : इसका पेट दर्द भयानक यंत्रणादायक, पेट काटता है और मरोड़ता है, पेट के दर्द के समय तलपेट अंदर की ओर खींच जाता है। देखने पर ऐसा लगता है मानो रीढ़ की हड्डी ने पेट को भीतर की ओर खींच रखा हो। उदर की खाल बैठ जाती है। इसका दर्द किसी तरह नहीं घटता। इसमें हमेशा कब्जियत पायी जाती है।  

मैग्नेसिया फॉस : में गरम पानी पीने पर, गरम सेंक या किसी तरह से गर्मी पहुंचाने पर दर्द घट जाता है।  

एसिड सेल्फ डिल : पेट में ऐंठन की तरह भयानक पेट दर्द होता है, मानो नस – नाड़ियाँ कट जाती है। पेट का मांस पीठ की ओर तेजी से खिंचता है। जिसमे पेट के मरोड़ से छुटकारा कैसे पाए के उपाय हम ढूढ़ने लगते है। 

पेट दर्द के लिए टेबलेट (pet dard ke liye tablet) 

पेट दर्द के लिए एंटीबायोटिक tablet

एलोपैथी में पेट दर्द की दवा tablet के रूप में निम्न दवाए प्रयोग की जाती है।  

ड्रोएफ 80/250 एम जी : यह एक कॉम्बिनेशनल दवा है। जिसका उपयोग पेट दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है। यह आंतो और पेट की मांसपेशियों को आराम देकर, पेट का दर्द, ब्लोटिंग, ऐठन जैसी असुविधाओं को असरदार ढंग से कम करता है।

टवेरा एम टेबलेट : यह टेबलेट पेट और आंत में अचानक मांसपेशियों में ऐंठन या संकुचन से असरदार ढंग से राहत देता है। जिसके परिणामस्वरूप मांसपेशियों को आराम मिलता है। जिससे भोजन के पाचन में भी सुधार होता है।

ड्रोफेम टेबलेट : यह पेट में दर्द, मरोड़, पेट फूलना आदि में मददगार है।   

ध्यान रहे : जीर्ण रोगो, गर्भवती महिलाओ और बच्चो में, किसी नहीं दवा के उपयोग में सावधानी रखनी चाहिए। 

पेट दर्द के लिए एक्यूप्रेशर पॉइंट (pet dard ka acupressure point)

पेट दर्द का एक्यूप्रेशर पॉइंट

पेट दर्द में एक्यूप्रेशर भी उपयोगी माना जाता है। जिसमे शरीरस्थ मर्म बिन्दुओ पर दाब डालकर, रक्तचाप आदि को बढ़या जाता है। जिससे शरीर में रक्त परिसंचरण की गति में इजाफा होता है। जिससे अधिक तीव्रता से रक्त शोधन की क्रिया को बल मिलता है। इसके माध्यम से मल अपने स्थान से हट जाता है। जैसे पक्वाशय में जमे मल को बाहर, निकालने के लिए जब एक्यूप्रेशर का प्रयोग होता है। तब रक्त की गति में क्षोभ के कारण ऐसा परिवर्तन होता है। जिससे प्यास आदि में वृद्धि हो जाती है, और मल ढीला होकर बाहर निकलने लगता है। 

स्पाइन के दोनों ओर रीढ़ से कुछ हटकर, बिन्दुओ को उगली से गोलाकार घुमाते है। जिसको ऊपर से नीचे की ओर मालिस करने पर भी असरदायक है। ऐसा करने से गैस्ट्रोइंस्टेटाइनल गैस की समस्या दूर होती है। पेट फूलने में भी आराम मिलता है। साथ थकान मिटकर शरीर फूर्ति आती है। जबकि भारत में पेट दर्द होने पर मालिस किया जाता है। जिसमे बहुत से बिंदु अपने आप दबते है। जिससे पेट दर्द में बहुत लाभ मिलता है।    

पेट दर्द के लिए योग (pet dard ke liye yoga)

पेट दर्द का योग (pet dard ka yoga)

पेट दर्द के लिए योगासन आदि का अभिन्न योगदान है। यह न केवल प्राण बल्कि प्रज्ञा दोनों में सामंजस्य स्थापित करता है। अर्थात एक दुसरे में घनिष्ठ संबंध होने के कारण, एक को साधने पर दूसरा स्वयं सध जाता है। जबकि सामान्य अर्थो में योग करने में परिश्रम लगता है। जिससे मांसपेशियों में संघनित अनावश्यक ऊर्जा क्षय होती है। जिससे मल कहा जाता है। जिसके नियमित और अनुकूल मात्रा में होते रहने से दोष संतुलित रहते है। जिससे हम स्वस्थ बने रहते है। 

पेट में रोग होने पर पेट के अग्र, मध्य और अंतिम भाग का योगदान होता है। जिसमे विकूलता होने पर दोष अपना प्रभाव जमाते है। जिनको दूर करने में योग के आसान, प्राणायाम आदि उपयोगी है। जिसका उचित मात्रा में आलंबन लेने पर हम आजीवन रोग और दोष से सुरक्षित रहते है। जिनमे निम्नलिखित आसान और प्राणायाम उपयोगी है।   

  • पवनमुक्तासन 
  • सर्वांगासन 
  • उत्तानासन 
  • उत्तानपादासन 
  • नौकासन 
  • उज्जायी प्राणायाम 
  • विपरीत करणी आदि।

चिकित्सा विशेषज्ञ को कब दिखाए (When To See Medical Expart) –

यदि आपका पेट दर्द गंभीर है और इसके साथ विशेष परिस्थिया जुडी हो। तो वैद्य अथवा चिकित्सक की मदद ले –

  • आघात, जैसे दुर्घटना या चोट
  • आपके सीने में दबाव या दर्द

इन परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सा की तलाश करें। जबकि अन्य स्थितियों में भी आपको तत्काल देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि आपके पास –

  • गंभीर दर्द
  • तेज बुखार होना 
  • मल में खून आना 
  • लगातार मतली और उल्टी
  • अचानक वजन घटना
  • त्वचा पीली दिखाई पड़ना
  • पेट को छूने पर अत्यंत कोमलता से युक्त लगना 
  • पेट की सूजन

उपसंहार : 

मानव शरीर को स्वस्थ रखने का अचूक उपाय सैद्धांतिक, वैज्ञानिक और व्यवहारिक तीनो में सामजस्य है। जिसके लिए आयुर्वेदगत सिद्धांतो को वैजानिक माध्यम से, व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। जिसमे आहार ( भोजनादि ), दिनचर्या, परिश्रम और ध्यान ( भजन ) अपेक्षित है। बाजारवाद के युग में धन के बिना कुछ नहीं होता। इसलिए इसमें अतिरिक्त बिंदु पैसे आदि को जोड़ा जा सकता है।

इन चरणगत प्रक्रियाओं में, विसंगति सधने पर ही पेट दर्द जैसी समस्याए उपजती है। जिसके निवारण में उपचार पद्धतियों का विशेष योगदान है। जिसमे लक्षण (lakshan) के आधार पर त्रुटियों के उर्ध्वभाग ( सिद्धांत ) का अनुगमन करते हुए रोगापनोदन के समस्त उपायों पर विचार होता है। तद्गत रोग और रोगी के अनुकूल औषधि का चयन और इसकी मात्रा का निर्धारण होता है। इनके साथ सहायक उपायों की गलतियों का निषेध कर दिया जाता है। ऐसा होते ही थोड़े ही समय में, रोगी रोग को परास्त कर स्वास्थ्य लाभ करता है। 

परन्तु ध्यान रहे : किसी भी दवा का उपयोग बिना चिकित्सीय परामर्श के न करे। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।    

FAQ

पेट को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

पेट को अंग्रेजी में एब्डोमेन कहा जाता है। 

पेट दर्द को कैसे ठीक करें?

नारायण चूर्ण सभी तरह के पेट दर्द में उपयोगी है। 

पेट दर्द हो तो कौन से ग्रह खराब होते है?

ज्योतिष आदि शास्त्रों के अनुसार, वृहस्पति ग्रह के दोष से पेट दर्द होता है।  

पेट दर्द को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

पेट दर्द को आंग्ल भाषा में एब्डोमिनल पेट या स्टमक पेन कहते है। 

पेट दर्द में कौन सा दवाई खाना चाहिए?

सामान्य पेट होने पर घरेलू उपाय का प्रयोग कर सकते है। जबकि अत्यधिक दर्द में चिकित्सीय परामर्श ले।  

उध्दरण / सन्दर्भ : 

चरक चिकित्सा अ 13

अष्टांग ह्रदय चिकित्सा अ 15

सुश्रुत संहिता चिकित्सा अ 14

अष्टांग संग्रह निदान अ 12

माधव निदान अ 35

मायो क्लिनिक