शहद सुनहरे रंग की दिखने वाली बहुत ही महत्वपूर्ण जैविक औषधि है। जबकि नींबू साइट्रिक अम्ल वाला विटामिन सी का एक अच्छा दीपन, पाचन आदि करने वाला स्वास्थ्यकारी द्रव्य है। किन्तु आयुर्वेद में शहद के उष्ण सेवन का निषेध हैं। इस कारण हमें यह जानना आवश्यक है कि स्वास्थ्य के लिए गर्म पानी नींबू और शहद के नुकसान है या फायदे?
आमतौर पर शहद कार्बोहाइड्रेट ( शर्करा ), जल, कार्बनिक अम्ल, विटामिन, खनिज, प्रोटीन और एंजाइम आदि से मिलकर बनी होती है। जिससे यह केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि अनेकों पोषक द्रव्यों का भी स्रोत है। जो प्राकृतिक रूप से बहुत ही सांद्रित होती है। जिसके बिना आयुर्वेद आदि चिकित्सा पद्धतियाँ अधूरी हैं।
किन्तु शहद में लगभग 85% शर्करा पायी जाती है। जिसके कारण यह भूख और थकान को ही नहीं मिटाती। बल्कि एंटीऑक्सीडेंट आदि के द्वारा हमें अधिक समय तक युवा भी बनाये रखती है। परन्तु मधुमेह रोगी मीठा खाने से परहेज करते है। इसलिए उनके मन में संदेह बना रहता है कि शुगर में शहद खाना चाहिए कि नहीं?
गर्म पानी नींबू और शहद के फायदे ( garam pani nimbu shahad ke fayde )

आमतौर पर शहद और गर्म पानी के फायदे इस प्रकार माने गए है –
- वजन को नियंत्रित रखता है।
- पाचन को सुधारता है।
- खांसी और गले की खराश को दूर करता है।
- टॉक्सिन को बाहर निकालकर शरीर को स्वस्थ रखता है।
- शरीर को हाइड्रेट रखता है। जिससे त्वचा चमकदार बनती है।
- डायबिटीज रोगियों के लिए अच्छा है।
- यह शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। जिससे एकाएक ताजगी का अनुभव होता है।
- ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, आदि।
गर्म पानी नींबू और शहद के नुकसान ( garam pani nimbu aur shahad ke nuksan )

लेकिन सैद्धांतिक तौर पर गर्म पानी और शहद के फायदे और नुकसान का आकलन करना जरूरी है। जिसके लिए हमें नींबू और शहद के स्वाभाविक गुणों को जानना आवश्यक है।
आयुर्वेद के अनुसार नीबू में निम्नलिखित गुण पाए जाते है –
यह दीपन, पाचन, किंचित उष्ण , चक्षुष्य, हृद्य, रक्तपित्तप्रशमन, तृष्णा निग्र धन, ज्वरहर एवं मूत्रजनन जिसके कारण रक्तपित्त, आमवात, ज्वर, अतिसार, वमन तथा पित्त के विकारों में इसका रस दिया जाता है। फिर इसका स्वाद खट्टा होने से खटाई के लिए भी इसका उपयोग होता है।
जबकि आयुर्वेदानुसार शहद में निम्नलिखित गुण पाए जाते है –
आँखों के लिए हितकारी, छेदि ( जमे हुए कफ आदि को टुकड़े करती है ), प्यास, कफ, विष, हिचकी, रक्तपित्तनाशक, कुष्ठ, प्रमेह, कृमि, वमन, श्वास, खास, अतिसारशामक, व्रणों का शोधक ( दूषित पूय आदि को निकालने वाला ), संधान ( व्रणों के दो ओष्ठों को मिलाने वाला ), रोपण ( क्षीण मांस आदि को मिलाने वाला ), वातकारक, रुक्ष और कसाय मधु रस है।
शहद और गर्म पानी के नुकसान

असल में आयुर्वेद अपने आप में पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। जो केवल हमें रोगों से ही निजात नहीं दिलाती, बल्कि रोगों के पहुंच से भी हमें दूर रखती है। यह अद्भुत चमत्कृति आयुर्वेद के अतिरिक्त अन्य किसी चिकित्सा पद्धति में नहीं है। अर्थात यदि आप अपना और अपने परिवार का रोगों से बचाव करना चाहते है तो आयुर्वेदीय सिद्धांतों को अपनाना ही पडेगा। फिर चाहे आप आयुर्वेद का नाम ले या न ले।
शहद बनाने वाली कुछ मक्खियां विषैली होती है। फिर जंगलों आदि में कुछ पुष्प भी विषैले होते है। जिन पर मधु बनाने वाली मक्खियां बैठकर, उन फूलों से उनका रस चूसती है। जिसकी परिस्कृति में शहद का विषैला होना स्वाभाविक है। इसलिए आयुर्वेद में शीतल मधु के सेवन की बात कही गई है, न कि गर्म।
निष्कर्ष :
आयुर्वेद में सदियों पहले जो द्रव्य गुण बताये गए है। जो आज भी जस के तस अर्थात अकाट्य है। जिस पर आस्था और भरोसा रखना अंधविश्वास नहीं, बल्कि सनातन विज्ञान है। जिसका आधुनिक विज्ञान अनुगमन कर सकता है, न कि उसे चुनौती दे सकता है। असल में आयुर्वेद के अनुसार गर्म पानी में शहद के फायदे नहीं, बल्कि गर्म पानी नींबू और शहद के नुकसान ही है।
उद्धरण :
- चरक संहिता सूत्र स्थानम अध्याय – 27/246
- सुश्रुत संहिता सूत्र स्थानम अध्याय – 45/144
- अष्टांग ह्रदय द्रवद्रव्यविज्ञानीयाध्याय – 5/53
- अष्टांग संग्रह सूत्र स्थानम अध्याय – 06/93
- भावप्रकाशनिघन्टु मधुवर्ग पृष्ट – 938
- भावप्रकाशनिघन्टु आम्रादिफलवर्ग पृष्ट – 751
FAQ
गर्म पानी में शहद मिलाने से क्या होता है?
यदि शहद में गर्म पानी मिलाया जाता है या इसको गर्म किया जाता है तो विष के समान हो जाता है।