शहद एक तरह का जैविक मीठा प्राकृतिक पदार्थ है। जिसका निर्माण विभिन्न प्रकार की मधुमक्खियां असंख्य फूलों का रस चुरा कर करती है। हालाकिं स्थान और समय के अनुसार शहद के रंग में अंतर भी देखने को मिलता है। लेकिन सवाल यह उठता कि सैद्धांतिक रूप से गुनगुने पानी में शहद के फायदे हैं अथवा नहीं?
आमतौर पर शहद में सर्वाधिक हिस्सा अतिसंतृप्त शर्करा (कार्बोहाइड्रेट) का होता है। जिसमें लगभग 41% फ्रक्टोज, लगभग 34% ग्लूकोज और लगभग 1-2% सुक्रोज पाया जाता है। जिसके कारण शहद का स्वाद मीठा होता है। जिससे डायबिटीज़ रोगियों में भय बना रहता है कि शुगर में शहद खाना चाहिए कि नहीं?
इसके अतिरिक्त शहद में 17-20% के लगभग पानी, अनेको तरह के अम्ल एवं खनिज आदि पाए जाते है। जिससे शहद एक तरह का सांद्रित जलीय घोल होता है। जिसका उपयोग आजकल लोग वजन घटाने, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने आदि के लिए करते है।
क्या गुनगुने पानी में शहद के फायदे है?
शहद का स्वाद भला किसे नहीं सुहाता। कहने का अर्थ शहद खाना केवल मनुष्य ही पशुओं को भी प्रिय है। इसके अतिरिक्त शहद में स्वाभाविक रूप से भी अनेको औषधीय गुण पाए जाते है। जिसको लोग गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने के फायदे बताते नहीं थकते।
आज के समय में मोटापा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। जिसको दूर करने में सुबह गुनगुने पानी में शहद पीने के फायदे है। सर्दी के दिनों में लोग गुनगुने पानी में शहद डालकर पीने के फायदे बताते है। जो कितने प्रभावी और उपकारी है। आज भी प्रयोग के विषय है।
कुछ भी हो, आयुर्वेदीय खाद्य निषेधाज्ञाओं के अनुरूप ही किसी द्रव्य का सेवन लाभकारी है। न कि इसके बगैर। फिर चाहे लोग शहद गुनगुने पानी के फायदे बताते हो या कुछ और।
गुनगुने पानी में शहद के नुकसान

आज के लोग नवीन, अपरीक्षित और अप्रयुक्त तर्क के बल पर, गुनगुने पानी में शहद और नींबू के फायदे की बात करते है। लेकिन आयुर्वेदीय सिद्धांतों के अनुसार गुनगुने पानी में शहद के फायदे नहीं, बल्कि नुकसान है। इसलिए गुनगुने पानी में शहद के फायदे और नुकसान को सैद्धांतिक रूप से जानना आवश्यक है।
आयुर्वेद के अनुसार मधु बनाने वाली कुछ मक्खियाँ विषैली होती हैं। जिनके द्वारा बनने वाले शहद का विषैला होना स्वाभाविक है। अतएव शीतल मधु का सेवन ही गुणकारी है। इसलिए आयुर्वेद के अनुरूप गुनगुने पानी में शहद और नींबू के नुकसान है।
कभी-कभी शहद का निर्माण करने वाली कुछ मधुमक्खियां विषयुक्त पुष्पों से भी रस चुरा लेती हैं। जिसको वो प्रसंस्कृत कर मधु का रूप देती है। जिससे मधु का जहरीला होना स्वाभाविक है। इस कारण गर्मियों के दिनों में भी शहद खाना हानिकारक हो सकता है।
शहद खाने के तरीके

आयुर्वेद में शहद खाने का तरीका इस प्रकार बताया गया है –
- बिना अनुपान के साथ : यदि हम शहद के गुण को पाना चाहते है। तो बिना गर्म किए एवं इसमें कुछ मिलाए बिना ही इसका उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करने पर यह कफ रोगों में बहुत ही गुणकारी है।
- और अनुपान के साथ : शहद में एक विशेष गुण पाया जाता है। जिसे आयुर्वेद में योगवाही का नाम दिया गया है। वह है जिसके साथ इसको मिलाया जाता है। यह अपने गुण को सुरक्षित रखता हुआ उसके सदृश गुण वाला हो जाता है। अर्थात यदि सोंठ के चूर्ण में शहद को मिलाया जाता है। तो यह शहद अपने गुण को सुरक्षित रखते हुए सोंठ के गुणों में वृद्धि कर देता है।
निष्कर्ष
गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने के फायदे नहीं, बल्कि ठंडे पानी में शहद के फायदे है। जिनका वर्णन आयुर्वेद में अनेको स्थान पर किया गया है। जिस किसी द्रव्य में शहद को मिलाया जाता है। वह उस द्रव्य के गुणों में चार चाँद लगा देता है। इस विशेष गुण के कारण आयुर्वेद में शहद को बहुत ही गुणकारी माना गया है। बशर्ते इसको गर्म न किया गया हो।
आयुर्वेद के अनुसार यह ऐसी गलती हैं। जो है तो बहुत छोटी किन्तु सैद्धांतिक तौर पर बहुत ही गंभीर परिणाम देने वाली है। ऐसा होने पर रोग से पीछा छुड़ाना हथेली पर सरसों उगाने के समान है।
मानाकि गर्म पानी में शहद खाने से कुछ तात्कालिक लाभ हो सकते है। लेकिन आयुर्वेद में उष्ण पदार्थ के साथ मधु सेवन का निषेध है। दर्शन शास्त्र के अनुरूप विधि में विकल्प हो सकता है, लेकिन निषेध निर्विकल्प है। जिसको मानना हमारी बाध्यता है। जो हर आयु वर्ग पर लागू होती है।
उद्धरण
- चरक संहिता सूत्र स्थानम अध्याय – 27/246
- सुश्रुत संहिता सूत्र स्थानम अध्याय – 45/144
- अष्टांग ह्रदय द्रवद्रव्यविज्ञानीयाध्याय – 5/53
- अष्टांग संग्रह सूत्र स्थानम अध्याय – 06/93
FAQ
गर्म पानी में शहद मिलाकर कब पीना चाहिए?
कभी नहीं।
क्या गर्म पानी में शहद मिलाकर पीने के फायदे है?
आयुर्वेद के अनुसार गरम पानी में शहद मिलाने से वह विष बन जाता है।
गर्म पानी में कितना शहद मिलाना चाहिए?
गर्म पानी में बिलकुल भी शहद नहीं मिलाना चाहिए।
ठंडे पानी में शहद मिलाकर पीने से क्या होता है?
जब हम ठन्डे पानी में शहद मिलाकर पीते है। तब हमें शहद में प्राकृतिक रूप से मौजूद सभी तरह के लाभ प्राप्त होते है। इसलिए आयुर्वेद में ठन्डे पानी में शहद मिलाकर पीने की हिदायत दी गई है। न कि गुनगुने अथवा गर्म पानी में।
