पेट के मरोड़ से छुटकारा कैसे पाएं : how to get rid of stomach ache

पेट में मरोड़ होना एक प्रकार का पेट दर्द है। जिससे हममे से हर कोई, कभी न कभी प्रभावित होता ही है। जो हल्का और गंभीर दो प्रारूपों में पाया जाता है। यह निरंतर भी हो सकता है, और रुक – रुक कर आ – जा भी सकता है। जिसमे पेट में भयंकर मरोड़ वाली असहनीय पीड़ा होती है। जिसको सहना बहुत ही कठिन हो जाता है। इसलिए लोग पेट के मरोड़ से छुटकारा कैसे पाएं के उपाय खोजते है। जिसमे पेट में मरोड़ के लिए घरेलू उपचार अव्वल दर्जे का है। जिसे पेट में ऐंठन का घरेलू इलाज भी कहते है। अधिकतर मामलो में पेट मरोड़ के घरेलू उपचार उपयोगी भी सिद्ध होते है। 

पेट के मरोड़ से छुटकारा कैसे पाएं

मरोड़ वाला पेट दर्द अल्पकालीन और दीर्घकालीन भी हो सकता है। जिसमे कम समय वाला दर्द होता तो बहुत कम समय के लिए है। लेकिन होता इतना तेज है कि बर्दाश्त के बाहर होता है। जिसमे घबराहट, बेचैनी आदि का इतना ज्यादा उद्देग होता है कि – सब्र रख पाना प्रायः सम्भव नहीं हो पाता। जबकि दीर्घकालिक मरोड़वाले पेटदर्द की तीव्रता कम, परन्तु अधिक समय तक बनी रहती है। जो हप्तों, महीनों और वर्षों पुरानी भी हो सकती है। ठीक वैसे ही जैसे ब्रेन ट्यूमर के लक्षण आदि में पाया जाता है। 

पेट में होने वाला मरोड़ का दर्द, कभी – कभी इतना अधिक बढ़ जाता है। कि हिलने – डुलने पर दर्द अत्यधिक तेज हो जाता है अथवा दर्द हुए बिना नहीं रहता। यह तब तक बना रहता है। जब तक आप बैठ नहीं जाते या किसी आरामजनक स्थिति में नहीं आ जाते। ऐसे समय में विशेष चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है। यदि इनके साथ निम्न लक्षण हो तब तत्काल चिकित्सा अवश्य ले। 

  • पेट में मरोड़ वाले दर्द का गंभीर से गंभीरतम हो जाना 
  • त्वचा का पीला पड़ना
  • बुखार होना
  • मल में खून आना
  • वजन घटना
  • लगातार मतली और उल्टी
  • पेट में सूजन आना 

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पेट में मरोड़ होना क्या है (what is stomach ache)

पेट के मरोड़ को आंग्ल भाषी स्टमक ऐच ( stomach ache ) कहते है। जबकि हिंदी में इसे पेट दर्द ही कहा जाता है। जिसमे ऐठन या मरोड़ की प्रकृति पायी जाती है। जिसके कारण इसको मरोड़ वाला पेट दर्द भी कहते है। जिसको अन्य नाम टमी ऐच (tummy ache), गट ऐच (gut ache) और बेल्ली ऐच (bellyache) से भी जाना जाता है। जिसके दर्द (स्टमक पेन) की मुख्य प्रकृति मरोड़ (ऐंठन) है। जबकि सभी पेट दर्द का कारण लक्षण में कुछ न कुछ भेद होता है। 

पेट का मरोड़ असहजात्मक और असुविधात्मक संवेदना है। जिससे हम कभी न कभी जूझते ही है। जिसको स्टमक क्रैम्प (stomach cramps) भी कहते है। जिसमे ठीक उसी प्रकार दर्द होता है। जैसे रस्सी ऐंठने ( बरने या मरोड़ने ) पर होता है। जो ज्यादातर पेट की आंतो ( वृहदारांत्र ) में होता है। जिनमे पाचन तंत्र की गड़बड़ी भी हो सकती है। जिसमें पाचन क्रिया कैसे सुधारे को जानना लाभकारी है। 

पेट का यह दर्द अधिकांशतः चिंताजनक नहीं होता। जिसका आसानी से निदान और उपचार किया जा सकता है। लेकिन उस समय इसके गंभीर होने की प्र्रायिकता होती है। जब यह बार – बार मरोड़ की पुनरावृत्ति करता है। जो किसी गंभीर बीमारी का भी संकेत हो सकता है। जिसका उपचार करना कठिन हो जाता है। जिसके लिए बहुत ही सावधानी रखनी पड़ती है। जैसे तिल्ली का बढ़ना आदि बीमारियों में देखा जाता है। 

पेट में मरोड़ का मतलब (stomach ache meaning in hindi)

आयुर्वेद में समस्त उदर रोगो का मूल कारण, वाही स्रोतों में इकठ्ठा होने वाला दोष है। जिसमे वाही शब्द का तात्पर्य जलवाही और स्वेदवाही आदि है। जिसके अवरुद्धरण से प्राणवायु, अपानवायु और पाचकाग्नि दूषित होती है। जिससे पेट में मरोड़ आदि उठता है। जिसको पेट मरोड़ का मतलब (stomach ache meaning), या हिंदी में पेट के मरोड़ का मतलब (stomach ache in hindi meaning) कहते है।

जिनका स्थान छाती से लेकर श्रोणी ( पेल्विक )तक है। जिसके कारण पेट के मरोड़ में, इन स्थानों में पाए जाने वाले अंगो के प्रभावित होने की भी संभावना होती है। यह मरोड़ पेटातिरिक्त स्थान में भी हो सकता है। जिसे समझने को स्टमक क्रैम्प मीनिंग (stomach cramps meaning) कहते है। इसको हिंदी में स्टमक क्रैम्प का मतलब (stomach cramps meaning in hindi) कहा जाता है।    

पेट दर्द आपके पूरे पेट में कही भी होने वाली असुविधा है। जिसमे मुख्य रूप से पसलियों से लेकर श्रोणि के बीच का क्षेत्र शामिल है। जिसको हम अक्सर स्टमक पेन (stomach pain) समझते है। जिसमे प्रकृति विशेष का दर्द होने पर, इसको हिंदी में मरोड़ वाला पेट दर्द (stomach ache in hindi) कहते है। जिसमे रस्सी ऐंठने के सामान दर्द होता है। जो शरीर के अन्य अंगो से भी आ सकता है। जैसे – 

  • यकृत
  • पित्ताशय 
  • अग्न्याशय
  • छोटी आंत
  • बड़ी आंत आदि।

यह सभी हमारे पाचक तंत्र के अंग है। जिसमे विकृति होना भी पेट दर्द का कारण है। जबकि छाती, पीठ और श्रोणि आदि के कारण भी दर्द हो सकता है। 

पेट में मरोड़ उठने के कारण (stomach cramps reasons)

stomach ache reasons and pet me marod ke lakshan

पेट में मरोड़ के कई संभावित कारण हो सकते है। जिसमे सबसे आम गैस, अपच, मांसपेशियों में खिचाव आदि है। जिनको पेट में मरोड़ का कारण (stomach ache causes) कहते है। जो आमतौर पर गंभीर तो नहीं होते, परन्तु इनके गंभीर होने की पूरी संभावना होती है। इसलिए गंभीरता की अवधि में तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।  

पेट के मरोड़ का स्थान और स्वरूप महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते है। जो कारण निर्धारित करते समय विशेष रूप से उपयोगी होता है। यह प्रायः तीन प्रकार का होता है। 

  1. तीव्र
  2. पुराना
  3. प्रगतिशील  

तीव्र पेट का मरोड़ कुछ घंटो से लेकर, कुछ दिनों के लिए विकसित होता है। पुराना पेट का मरोड़ रुक-रुक कर (एपिसोडिक) होता है। अर्थात यह आ और जा सकता है। जो हफ्तों से लेकर, महीनों या सालो तक भी बना रह सकता है। कुछ पुरानी स्थितियों में प्रगतिशील मरोड़ वाला दर्द होता है। जो समय के साथ लगातार बढ़ता ( खराब ) होता जाता है। जिससे पेट में अत्यधिक मरोड़ (severe stomach ache) होने लगती है। जिसमे अनेको रोग और दोष सम्मिलित है। जैसे – 

पेट की मरोड़ के अन्य कारण (other stomach cramps causes)

इनको आमतौर पर पेट की मरोड़ का सामान्य कारण कहा जाता है – 

गैस : जिन खाद्य पदार्थो को शरीर नहीं पचा पाता। उसका पाचन छोटी आंत में जीवाणुओ द्वारा होने पर, आंत में गैस का दबाव बनता है। जिसके कारण पेट में मरोड़ और दर्द हो सकता है। इसमें पेट फूलना और डकार आने की भी संभावना होती है।  

कब्ज : मल के अत्यधिक सूखे और चिपचिपे होने से, आंतो में चिपकता है और बाहर नहीं निकल पाता। जिससे आंतो की दीवारों ( काँलोन ) में दबाव बढ़ने से, पेट में मरोड़ पैदा होती है। जिसमें कब्ज का रामबाण इलाज प्रभावकारी है। 

उल्टी : किसी भी कारण उल्टी होने पर, पेट में मरोड़ हो सकता है। उल्टी से पेट में जलन होने की संभावना होती है। 

मांसपेशियों में खिंचाव के कारण : रोजमर्रा के कामकाज आदि के दौरान, पेट की मांसपेशियों में तनाव या चोट आने पर पेट में मरोड़ हो सकती है। पेट की एक्सरसाइज भी मांसपेशियों में खिचाव कर सकती है। 

मासिक धर्म के समय : मासिक धर्म के दौरान रज स्राव होने पर, पेट में मरोड़ होना स्वाभाविक है। जिसमे जलन, सूजन व कब्ज जैसी समस्याए भी हो सकती है। 

मूत्राशय या मूत्र मार्ग में संक्रमण : मूत्राशय अथवा मूत्र मार्ग में बैक्टीरिया के संक्रमण से पेट में मरोड़ होती है। जिसमे पेट के निचले हिस्से में फुलाव के कारण, दबाव और दर्द होता है।  

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) : जो लोग आई बी एस से पीड़ित होते है। उनका पेट कभी साफ नहीं होता है। क्योकि वह भारी और गरिष्ट खाद्य पदार्थो को नहीं पचा पाते। प्रायः मलत्याग के बाद पेट में दर्द की शिकायत करते हुए, पेट साफ कैसे करे का विकल्प ढूढ़ते है। 

एसिड रिफ्लक्स : पेट में एसिडिटी आदि होने पर, एसिड पीछे चले जाते है। जिससे यह गले तक पहुंच जाते है। जिसके चलते पेट में जलन और मरोड़ का दर्द होता है।

क्रोहन रोग : यह पाचन तंत्र की परत में सूजन और जलन उत्पन्न करता है। जिससे पेट में मरोड़ का दर्द होता है। इस रोग में प्रायः पेट में गैस का बनना, उल्टी, दस्त या पेट में फुलाव होने की पूर्ण संभावना है।

सीलियक रोग : ग्लूटेन से एलर्जी के कारण यह रोग होता है। ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है। जो अनाजों में पाया जाता है। जैसे – गेहू आदि। जिसका सेवन करने पर छोटी आंत में सूजन और जलन होने लगती है। जिससे पेट में मरोड़ का दर्द होता है।  

पेप्टिक अल्सर : पेट का अल्सर ( घाव ) ठीक न होने पर, गंभीर और अस्थिर दर्द पैदा करता है। 

गैस्ट्रोएंटराइटिस : यह पेट का फ्लू कहा जाता है। जिसमे मतली और उल्टी के साथ, हल्का – हल्का पेट दर्द भी होता है। और पानीदार बार – बार सामान्य से अधिक मल का वेग आता है। जो अक्सर खाना खाने के बाद आता है। 

ज्यादातर मामलो में इसका कारण वायरस और वैक्टीरिया है। जिससे होने वाले लक्षण कुछ ही दिन में स्वतः या सामान्य उपचार से ठीक हो जाते है। यदि दो दिन से अधिक लक्षण होने पर, गंभीर स्वास्थ्य उत्पन्न कर सकते है। जैसे – विविध अंगो में संक्रमण, सूजन और जलन आदि। 

गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज ( GERD ) : गर्ड के कारण पेट में दर्द आदि के साथ, छाती में जलन और मतली भी हो सकती है। 

असामान्य कारण –

कुछ मामलो में पेट की मरोड़ मेडिकल स्थिति का संकेत हो सकती है। जिसके त्वरित देखभाल न की जाए तो घातक हो सकती है।

पेट में ऐंठन के कुछ कम सामान्य (less comman) कारण है। जैसे – 

  • अपेंडिसाइटिस ( अपेंडिक्स का फूटना ) अथवा शरीर के अन्य किसी आंतरिक भाग का फुट जाना
  • हेपेटाइटिस ( लीवर में सूजन व जलन )
  • किडनी में संक्रमण, किडनी रोग, किडनी स्टोन
  • फूड पाइजनिंग या फूड प्वाइजनिंग
  • पित्ताशय में पथरी ( पित्त की थैली में किसी कठोर पदार्थ का विकसित होना )
  • पेट के अंदरूनी भागो में संक्रमण 
  • पैरासाइटिक संक्रमण 
  • हर्निया
  • ह्रदय सम्बन्धी विकार ( एटीपिकाल एनजाइना अ कंजेस्टिव हार्ट फिलियर )
  • कैंसर ( विसजेसज रूप से पेट या आंतो का )  

पेट में मरोड़ के लक्षण (stomach ache symptoms)

पेट के मरोड़ में पाए जाने वाले लक्षण निम्न है –

  • मरोड़ और ऐंठन वाले पेट दर्द के लक्षणों में, दर्द प्रमुख लक्षण है। जो अलग – अलग प्रकार का हो सकता है –
  • तेज, मध्यम, चुभन, ऐंठन और मरोड़ वाला दर्द होता है। 
  • यह दर्द बार – बार आ – जा सकता है, और लगातार बना रह सकता है। 
  • इसमें दर्द के साथ उल्टी भी आ सकती है।
  • इसके दर्द की तीव्रता से आप ऐठ – गोएठ सकते है। अर्थात आप अपनी स्थिति में, परिवर्तनकर आरामदायक स्थिति खोज सकते है। जैसे – आगे या पीछे की ओर झुकना, पेट के बल सोना, गुठनों के बल बिस्तर पर रहना, हाथो – पैरों को सिकोड़ना या फैलाना आदि।    

पेट के मरोड़ से जल्दी छुटकारा कैसे पाएं (how to get rid of a stomach ache fast)

पेट में मरोड़ होने पर क्या करें

आयुर्वेद में सभी पेट रोगो का कारण, स्वेदवाही एवं जलवाही स्रोतों का अवरुद्धरण माना गया है। जिसमे प्रबल हेतु मल ( वातादि दोष ) है। जिसके जमने से वाही स्रोत बंद हो जाते है। जिसके कारण पेट में मरोड़ आदि का, दर्द होने की संभावना होती है।

जबकि कुछ आयुर्वेदज्ञों ने प्राणवायु और जठराग्नि में, दूषण को पेट दर्द का कारण स्वीकारा है। जो पेट में मरोड़ होने पर निम्न लक्षणों के द्वारा देखी जा सकती है।   

  • भूख का लोप होना ( भूख न लगना )
  • मुँह का स्वाद फीका होना
  • भोजन का ठीक से न पचना
  • पैरो में सूजन होना
  • शरीर का कमजोर होना
  • बल का क्षय होना 

यहाँ अग्नि दूषण का अर्थ – पूर्व मंद अग्नि का, वातादि दोषो के कारण और अधिक मंद हो जाना। और अपने प्रकोपित कारणों से दूषित हुई कोष्ठान्तर्गत रहने वाले, प्राण – अपान वायु को दूषित कर देता है। क्योकि एक वायु दुसरे वायु को गंदा करता ही है। विवक्षावसात देखा जाय तो दोनों बाते एक दुसरे की समर्थक है। जिसके कारण दोनों समानार्थी है न कि विपरीतार्थी। 

पेट में पायी जाने वाली मरोड़ में, सामान्यतः आंते सर्वाधिक प्रभावी होती है। जिसमे दो परस्थियाँ पनपती है। पहली पानी की कमी और दूसरी पानी की अधिकता।

खाना खाने के बाद पेट में मरोड़ होना (stomach ache after eating)

how to get rid of a stomach ache

जब हम अत्यंत रूखा, चिपचिपा, अधपका, अधिक पानी सोखने वाला और जल्दबाजी में भोजन करते है। और किसी मजबूरीवश पानी पीना भूल जाते है, अथवा विपरीत परिस्थिति के कारण चाहकर भी नहीं पी पाते। जैसे – यात्रा, शादी – विवाह आदि कार्यक्रमों की व्यस्तता में। तब पाचन प्रक्रिया में अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है। जिसकी उपलब्धि न होने पर, उदर के सहायक अंगो से जितना पानी मिल पाता है। उतने से भोजन का पाचन होता है। जोकि अपर्याप्त होता है। 

जिससे मल आंतो में सूखता और चिपकता है। ये पेट साफ न होने के लक्षण है। ऐसा होने पर शरीरगत दोष असंतुलित हो जाते है। जिसको भड़काने में आहार, मौसम ( ऋतु ) – दिनचर्या आदि सहायक है। जिस पर भागदौड़, व्यस्तता आदि के कारण, हमारा ध्यान नहीं जाता। जिससे पेट में दो तकलीफे पैदा होती है। पहली पेट में मरोड़ के साथ दर्द (pet me marod ke sath dard) होता है। जिसके लिए मरोड़ का इलाज करवाना पड़ता है।  

दूसरी पानी की कमी और वात – पित्त की अधिकता से, आंतो में मल सूखने लगता है। जो सूखकर इतना कडा और कठोर हो जाता है कि – मल का वेग ही नहीं आता। जिससे पेट साफ नहीं होता। जिसके लिए लोग पेट साफ करने के लिए क्या खाना चाहिए पूछते है।  

पेट में मरोड़ और दस्त लगना (stomach ache and loose motion)

जब हम अनजाने में या गलती से, अत्यधिक पानी पी लेते है। प्रकृतिविरुद्ध भोजन कर लेते है, तिल की पीठी, अंकुरित चना आदि अन्नों को खाने, अधिक मात्रा में भोजन करने आदि। प्रतिकूल कार्य से कुपित वात दोष, शरीरगत जलधातु को आंतो में ले जाता है। उसी से उदर की अग्नि को मंद करके, मलाशय को विकार युक्त कर देता है। जिससे वह ( वात दोष ) पुरीष को पतला करता हुआ, दस्त पैदा करता है। 

इस स्थिति में पेट में मरोड़ और दस्त (pet me marod aur dast) होता है। जिसके उपचार हेतु पेट में मरोड़ और दस्त की Medicine की आवश्यकता होती है। 

प्रेगनेंसी में पेट में मरोड़ होना (stomach ache during pregnancy)

पुरुषो की तुलना में अंग विशेष के कारण, महिलाओ की शारीरिक रचना पुरुषो से कुछ भिन्न होती है। जिससे इनकी क्रिया विधि में भेद हो जाता है। महिला की शुद्धि में प्रतिमाह रज दर्शन महत्वपूर्ण है। जिसकी सानुकूलता को ही हम मासिक धर्म कहते है। जिसके दौरान पेट में मरोड़ होता ही है।

महिलाओं में गर्भावस्था विशेष अवस्था मानी गई है। जिसमे एक साथ अनेको प्रकार की क्रियाए एक साथ होती है। जिसमे दोष विशेष की वृद्धि कष्टमय परिस्थिति को जन्म देती है। जैसे – एसिडिटी, पेट में गैस बनना आदि। जिसके कारण भी प्रेगनेंसी में पेट में मरोड़ हो सकता है।  

पेट में मरोड़ होने पर कैसे सोये (how to sleep with a stomach ache)

पेट के मरोड़ में कैसे सोये 

पेट में मरोड़ होने पर दर्द बहुत होता है। जिससे किसी भी स्थिति में रह पाना कठिन है। जबकि सामान्य तौर पर बाई करवट सोना आयुर्वेद संगत है। जो रोग आदि के चपेट में, आने के बाद सम्भव नहीं हो पाता। जिसमे पेट की मरोड़ का घरेलू इलाज उपकारी है। 

फिर भी आराम करने के लिए अनुकूल स्थिति भी चाहिए। जिसमे लोग पेट के बल ( औधा ), पेट को दबा कर सोना पसंद करते है। जो स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं। जिससे रोगातिरिक्त हानि होने की पूर्ण संभावना होती है। इसलिए उपचार आदि के बाद दर्द घटते ही, सोने की सामान्य अवस्था का ही आलंबन लेना चाहिए। जिसमे दाई – बाई करवट के साथ पीठ के बल सोना बढ़िया है।

पेट में मरोड़ के उपाय (stomach ache remedies)

आज हमारे पास पेट के मरोड़ का उपचार करने की अनेको विधिया है। जिसमे आयुर्वेद ( घरेलू उपचार ), होम्योपैथी और आधुनिक पद्धति ( एलोपैथी ) है। जिसमे आयुर्वेद सबसे पौराणिक और सुप्रशिद्ध है। जबकि होम्योपैथी और अंगरेजी दोनों ही नवीन विधाए मानी जाती है। जिनका आलंबन लेकर हम, पेट के मरोड़ से छुटकारा पा सकते है। 

पेट के मरोड़ को पेट दर्द (stomach ache or pain) भी कहते है। क्योकि इसका स्थान हमारा पेट है। जबकि पेट में मरोड़ होने पर, जेवर बरना के सामान दर्द की प्रकृति होती है। जिसमे पैसे ऐंठने से भी अधिक दर्द होता है। प्रायः शारीरिक दर्द की अभिव्यक्ति, मानसिक दर्द की अपेक्षा विकराल होती है। इसलिए चिकित्सा में पेट के मरोड़ का अर्थ (meaning of stomach ache) समझना होता है। जिससे आयुर्वेदानुसार दोषो को संतुलित किया जा सके। 

पेट में मरोड़ की दवा (stomach ache medicine)

पेट का मरोड़ इतना भयंकर होता है। जिसको सह पाना किसी के वश में नहीं होता है। यह स्थिति रोगी को जितनी पीड़ा पहुँचाती है, उतनी ही रोगी के सगे सम्बन्धियों के लिए पीड़ा दायक होती है। जिसके लिए पेट में ऐंठन की दवा (medicine for stomach ache) अत्यंत उपयोगी है। जिसके कुछ उपाय इस प्रकार है –

पेट में मरोड़ के घरेलू उपाय ( stomach ache home remedies in hindi ) 

पेट में मरोड़ के घरेलू उपचार सदियों से प्रसिद्ध है। जिनका उपयोग अधिकाँश लोग आज भी करते है। जो इस प्रकार है – 

मेथी : एक कटोरी दही में, थोड़े से मेथी के दाने पीसकर मिला ले। जिसमे स्वाद के लिए थोड़ा सा काला नमक मिला सकते है। इसके सेवन से पेट के मरोड़ में बहुत लाभ होता है। 

इसबगोल : कई बार अपच के कारण पेट में मरोड़ होता है। ऐसे में दो चमम्च इसबगोल को दही के साथ लेना लाभदायक है। जिसको खाने से पेट साफ होने के साथ, पेट का मरोड़ भी ठीक होता है।  

मूली : पेट के मरोड़ में मूली बहुत ही गुणकारी है। जिसके लिए मूली को बढ़िया से धोकर, छोटे – छोटे टुकड़ो में काट ले। इसके ऊपर पिसा हुआ काला नमक और काली मिर्च छिड़ककर खाये। जिससे पेट के मरोड़ में असंभावित लाभ होता है।   

अजवाइन : पेट में होने वाली मरोड़ के लिए अजवाइन लाभकारी है। जिसके लिए इसे तवे पर भूनकर, सेंधा और काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी से ले। ऐसा दिन में दो – तीन बार करने से, कुछ ही दिन में पेट के मरोड़ से लाभ होता है।   

हींग : पेट के विकार में हींग बहुत फायदेमंद है। जिसको गर्म पानी में घोलकर पीया जाता है। इसके साथ छोटे बच्चो के पेट में मरोड़ होने पर, इसको नाभि पर लगाने से फायदा होता है। 

सौफ : आमतौर पर सौफ और मिश्री खाना पचाने में सहायक है। जिससे अपच और एसिडिटी की समस्या नहीं पनपती। इस कारण इसका इस्तेमाल करने से, पाचन विकार से होने वाला पेट का मरोड़ नहीं होता।

पेट में खिचाव

पेट की मालिस : मालिस मांसपेशियों के खिचाव को कम करने में सहायक है। जिसके लिए तेल से पेट की मालिस की जाती है। जिससे नसों का दवाव खुल जाता है। और पेट के मरोड़ में आराम मिलता है। इसके साथ मांसपेशियों को सक्रिय करने का बढ़िया उपाय भी है।  

पेट में मरोड़ का आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedic stomach cramps remedy)

रोग जब अत्यंत जीर्ण हो जाता है, तब शरीर पर अपना अधिकार जमा लेता है। जिसको आसानी से निकालना कठिन होता है। परन्तु अनुकूल चतुष्पाद चिकित्सा की, सानुकूलता प्राप्त होने पर रोग का टिक पाना असम्भव है। जैसे सूर्य के उदय होते ही अन्धकार समाप्त हो जाता है। पेट की ऐंठन को दूर करने के कुछ योग निम्नलिखित है –

नीलीन्यादि चूर्ण : नील के बीज, सोंठ, मारीच, पीपर, जौखार, जलवेतसफल, पांचो नमक ( सेंधा, सोंचर, विड, समुद्री,  औदभिद ) और चित्रकमूल। सभी को सामान मात्रा में लेकर कपड़छान चूर्ण कर ले। इसको मात्रानुसार घी में मिलाकर पीने से पेट की मरोड़ और ऐंठन नष्ट हो जाती है।   

नारायण चूर्ण : सभी प्रकार के पेट रोगो का नारायण चूर्ण विध्वंशक है। जिसका सेवन तक्र ( छाछ ) से करना फल दाई है। इसका उपयोग पेट की गैस को जड़ खत्म करने में भी होता है। 

त्रिफला चूर्ण : त्रिफला एक श्रेष्ठ विरेचक चूर्ण है। जो पेट की समस्त तकलीफो को दूर करता है। जिससे रोगो शरीर में आश्रय नहीं बना पाते। 

पंचसकार चूर्ण : इस चूर्ण का नियमित सेवन करने से, नियमित पेट साफ होता रहता है। जिससे पेट में मरोड़ आदि नहीं उठने पाता। 

पेट में मरोड़ की होम्योपैथिक दवा (homeopathic stomach cramps medicine)

होम्योपैथी लक्षण सादृश्यता के सिद्धांत पर संचलित चिकित्सीय पद्धति है। जिसके कारण इन दवाओं को निर्धारित करने का, एक मात्र उपाय लक्षण की परख करना है। जिसमे निपुण होने पर ही लाभ करती है। पेट के मरोड़ की कुछ दवा निम्न है – 

कोलोसिन्थ : इसका पेट दर्द अत्यधिक मरोड़ वाला होता है। जिसके कारण रोगी आगे की ओर झुक जाता है। रोग वाली जगह को कस के दबाए रहता है। बिस्तर पर पैरो को सिकोड़कर सोता है। ऐसा इसलिए करता है, क्योकि ऐसा करने पर रोगो को आराम मिलता है। 

मैग्नेशिया फॉस : इसके पेट का मरोड़ अत्यंत भयंकर होता है। जिसमे पेट पर गर्माहट मिलने पर ही, दर्द कुछ समय के लिए शांत होता है। जैसे – गर्म कपडे या गर्म पानी के बोतल से सेकने पर।   

कैमोमिला : यह बहुत कुछ कोलोसिंथ से मिलती – जुलती है। दोनों ही दवाइया क्रोधजनित पेट दर्द में उपयोगी है। अब अंतर् इतना है को कॉलोसिंथ में ऐंठन, मरोड़ या खींचन ( तनाव ) रहता है। जबकि कैमोमिला में पेट में वायु बनना, अफरा, छटपटाना, रोना, परेशानी से बैचैन होना पाया जाता है।  

स्टैनम : यह बच्चो में उपयोग होने वाली बढ़िया दवा है। जिसमे दर्द खूब जोर से दबाने पर कुछ घटता है। इसमें बच्चे के पेट को सीने पर रखकर, पेट को दबाए हुए टहलने पर आराम मिलता है। 

एन्टिम टार्ट : लगातार दर्द और समस्या का बने रहने के साथ ओकाई आना, बार – बार ओकना, मिचली आना, उल्टी की अपेक्षा मतली अधिक होने में फायदा करती है। 

पेट में मरोड़ की टेबलेट (pet me marod ki tablet)

सामान्य रूप से सभी एलोपैथिक दवाई, कृत्रिम रसायनो का उपयोग करके बनाई जाती है। जिसको बाद में टेबलेट आदि का रूप दिया जाता है। जो दर्द विशेष में उपयोग की जाती है। जिनके कुछ नाम इसप्रकार है – 

साइक्लोपैम टेबलेट (cyclopam tablet) : यह पेट दर्द की दवा है। जो इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम में भी लाभ करती है। इसके साथ विपुटीशोथ आदि में भी उपयोग होती है। 

ट्रिगन डी टेबलेट (Trigan D tablet) : पेट दर्द अंग्रेजी दवा है। जो पेट की मरोड़ में फायदा पहुंचाता है। 

मैकफ़ास्ट टेबलेट (Macfast tablet) : कृत्रिम विचूर्णो से निर्मित पेट दर्द की दवा है। 

पैरासीप टेबलेट (Paracip tablet) : पेट में खीचन वाला दर्द होने की दवा है। जो पेट में मरोड़ होने पर देखा जाता है। 

पैसिमोल टेबलेट (Pacimol tablet) : पेट फूलने के कारण होने वाले दर्द में लाभकारी है। 

सारार्थ :

पेट के मरोड़ का दर्द अत्यंत भीषण एवं उग्र होता है। जिसको सहन करना मुश्किल होता है। सामान्यतः पेट में गैस, अपच जैसे रोगो से भी पेट दर्द होता है। जिसके कारणों का निस्तारण करने पर ठीक हो जाता है। जबकि जीर्ण हो चुका पेट का मरोड़ अत्यंत दुरूह होता है। जिसके लिए धैर्य पूर्वक चिकित्सा अपेक्षित है।

सामान्य पेट का मरोड़ दूर करने में घरेलू उपाय बहुत ही गुणकारी है। जबकि चिकित्सीय उपायों को अपनाने से पूर्व, चिकित्सीय परामर्श आवश्यक है। जबकि स्वास्थ्य को चिर काल तक सुस्थिर रखने में, रोग से बचने का उपाय करना शास्त्रीओ सिद्धांत है। जिसका निर्वाह करने पर, आजीवन हम रोग और दोष से बचे रहते है। 

FAQ

पेट में मरोड़ होने का क्या कारण है?

स्वेदवाही और जलवाही स्रोतों में मल संक्षेपण से, अवरुद्धता आने के कारण पेट में मरोड़ होता है।

पेट में मरोड़ क्यों उठते है?

मानव शरीर नियमित अंतराल पर क्रियाओ की पुनरावृत्ति करता है। जिसके कारण जब मल पेट में संग्रहित होता है, तब पेट में मरोड़ पैदा करता है।  

पेट में बहुत तेज दर्द हो तो क्या करें?

अचानक पेट में तीव्र दर्द हो, तो पहले आराम से हवादार स्थान पर बैठ जाए। इसके बाद सेंधा नमक को पानी में उबालकर गुनगुना पिए। यदि कुछ समय बाद दर्द में कमी आती है। तब घरेलू उपचार ले अन्यथा चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह ले।  

पेट में ऐंठन हो तो क्या करे?

अदरक में अनेक ऐसे तत्व पाए जाते है, जो पेट की मरोड़ को कम करने में सहायक है। 

स्रोत (References) : 

चरक संहिता चिकित्सा अध्याय 13

मधुकोशकार ( माधव निदान ) अध्याय 35

सुश्रुत संहिता निदान अध्याय 7

सुश्रुत संहिता निदान अध्याय 2

सुश्रुत संहिता चिकित्सा अध्याय  

भाव प्रकाश 

अष्टांग संग्रह उत्तर अध्याय 40

अष्टांग हृदयं चिकित्सा अध्याय 3

अष्टांग हृदयं सूत्र अध्याय 18

मायो क्लिनिक

माई उपचार 

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