हाल के कुछ वर्षों में मिलेट ने ग्लूटेन मुक्त अनाज के रूप में लोकप्रियता पायी है। लेकिन वास्तव में क्या मिलेट ग्लूटेन मुक्त है? यह वह सवाल है जो अक्सर हमारे मन में बना रहता है।
हालाकिं सदियों पूर्व आयुर्वेद इन्हे शुक और शिम्बी धान्य वर्गों में रखा गया है। जिसके कारण इसकी खेती पूरे भारत वर्ष में हजारो सालों से की जाती रही है।
मिलेट जिसे आजकल बाजरा के नाम से जाना जाता है। उसमे फाइबर, प्रोटीन, और खनिजों जैसे पोषक तत्वों पाए जाते है। जिसके कारण यह उन लोगों के लिए स्वस्थ्य भोजन का विकल्प है। जो निरोगी जीवन जीना पसंद करते है।
फिर भी ग्लूटेन सेंसिटिविटी या सीलिएक रोग वाले लोगों को, ग्लूटेन को लेकर शक बना रहता है। जो आज के समय में एक आम धारणा है। परन्तु वास्तव में ग्लूटेन हर किसी के लिए हानिकारक है। जिसके लिए यह जानना आवश्यक है कि ग्लूटेन खाना आपके लिए हानिकारक क्यों है?
ग्लूटेन मुक्त आहार क्या है?
ग्लूटेन एक ऐसा लसलसा और खिचाव करने वाला रसायन है। जो अनाजों में पाया जाता है। जिसका इस्तेमाल आकर्षक आकार देने के लिए किया जाता है। लेकिन इसको खाने से पेट में अनेको तरह की समस्याए होती है। यह उन रोगियों के लिए अधिक खतरनाक है। जो सीलियक रोग से पीड़ित अथवा ग्लूटेन के प्रति असहिष्णु ( सेंसिटिव ) है।
ग्लूटेन मुक्त आहार का अभिप्राय ऐसे आहार से है। जिसमे ग्लूटेन न पाया जाता हो। जिसे आज के समय में ग्लूटेन फ्री मीनिंग के नाम से भी जाना जाता है। लोगो की आम धारणा है कि अक्सर खाये जाने वाले सभी अनाजों में ग्लूटेन पाया जाता है।
जबकि आम धारणा के विपरीत, बाजरा स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है। इसका मतलब है कि ग्लूटेन सेंसिटिविटी या सीलिएक रोग वाले व्यक्ति, बिना किसी प्रतिकूल प्रतिक्रिया के सुरक्षित रूप से बाजरा खा सकते हैं।
मिलेट्स क्या होता है ( millets kya hota hai )
मिलेट या बाजरा एक प्रकार का एक छोटा, पोषक तत्वों से भरपूर मोटा अनाज है। जो अक्सर देखने में हल्का पीला या मटमैले रंग का गोल और चपटा हुआ करता है। जिसमे फाइबर बहुतायत में पाया जाता है। जिसके कारण यह बहुत आसानी से पचता है। जिसके कारण पेट रोग होने की गुंजाइस न के बराबर रह जाती है।
परन्तु इतना ही नहीं मिलेट में और भी बहुत से पोषक तत्व पाए जाते है। जिनकी आपूर्ति का बने रहना हमें स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है। किन्तु इसके लिए मिलेट को कैसे पकाये यह जानना आवश्यक है। ताकि मिलेट में पाया जाने वाला पोषक तत्व नष्ट न हो।
आजकल हम जो कुछ भी खाते है। उनमे वो गुणवत्ता नहीं पायी जाती। जिसकी हमारे शरीर को आवश्यकता है। जिसके लिए मुख्य रूप से निम्न गड़बड़ियों को दूर करना जरूरी है –
- प्राकृतिक अथवा जैविक रूप से उत्पादित होना
- मिलावट से बचना
- इनको पकाने की सही विधि का अनुपालन करना
- फिर इनको खाने के लिए उपयुक्त अनुपान ( सामग्री ) का प्रयोग करना, आदि।
वास्तव में क्या मिलेट ग्लूटेन मुक्त है?
आजकल मिलेट बहुत से स्वास्थ्य लाभों के लिए आज लोकप्रिय हो गया है। लेकिन क्या यह सच में ग्लूटेन मुक्त होता है। यह आपको आश्चर्य में डाल सकता है।
आयुर्वेद में मोटे अनाजों ( तृण, क्षुद्र आदि ) को खाने के लिए सबसे सुरक्षित बताया गया है। जबकि आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि बाजरे में स्वयं ग्लूटेन नहीं पाया जाता है।
इसलिए ग्लूटेन मुक्त आहार के विकल्प का तलाश करने वालों के लिए मिलेट सुरक्षित विकल्प है। परन्तु यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मिलेट के प्रसंस्करण, पैकेजिंग या खाना पकाने के दौरान क्रॉस-संदूषण हो सकता है। इस कारण अक्सर मन में सवाल आ ही जाता है कि क्या बाजरा ग्लूटेन मुक्त आहार है?
यह निर्धारित करने के लिए आपको पैकेजिंग पर प्रमाणित ग्लूटेन-मुक्त लेबल देखना या ग्लूटेन-मुक्त मिलेट बेचने वाले प्रतिष्ठित ब्रांडों से खरीदना उचित है।
इसलिए यदि आप बाजरा और ग्लूटेन सामग्री के बारे में उत्सुक हैं, तो आप यह जानकर निश्चिंत रह सकते हैं कि वास्तव में बाजरा ग्लूटेन-मुक्त आहार है।
जो इसे ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले व्यक्तियों के लिए एक पौष्टिक और सुरक्षित विकल्प बनाता है। जिसका वर्णन आयुर्वेद आदि ग्रंथों में सदियों से दर्ज है।
व्यवहारिक रूप से मिलेट मूल्य ( millet price ) गेहू और चावल से कुछ अधिक है। लेकिन खपत और पोषक तत्वों को ध्यान में रखा जाय तो बहुत ही सस्ता है।
उपसंहार :
ग्लूटेन नामक रसायन ऐसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। जिसमे खिचाव प्रदान करने की क्षमता पायी जाती है। जैसे – गेहू आदि। इस कारण इनका सेवन करने वालों को पेट रोग ( सीलियक ) होने की संभावना पायी जाती है।
वही दूसरी ओर दुनिया भर में सबसे अधिक इनको ही खाया जाता है। फिर चाहे जंक फ़ूड अथवा बेकरी आदि के रूप में। जबकि सभी प्रकार के मिलेट पूर्णतया ग्लूटेन रहित है। फिर चाहे वह किसी भी श्रेणी के क्यों न हो।
हालाकिं आज मिलेट का उत्पादन बहुत कम किया जाता है। जिससे इनकी कीमत कुछ अधिक होती है। इस कारण हर आदमी तक इनकी पहुंच नहीं हो पाती। लेकिन जब किसी कारण वश इनको खाने का सुझाव दिया जाता है। तब हमारे मन में सवाल आ ही जाता है कि क्या मिलेट ग्लूटेन मुक्त है।
आज का समय विज्ञान और प्रौद्योगिकी का है। जिसके कारण शङ्करीकरण की प्रक्रिया अधिकतर खाद्य पदार्थो को अधिक पैदावार पाने के लिए किया जाता है। जो वास्तव में खाद्यों के प्रसंस्करण का गलत उपयोग है। इसलिए आयुर्वेद में बताये गए विधि – विधान से बाजरे का उत्पादन करना ही सही है।
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