चिकित्सा की दृष्टि हम जीवों के शरीर का लगभग दो तिहाई भाग जल है। जिससे हमारे लिए जल की गुणवत्ता भोजन से भी अधिक है। किन्तु आजकल हमारे पास पानी को पीने और भण्डारण के लिए अलग – अलग प्रकार के पदार्थों से बने बर्तन है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?

आज के वैज्ञानिक युग में सूचनाओं की कही कोई कमी नहीं है। फिर भी हम पीने के पानी को अमूमन प्लास्टिक से बने बोतल और गिलास में पीते है। जो आजकल हमारे आस – पास बड़ी आसानी से उपलब्ध है। जिसको आजकल मिनरल वाटर कहकर बाजार में बेचा जाता है।
वही हम अपने घरों में आर ओ वाटर को इस्तेमाल करते है। जो बाजार में मिलने वाले पीने के पानी जैसा माना जाता है। लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि पीने के लिए सबसे अच्छा पानी कौन सा है?
बहरहाल पानी कोई सा भी हम पानी को पीने के लिए ज्यादातर स्टील का गिलास प्रयोग करते है। नहीं तो कांच के गिलास का प्रयोग करते है। जबकि मिट्टी से बने बर्तन तो विकास की भेट चढ़ गए। ऐसे में एक बात हमारे – आपके सामने आ कर खड़ी होती है। वह है पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
हमारे लिए पीने का पानी जितना शुद्ध होगा। उतना ही हमारे लिए फायदेमंद होगा। लेकिन अमूमन हम देखने में साफ़ और दर्गन्ध मुक्त पानी को पीने लायक मानते है। जबकि चिकित्सीय दृष्टि से पीने के पानी में निम्नलिखित गुण होने आवश्यक है –
- संरचनात्मक युक्त हो है
- जीवाणु और विषाणु रहित हो
- पानी का टी डी एस 200 – 400 पीपीएम हो
- स्वादहीन, गंधहीन और रंगहीन हो
- पानी अम्लीय न हो ( पी एच 8 से 9 के बीच हो )
प्लास्टिक के बर्तन में पानी पीना चाहिए
लेकिन जब हम पानी को प्लास्टिक के बर्तन में रखते है, तो प्लास्टिक के नैनों पार्टिकिल पानी में घुलने लगते है। जिससे पानी की संरचना टूटने के साथ – साथ अम्लीय होने लगता है। इस कारण हमें पता लगाना पड़ता है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
जबकि पानी का स्वाद, रंग और गंध में किसी तरह का बदलाव नहीं होता। वही प्लास्टिक के बर्तन में रखे पानी का टीडीएस भी वही रहता है। जिस टीडीएस का पानी, उस प्लास्टिक के बर्तन में डाला गया था।
हाँ प्लास्टिक के बर्तन में सावधानी पूर्वक पानी रखने से, यह जीवाणु और विषाणुओ से मुक्त रहता है। लेकिन चिकित्सीय विधा के अनुरूप यह पीने के पानी की मूलभूत गुणों से हीं हो जाता है। ऐसे में हमें जरूरत पड़ती है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
स्टील के बर्तन में पानी पीना चाहिए

स्टील का बर्तन पीने के पानी को जस का तस बना के रखता है अर्थात किसी तरह का कोई रसायन नहीं छोड़ता। जिससे स्टील के बर्तन में पानी रखने से, अगर हमें कोई लाभ नहीं देता तो किसी तरह की कोई हानि भी नहीं पहुंचाता।
इसके साथ यह गैर – प्रतिक्रियाशील होता है। जिससे पानी के स्वाद में कोई बदलाव नहीं आता। जिससे अभी भी सवाल बना रहता है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
फिर स्टील की कीमत कम होने के साथ – साथ यह टिकाऊ भी होता है। इसके साथ इसकी साफ़ सफाई भी आसानी से हो जाती है। जिससे अधिक से अधिक लोग स्टील का उपयोग रसोई में उपयोग होने वाले बर्तनो के रूप में करते है।
स्टील के बर्तन में पानी पीने के फायदे
अमूमन स्टील के बर्तन में पानी पीने के निम्नलिखित फायदे है –
- स्टील में कोई रसायन नहीं छोड़ता। जैसे प्लास्टिक BPA आदि को छोड़ता है।
- स्टील में कोई छिद्र नहीं पाया जाता। जिससे स्टील में रखे पानी में जीवाणु और विषाणु नहीं पनपते।
- स्टील पूरी तरह पुनर्चक्रित है। जिससे इसका इस्तेमाल करने से कोई प्रदूषण नहीं होता।
- किसी भी तरह के स्वाद और गंध से मुक्त है।
स्टील के बर्तन में पानी पीने के नुकसान
आमतौर पर स्टील के बर्तन में पानी पीने से कोई हानि नहीं होती। लेकिन यदि ख़राब गुणवत्ता का स्टील प्रयोग करते है, तो आपके पानी में निकिल और क्रोमियम जैसे तत्व मिल सकते है। खासतौर पर तब जब आप गर्म या अधिक खट्टी कोई चीज स्टील में रखते है।
एल्युमीनियम के बर्तन में पानी पीना चाहिए
एल्युमीनियम के बर्तन में पानी पीने से तात्कालिक रूप से कोई हानि तो नहीं होती। लेकिन गर्म पानी डालने और अधिक समय तक, पानी का भंडारण करने के लिए अच्छा नहीं है। क्योकि एल्युमीनियम का उपयोग करने से लीचिंग ( एल्युमीनियम घुलने ) की समस्या आ सकती है।
जिसके कारण हमारे भीतर न्यरोलॉजिकल से सम्बंधित समस्याए आ सकती है। इस कारण अभी भी सवाल बना रहता है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
कांच के बर्तन में पानी पीना चाहिए
कांच सिलिका से बना होता है। जो एक प्रकार की मिट्टी ही है। लेकिन इससे बनने वाले बर्तनों में कोई छिद्र नहीं होता। जिससे न यह पानी को ठंडा करता है और न किसी तरह की कोई गंध छोड़ता है। फिर कांच किसी तरह का हानिकारक अपशिष्ट पदार्थ भी नहीं छोड़ता।
जिसके कारण सर्वतोभावेन यह पानी के भंडारण के लिए सबसे उपयुक्त है। लेकिन अभी भी सवाल बना हुआ है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
मिट्टी के बर्तन में पानी पीना चाहिए
मिट्टी के बर्तन में छोटे – छोटे छिद्र होते है। जो न केवल पानी को ठंडा करते है। बल्कि सौधा स्वाद और गंध भी प्रदान करते है। जिससे मिट्टी के बर्तन में रखा पानी न केवल हमारी प्यास बुझाता है। बल्कि आत्मा को भी तृप्त करता है। खासकर तब जब गर्मियां चल रही हो।
लेकिन अधिक समय तक इसमें पानी रखा रहने पर, पानी से गंध आने लगती है। इसलिए इसके बर्तनों में रखे पानी को दो – एक दिन में बदलने की आवश्यकता होती है। फिर यह किसी तरह का कोई हानिकर द्रव्य को पानी में नहीं मिश्रित करता। फिर अभी भी सवाल बना रहता है पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
पीतल के बर्तन में पानी पीना चाहिए

पीतल एक मिश्र धातु है। जो तांबा और जस्ता को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर बनाया जाता है। जिसके कारण यह माना जाता है कि पीतल के बर्तन का पानी पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।
लेकिन टिन की कलई किये हुए पीतल के बर्तन पानी पीना, बिना कलई किये हुए पीतल के बर्तन में पानी पीना अधिक सुरक्षित है। लेकिन पीतल के बर्तन में खट्टे पदार्थ को डालने से बचे।
इसके साथ इसको साफ़ करने के लिए नमक और खट्टी चीजों से साफ़ करना चाहिए। ताकि पीतल के बर्तनों पर हरी परत न जमे। लेकिन अभी भी सवाल बना है कि पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन कौन सा है?
तांबे के बर्तन में पानी पीना चाहिए
ताम्बा पानी पीने के लिए सबसे उपयुक्त धातु है। क्योकि ताम्बा पानी में घुली हुई अशुद्धियों को बाहर कर देता है। बल्कि पानी की टूटी हुई संरचना को भी फिर से बना देता है। इस कारण ताम्बा पानी पीने के लिए सबसे अच्छा बर्तन है।
आठ – दश घंटे तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल, पीने से न केवल हमारी पाचन क्षमता में सुधार होता है। बल्कि शरीर के हानिकारक विषैले पदार्थ बाहर निकलते है और त्वचा चमकदार बनती है। किन्तु ताम्बे का बर्तन पानी के सम्पर्क में आते ही आक्साइड बनाने लगता है।
जिसके कारण इसकी सफाई करना बहुत जरूरी है। हालाकिं इसकी सफाई करने के लिए नमक और नीबू या इमली के पानी की आवश्यकता पड़ती है। बिना साफ़ किया हुआ तांबे के बर्तन का पानी पीने से कोई लाभ नहीं होता।
निष्कर्ष :
आमतौर पर लोग पानी पीने के लिए स्टील के बर्तनों का ही प्रयोग करते है। क्योकि न केवल यह कीमत में कम है। बल्कि अधिक टिकाऊ और रख रखाव में आसान है। किन्तु 304 ग्रेड से नीचे के ग्रेड का स्टील का प्रयोग करने से स्टील में जंग लग सकता है। जिससे पानी में निकिल और क्रोमियम की अशुद्धता आ सकती है।
हालाकिं एल्युमीनियम के बर्तन पानी रखने के लिए उतने अच्छे नहीं माने जाते। क्योकि एल्युमीनियम के बर्तनों में गर्म और खट्टा चीज डालने से लीचिंग की समस्या आती है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकर है।
फिर कांच, मिट्टी पानी पीने के लिए बहुत ही अच्छे विकल्प है। लेकिन इनका रख रखाव अधिक होने से उतने प्रायोगिक नहीं है। जिसके कारण अब धातुओं के मिश्रण से पीतल आदि के बर्तन पानी पीने के लिए उपयोग होते है। जो स्वास्थ्य की दृष्टि से उतने अच्छे नहीं है। जितना कि ताम्बा।
आज तांबे की कीमत आसमान छू रही है। फिर भी दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यहारिक दृष्टि से ताम्बे के बर्तन पानी पीने के लिए सर्वोत्तम है। क्योकि यह न केवल गुणवत्ता के जल को गुणवत्ता युक्त जल में बदल देता है। बल्कि हमारे शरीर में आवश्यक ताम्बे की उपलब्धता को भी सुनिश्चित करता है। इसकारण ताम्बे के बर्तन पानी पीने के लिए सबसे उपयुक्त माने गए है।
ध्यान रहे : ताम्बे के बर्तन में पानी पीना सबसे बढ़िया है। लेकिन गर्म पानी और कुछ खट्टा मिला हुआ नहीं।
उद्धरण :
FAQ
स्टील के बर्तन में पानी पीने से क्या होता है?
स्टील के बर्तन में पानी भी पीने से कोई लाभ नहीं होता। यह जिस गुणवत्ता का पानी होता है। उसे बनाये रखता है। बशर्ते स्टील 304 ग्रेड से कम का न हो।