शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी जल से बनी है। लेकिन यह जल हम मनुष्यों के लिए तभी तक उपयोगी है। जब तक हम इसका मात्रात्मक सेवन करते है। लेकिन बहुत से लोग अपने शरीर के लिए पानी की उपयुक्त मात्रा का आकलन नहीं कर पाते। जिससे उनके लिए यह जानना आवश्यक है कि स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?

पानी हम जीवों की दिनचर्या का अभिन्न अंग है। आयुर्वेद के आचार्यों ने स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या का पालन अनिवार्य माना है। क्योकि शास्त्र विरुद्ध दिनचर्या का पालन करने पर, शरीरगत दोषों में विषमता आती है। फिर पानी तो हम प्रतिदिन बार – बार प्रयोग करते है। जिसके कारण पानी को आयुर्वेदज्ञों दिनचर्या के अंतर्गत रखा है।
जो हमारे रोग के प्रमुख कारणों में हेतु है। जिस पर आज किसी का ध्यान नहीं जाता। फिर रोग का कारण विद्यमान रहने पर, रोग की प्रवृत्ति बनी रहती है। बिना इनकों दूर किये हम रोगों से नहीं बच सकते। अतः हम सभी को यह जानना आवश्यक है कि कैसे पता करे कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?
आखिर स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
चरक महर्षि आदि ने तो पानी से सम्बंधित बहुत सी बाते बताई है। लेकिन वाग्भट्ट जी ने पानी के सेवन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया है –
ऋते शरन्निदाघाभ्यां पिबेत्स्वस्थोSपि चाल्पशः || अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय – 06/41 ||
एक वर्ष में कुल छः ऋतुए होती है। हम भारतीय भाग्यशाली है कि भारत में यह सभी ऋतुए आती है। आयुर्वेद के अनुसार ऋतुए भी दोषों में विषमता लाती है। जिससे बचने के लिए ऋतु के अनुसार खानपान में बदलाव आवश्यक हो जाता है।
इसलिए जब बात पानी की आती है। तब भी हमें दोषों में साम्यता बनाए रखने के लिए ऋतुनुकूल पानी पीने की आवश्यकता पड़ती है। जिसके लिए हमें जानने की आवश्यकता कि किस ऋतु में कितना पानी पीना चाहिए?
स्वस्थ व्यक्ति को शरद ( ऑटम ) और ग्रीष्म ( गर्मियों ) ऋतु में पानी सम मात्रा में पीना चाहिए। जबकि अन्य चार ऋतुओं में स्वस्थ व्यक्ति को भी अल्प मात्रा में पानी पीना चाहिए। जिसको न जानने वालों को यह जानना आवश्यक है कि स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
वजन के हिसाब से पानी कितना पीना चाहिए?

आजकल यह खा जाता है कि पानी का सेवन वजन के अनुसार करना चाहिए। जबकि आयुर्वेद में ऐसा को नियम या विधान नहीं बताया गया है। किन्तु स्वस्थ रहने के लिए पता होना आवश्यक है कि आपको प्रतिदिन कितना पानी पीना चाहिए?
स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए, यह जानना हम सभी के हित में है। किन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते कि सैद्धांतिक रूप से हमें कितने जल की आवश्यकता होती है?
जितना पानी पीने से गला तर हो जाए, प्यास बुझ जाए और शरीरगत दोषों में समता बनी रहे। हमें केवल उतना ही जल पीने का अधिकार शास्त्रों ने दिया है। किन्तु लोग नहीं जानते कि स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
12 घंटे में कितना पानी पीना चाहिए?

12 घंटे हो या दिन भर, जितने जल से प्यास बुझ जाए और गला तर हो जाए। केवल उतना ही जल सेवन करने पर, हम स्वस्थ रह सकते है। वास्तव में इतना जल पीने से हमारा शरीर हाइड्रेटेड रहता है।
फिर मौसम या ऋतुओं में बदलाव होने पर, शरीरगत दोषों में परिवर्तन होना स्वाभाविक है। जिसके लिए अनुकूल मात्रा में पीना आवश्यक है। ताकि शरीर के अंदर पाए जाने वाले दोष, सम बने रहे और हम बीमारियों से बचे रहे।
फिर दिन और रात होने पर भी शरीर के दोषों में बदलाव होता है। जिससे दिन में रात से अधिक जल की आवश्यकता होती है। जिसका ध्यान न रखने पर रुग्णता आने के द्वार खुले रहते है। इस कारण हम सभी को जानना चाहिए कि स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
निष्कर्ष :
महर्षि वाग्भट्ट के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति को ग्रीष्म और शरद ऋतु में पानी सम मात्रा में पीना चाहिए। जबकि हेमंत, शिशिर, वसंत और वर्षा ऋतु में पानी स्वस्थ व्यक्ति को भी अल्प मात्रा में पीना चाहिए। यह पानी पीने का चरम सिद्धांत है। जिसका अनुपालन करना हमारी बाध्यता है।
परन्तु शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए उचित मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। किन्तु जितने से प्यास बुझ जाए, गला तर हो जाए। केवल उतना ही जल हमारे लिए उपकारक है। असल में हम इतना ही जल पीने के अधिकारी भी है। इसलिए हम सभी को समझना आवश्यक है कि स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
उद्धरण :
- अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय – 06/41
FAQ
महिलाओं को दिन में कितना पानी पीना चाहिए?
महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन पानी इनको इतना ही पीना चाहिए। जितने से इनका शरीर हाइड्रेटेड रहे।
पुरुषों को दिन में कितना पानी पीना चाहिए?
पुरुषों को जितना पानी पीने से बिना किसी समस्या के, दिनभर में लगभग 750 मिली पेशाब हो। केवल उतना पानी पीना ही लाभकारी है।
बच्चों को दिन में कितना पानी पीना चाहिए?
बच्चों को दिन में केवल उतना ही पानी पीना चाहिए। जितने से प्यास बुझ जाए और गला तर रहे।
स्वस्थ रहने के लिए क्या करना चाहिए?
स्वस्थ रहने के लिए शास्त्रों द्वारा बताए गए विधि और निषेध का अनुपालन करना चाहिए।