कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है? | How to Tell if Our Body is Properly Hydrated?

पानी हम प्राणियों का प्राण है। जल पर ही हमारी सत्ता और उपयोगिता निर्भर है। मात्रा में प्रयुक्त करने से यह पानी अमृत है और अन्य रूप में विष के समान है। इसलिए पानी की उपयुक्त मात्रा हमें निरोगी और अनुपयुक्त मात्रा रोगी बनाती है। किन्तु इसमें कठिनाई यह है कि कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है

आयुर्वेद आदि में मात्रा से अधिक जल के सेवन का निषेध किया गया है। क्योकि यह जल न केवल हमें बीमार करने वाला है। बल्कि प्राणों को भी हरने वाली है। किन्तु आजकल पानी कैसे पीना चाहिए को लेकर अनेको प्रकार की गल्प ( कल्पनाए ) है। जिसकी चपेट में आकर हम पानी का मात्रा से अधिक प्रयोग, खाने – पीने के अलावा खेती बाड़ी आदि में भी करने लगे है।

किन्तु शास्त्रों के अनुसार पानी की मात्रा का आकलन करना, हम सभी के लिए अत्यावश्यक है। क्योकि शरीर के जल स्तर में कमी आने से, डिहाइड्रेसन ( निर्जलीकरण ) की समस्या हो जाया करती है। जबकि हमारे शरीर में पानी की मात्रा का अतिरेक ( अधिकता ) होने से, बीमारियों के जीर्ण होने का मार्ग प्रशस्त होने लगता है। इस कारण पानी का मात्रात्मक सेवन हम सभी के लिए नितांत आवश्यक है। किन्तु इसमें समस्या यह है कि कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

आखिर कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

पृथ्वी पर पानी हम जीवों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लेकिन कब, जब तक हम पानी को विधिपूर्वक और मात्रा में प्रयोग करते है। पर आजकल तो हम पानी शरीर को डीटॉक्स, कब्ज को मिटाने, वजन कम करने, शुगर को कम करने आदि के नाम पर करते है। लेकिन परिणाम के रूप में, यह सभी समस्याए घटने के बजाय। दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

जिससे बचने के लिए आजकल इलाज के रूप में, प्राप्त रोग का उपचार किया जाता है। जिसमे केवल बहुत प्रयास करने पर कुछ तात्कालिक लाभ ही प्राप्त हो पाता है, न कि स्थायी। क्योकि अभी भी रोग के कारण को नहीं हटाया गया। कारण के विद्यमान रहने पर कार्य की सिद्धी होना स्वाभाविक है। इसके लिए हमें यह समझने की आवश्यकता है कि पानी कब पीना चाहिए?

आजकल जितने भी रोग है। उन सब में पानी का सर्वाधिक योगदान है। फिर चाहे हम उस पर ध्यान दे या न दे। अधिक मात्रा में पानी का सेवन करने पर, शरीर पिए गए पानी पर अपनी प्रतिक्रया देगा ही। इसलिए हम सभी को समझना आवश्यक हो जाता है कि कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

कैसे पता करे कि गर्मियों में आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है?  

कैसे पता करे कि गर्मियों में आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है?  

ऋते शरन्निदाघाभ्यां पिबेत्स्वस्थोSपि चाल्पशः || अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय – 06/41 ||

आयुर्वेद के अनुसार केवल शरद और ग्रीष्म ऋतु में ही पानी सम मात्रा में पीना चाहिए। जबकि अन्य ऋतुओं में स्वस्थ व्यक्ति को भी पानी अल्प मात्रा में ही पीना चाहिए। लेकिन आजकल उल्टी गंगा बह रही है। बिना कारण लोग पानी पिए जा रहे। और बीमारियों को अनावश्यक गले लगा रहे है। 

शरद ऋतु वह समय होता है। जब उमश वाली गर्मी होती है। कहने का आशय दिन गर्म और राते ठंडी होती है। यह वर्षा ऋतु के बाद का समय होता है। जिसमे पित्त और कफ की समस्याए पनपती है। जिसके शमन के लिए खानपान का विशेष ध्यान रखना अत्यावश्यक है।

जबकि ग्रीष्म ऋतु वसंत ऋतु के बाद का समय होता है। जिसमे सूर्य का ताप अधिक होने से, हवा गर्म हो जाती है। पूरा वातावरण ताप अधिक होने से शुष्क हो जाता है। जिसमे स्वाभाविक रूप से पानी की आवश्यकता अधिक हो जाती है। 

लेकिन अभी भी सवाल यह खड़ा होता है कि यह कैसे पता लगाए कि हमारा शरीर हाइड्रेटेड है? अर्थात हमें पाना कितना पीना है? तो इसके आमतौर पर दो तरीके है –

  1. बिना किसी परेशानी के बिना ( अर्थात मूत्र में जलन आदि न हो ) कम से कम तीन बार खुलकर, पेशाब हो तो आपका शरीर पूरी तरह से हाइड्रेटेड है। कहने का आशय यदि आप को दिनभर में 750 एम एल पेशाब आ रहा है। तो आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है।
  2. पेशाब का रंग हल्का पीला ( पेल यलो ) हो तो आपका शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड है। 

कैसे पता करे कि वर्षा ऋतु ( बारिस ) में आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है?

वर्षा का समय गर्मियों के बाद आता है। जिसमे बादल घुमड़ – घुमड़ कर पानी बरसाते है। जिससे वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ जाती है। जिसके प्रभाव में आकर ज्यादातर वस्तुए सड़ने – गलने लगती है। जिसके कारण यह समय संक्रमण वाला कहा जाता है।

जिसके कारण इस समय पानी अधिक पीने पर, संक्रमण होने का ख़तरा सबसे अधिक होता है। इस कारण वर्षा ऋतु में आयुर्वेद में, स्वस्थ व्यक्ति को भी थोड़ी मात्रा में ही पानी पीने को कहा गया है। जिसके कारण इस समय भी सवाल खड़ा होता है कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

तो आमतौर पर इसके दो तरीके है –

  1. बिना किसी परेशानी के बिना ( अर्थात मूत्र में जलन आदि न हो ) कम से कम तीन बार खुलकर, पेशाब हो तो आपका शरीर पूरी तरह से हाइड्रेटेड है। कहने का आशय यदि आप को दिनभर में 750 एम एल पेशाब आ रहा है। तो आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है।
  2. पेशाब का रंग हल्का पीला ( पेल यलो ) हो तो आपका शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड है।

कैसे पता करे कि सर्दियों में आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है?

कैसे पता करे कि सर्दियों में आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है?

शेष रह गई तीन ऋतुए जिसमे से दो हेमंत ( प्री विंटर ) और शिशिर ( विंटर ) सर्दियों वाली है। जबकि बसंत ऋतु गर्मियों के ठीक पहले का समय है। जिसमे अधिकांशः सर्दियों जैसा ही माहौल होता है। लेकिन इस समय स्वस्थ रहने के लिए भी आवश्यकतानुकूल जल का सेवन उपयोगी है।

लेकिन ध्यान दे ठण्ड के दिनों में वातावरण पूरी तरह से ठंडा हो जाता है। जिसमे अक्सर प्यास नहीं लगती। फिर भी शरीर अपने आप को गर्म रखने के लिए, शरीर से अधिक मात्रा में जल पेशाब के माध्यम से बाहर निकालता है। वही इस समय आवश्यकता से अधिक जल का सेवन, बीमारियों को आमंत्रण देना है। इस कारण इस समय भी यही सवाल खड़ा होता है कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

तो आमतौर पर इसके दो तरीके है –

  1. बिना किसी परेशानी के दिनभर में कम से कम तीन बार खुलकर पेशाब आये तो आपके शरीर में पर्याप्त पानी है। कहने का आशय यदि आप को दिनभर में 750 एम एल पेशाब आ रहा है। तो आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है।
  2. पेशाब का रंग हल्का पीला ( पेल यलो ) हो तो आपके शरीर में पानी की कोई कमी नहीं है।

  इतना होने पर आपको अब पानी पीने की आवश्यकता नहीं रह जाती। लेकिन प्यास लगने पर पानी पीना चाहिए। जबकि आपको कुछ समय आपको प्यास लगे बिना पानी पीना चाहिए। जिसके लिए आपको जानना आवश्यक है कि किन 3 परिस्थितियों में बिना प्यास के भी पानी पीना जरूरी है?

निष्कर्ष :

आयुर्वेद के अनुसार साधारण सा दिखने वाला पानी, न केवल पानी है। बल्कि हम सब का प्राण है। जिसके बिना हम जी नहीं सकते। इसलिए पानी हम सब के लिए अमृत और विष दोनों है। लेकिन हम सब के लिए संकट यह होता है कि कैसे पता करें कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?

यदि हम सब पानी का मात्रात्मक और विधि पूर्वक प्रयोग करे तो हमारे लिए अमृत है। जबकि इसके अतिरिक्त जो भी पानी का उपभोग किया जाता है। सब का सब विष के समान है। इसलिए हम सभी को पानी का उपयोग औषधि के समान ही करना चाहिए। न कि मनमामे ढंग से। 

उद्धरण :

  • अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय – 06
  • भावप्रकाश निघण्टु दिनचर्यादि प्रकरण 

FAQ

किस ऋतु में आपको कितना पानी पीना चाहिए?

आयुर्वेद के अनुसार शरद और ग्रीषम ऋतु में सम मात्रा में पानी पीना चाहिए। बाकी की शेष चार ऋतुओं में पानी अल्प मात्रा में ही पीना चाहिए। 

क्या सभी ऋतुओं में गरम पानी पीना सही है?

बहुत ठण्ड होने पर गुनगुना पानी पीना चाहिए। जबकि अन्य ऋतुओं में पानी को गर्म करके ठंडा होने पर ही प्रयोग करना चाहिए। यदि गर्मियां अधिक है तो उबले हुए पानी को ठंडा करके, घड़े में रखकर ठंडा कर पीना उपयुक्त है।  

गर्मियों में एक दिन में कितना पानी पीना चाहिए?

किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को उतने ही पानी की आवश्यकता होती हैं। जितने में उसका शरीर हाइड्रेट रहे। इसके लिए यदि आपको 24 घंटे में तीन बात खुलकर पेशाब आता है। तब आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है। 

गर्मी के दिनों में कितना पानी पीना चाहिए?

गर्मियों के दिनों में भी आपको उतना ही पानी पीना चाहिए। जितने से आपको दिन भर में लगभग 750 एम एल पेशाब आये। 

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