शुगर में शराब पी सकते है या नहीं | sugar me sharab pi sakte hai ya nahi

शराब फलों, अन्नों के रस का किण्डवन एवं आसवित करके बनाया जाता है। जिसमे मुख्य रूप से एल्कोहल पाया जाता है। जोकि एक तरह का नशीला द्रव है। जिसमे कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति से शर्करा पायी जाती है। किन्तु शुगर में रक्त शर्करा स्वाभाविक रूप से बढ़ी हुई होती है। किन्तु शुगर में मीठा खाना अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए सवाल यह उठता है कि शुगर में शराब पी सकते है या नहीं।

शुगर में शराब पी सकते है या नहीं

आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह भी एक प्रकार का प्रमेह है। जिसमे मूत्र और मेद की वृद्धि देखी जाती है। किन्तु कुछ डायबिटीज के रोगियों में मूत्र में वृद्धि के साथ, कमजोरी के कारण दुर्बलता भी देखी जाती है। किन्तु दोनों ही तरह की समस्याओं के निदान में मदिरापान का सेवन उपयोगी माना गया है। ठीक वैसे ही जैसे मधु को माना गया है। 

लेकिन शराबी प्रायः अपना समय अंग्रेजी शराब की दुकान पर ही बिताते है। फिर चाहे वह मधुमेह से पीड़ित हो या न हो। किन्तु मधुमेह से पीड़ित लोगों को यह जानना आवश्यक है कि शुगर में शराब पी सकते है या नहीं। ठीक उसी तरह जैसे शुगर में शहद खाना चाहिए कि नहीं। 

शुगर में शराब पी सकते हैं क्या

आजकल अधिकांश शुगर के रोगी खानपान में संयम न रख पाने वाले है। जिन्हे चरक चिकित्सा में कफज प्रमेह का नाम दिया गया है। जो देखने में हट्टे – कट्टे और बलशाली होते है। जिन्हे अक्सर अभिष्यंदी खानपान रुचिकर लगता है। फिर स्वाद को बढ़ाने के लिए लोग अनायाश ही दारू का इस्तेमाल करते है।

जिससे दिन ब दिन शुगर के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जिसके लिए कुछ लोग शराब छुड़ाने का तरीका खोजते है। लेकिन फिर भी शुगर कम होने का नाम ही नहीं लेती। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर में शराब पी सकते है या नहीं।

लेकिन जो लोग स्वास्थ्य के प्रति सजग है। उन्हें शराब पसंद होने पर भी शराब के सेवन से बचते है। किन्तु जिन लोगों को शराब की लत लग जाती है। वो शराब की दुकान पर शराब की बोतल को ही देखते रहते है। फिर चाहे उनका स्वास्थ्य ठीक रहे या न रहे। 

शुगर में शराब पी सकते हैं कि नहीं

शुगर में शराब पी सकते हैं कि नहीं

प्रायः प्रमेह रोगियों के शरीर अभिष्यंदी होने से अग्निमंद रहती है। इससे भक्ष्य, चोष्य, लेहा, पेय आदि पांच प्रकार का अन्न खाने पर भी मूत्र और मेद अधिक बनते है। इसलिए प्रमेह रोगी की अग्नि वृद्धि के लिए और क्लेद एवं मेद को कम करने के लिए बलवान पुरुष को संशोधन देना चाहिए।

दुर्बल व्यक्ति को संशमन चिकित्सा करनी चाहिए। दोनों प्रकार के बलवान और दुर्बल व्यक्तियों को मूत्र कम करने वाले, मेद न बढ़ाने वाले, वृहण – पुष्टि न करने वाले, अग्नि को बढ़ाने वाले, बल को बढ़ाने वाले खान – पान देने चाहिए। जिसमे सीधू अत्यंत उपयोगी है। इस प्रकार विधि पूर्वक क्रमशः बढ़ता हुआ बल सम्पूर्ण रोग का क्षय करने में समर्थ होता है।

लेकिन आजकल बाजार में सीधू नहीं मिलती। लेकिन शराब आसानी से मिल जाती है। जोकि सीधू का परिष्कृत रूप है। जिससे शुगर रोगियों में संशय बना रहता है कि शुगर में शराब पी सकते है या नहीं।

शुगर में शराब पी सकते हैं या नहीं

पके हुए मीठे फलों के रस को किण्डवनीकरण के पश्चात छानने पर, जो द्रव प्राप्त होता है। उसे ही आयुर्वेद में सीधू कहा जाता है। जिसका सेवन आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह में उपकारी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि शुगर में शराब पी सकते है या नहीं।

जबकि शराब को बनाने के लिए जौ, मक्का जैसे अन्नों को पानी के साथ मिलाकर एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है। जिससे अनाज में पाया जाने वाला स्टार्च घुलनशील शर्करा में बदल जाता है। जबकि फलों के मामले में उन्हें कुचल कर उनका रस निकाला जाता है। जिसे आसवित करके जो द्रव प्राप्त होता है। उसे ही शराब कहा जाता है।  

हालांकि शराब में एल्कोहल की मात्रा के आधार पर, इनके नामों में भेद हो जाता है। जिन्हे हम रम, ब्रांडी, व्हिस्की दारू, देसी दारू आदि के नाम से जानते है। सीमित मात्रा में डायबिटीज में शराब पीना लाभकारी है, न कि अनुपयुक्त मात्रा में शराब का सेवन करना। 

शुगर के मरीज शराब पी सकते हैं या नहीं

शुगर के मरीज शराब पी सकते हैं या नहीं

आयुर्वेद में सीधू के सेवन को हितकारी माना गया है, न कि शराब को। लेकिन सीधू और शराब को बनाने की विधि की प्रक्रिया में भेद है। जिससे डायबिटीज में शराब का सेवन उतना हितकारी नहीं है, जितना कि सीधू। शायद इसलिए ही शुगर रोगियों के मन में संशय बना रहता है कि शुगर में शराब पी सकते है या नहीं।

यदि शुगर में शराब पीना ही पड़े तो उन्हें निम्न बातों का ख्याल रखना आवश्यक है –

कम मात्रा में पिए : शुगर में शराब का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करे। इतना सीमित कि शराब पीने के बाद नशा न हो। क्योकि ऐसा होने पर ब्लड शुगर के कम होने और शुगर के लक्षणों ( लड़खड़ाना, नींद आना आदि ) में भेद कर पाना मुश्किल होता है। 

खाली पेट न पिए : खाली पेट शराब पीने से ब्लड शुगर अचानक से कम होने का खतरा होता है।  

उपयुक्त शराब का सेवन करे : जैसे रम, बियर और विस्की दारू आदि में एल्कोहल की मात्रा अलग – अलग होती है।  

इन्सुलिन और शुगर की दवाइयों के साथ शराब का सेवन न करे : इन्सुलिन और शुगर की दवाइयों के साथ शराब का सेवन करने पर हाइपोग्लाइसेमिया का ख़तरा बना रहता है। 

निष्कर्ष :

आयुर्वेद के अनुसार शुगर में दारू (शराब) से अधिक उपकारी सीधू को माना गया है। लेकिन आमतौर पर सीधू की उपलब्धता शराब की तुलना में बहुत कम है। परन्तु आयुर्वेद आदि में सीधू के स्थान पर, आरिष्ट और आसव आदि का प्रयोग भी बतलाया गया है। जोकि शुगर के निवारण में अत्यंत गुणकारी है।  

लेकिन शराब आसवित होने के कारण एल्कोहल की सांद्रता अधिक होती है। जिससे शराब भी मधुमेह के लिए लाभकारी है। लेकिन बहुत ही सावधानी के साथ और सीमित मात्रा में। क्योकि अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने पर, हाइपोग्लाइसेमिया होने का ख़तरा होता है। जिसमे मुख्य रूप से ब्लड शुगर अचानक से कम या अधिक हो जाता है। 

उद्धरण :

  • चरक संहिता चिकित्सा अध्याय – 06
  • सुश्रुत संहिता चिकित्सा अध्याय – 11 
  • अष्टांगहृदयम चिकित्सा अध्याय  – 12
  • अष्टांगसंग्रह चिकित्सा अध्याय – 14
  • भावप्रकाश निघण्टु 
  • भैषज्यरत्नावली चिकित्सा प्रकरण – 37

FAQ

शुगर में शराब कितनी पीनी चाहिए? 

शुगर के रोगियों को शराब इतनी पीनी चाहिए कि उनको शराब का नशा न चढ़े।  

मधुमेह रोगी शराब का नशा कर सकते है?

नहीं, मधुमेह रोगियों को नशा करना हानिकारक हो सकता है।

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