आमतौर पर लोगों का मानना है कि शरीर में पानी की कमी होना हानिकारक है। जबकि आयुर्वेद आदि के अनुसार अधिक मात्रा में पानी पीना भी जानलेवा है। इसलिए हमें पानी तभी पानी पीना चाहिए। जब हमारे शरीर को पानी की आवश्यकता हो। इस कारण से यह जानना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हाइड्रेट रखना जरूरी है। फिर आजकल तो लोग बीमारी भगाने के नाम पर अधिक पानी पीने लगे है। जिससे अक्सर ये लोग अधिक मात्रा में पानी पी लेते है। जिससे बचने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि पानी कब पीना चाहिए?
इसमें कोई दो राय नहीं कि पानी पीना हम जीवों के लिए अत्यंत आवश्यक है। किन्तु उतना ही आवश्यक है जितना कि हमारे शरीर को चाहिए। इसलिए आयुर्वेद में हमेशा उपयुक्त मात्रा में पानी पीने के लिए कहा गया है। लेकिन आजकल पानी को लेकर तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। जैसे, एक दिन में कितना लीटर पानी पीना चाहिए, आदि।
शरीर में पानी की कमी क्यों होती है?
हमारे शरीर को पानी की आवश्यकता ऊतकों और कोशिकाओं को उज्जीवित रखने में पड़ती है। क्योंकि इनका अधिकतम भाग पानी ही होता है। अक्सर इन कोशिकाओं में पानी की आवश्यकता पड़ते ही हमें प्यास लग जाती है। जिसका आभाष हमें मुँह सूखने आदि से होता है।
फिर विटामिन बी और सी का अवशोषण जल के अभाव में नहीं हो सकता। जिसके लिए शरीर में पर्याप्त पानी का होना अनिवार्य है। जिसके अभाव में शरीर के पोषण में कमी आना स्वाभाविक है। जिससे बचने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
आजकल हम सबके बीच एक मिथक फैल चुका है। खूब पानी पियों और बीमारियों से दूर रहों। किन्तु चिकित्सा ग्रंथों में तो पानी का उपयोग भी औषधि के समान करने को कहा गया है। जिसमे सबसे महत्वपूर्ण बात आती है कि पानी पीने की विधि आदि है। जिससे हमे समझना आवश्यक है कि पानी कैसे पीना चाहिए?
डिहाइड्रेशन के लक्षण और उपाय

आमतौर पर शरीर में पानी की होने को ही डिहाइड्रेशन कहा जाता है। जिसमे आमतौर पर शरीर की कोशिकाओं में पानी की मात्रा घट जाती है। फिर चाहे वह आघात लगने से हो अथवा कोई बीमारी होने पर हो। हालाकिं डिहाइड्रेशन अधिक होने पर मौत की संभावना पाई जाती है।
डिहाइड्रेशन अक्सर तब देखा जाता है। जब गंभीर दस्त आदि की समस्या शरीर में आ जाती है। फिर चाहे वह किसी भी कारण से आयी हो। ऐसे में हमें यह समझना आवश्यक है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
डिहाइड्रेशन के आम लक्षण
आमतौर पर डिहाइड्रेशन की पहचान, डिहाइड्रेशन में पाए जाने वाले लक्षणों से की जाती है। जिसमे सामान्य रूप से निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल सकते है –
- मुँह सूखना
- बार – बार प्यास लगना
- शरीर में दर्द होना
- अंगों का शिथिल पड़ने लगना
- पेशाब कम आना या गहरे पीले रंग का पेशाब आना
- थकान और कमजोरी होना
- चक्कर आना, आदि।
गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षण
- बहुत गहरे रंग का पेशाब आना
- त्वचा का बहुत शुष्क हो जाना
- आँखों का धस जाना
- बेहोशी होना
- सांसो का तेज चलना
- चक्कर आना
- नींद बहुत आना
- बहुत कमजोरी और थकान होना
हाइड्रेटेड रहने का महत्व
शरीर में पर्याप्त पानी होने से शरीर की आंतरिक और बाह्य क्रियाए सुगमता पूर्वक होती है। जिससे न केवल हमारा शरीर मजबूत बनता है। बल्कि हमारी बौद्धिक क्षमता का भी विकास होता है। इसलिए हम सभी को यह समझना आवश्यक है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
मानव शरीर का दो तिहाई हिस्सा पानी है। जिसमे हमारे शरीर की अधिकांश कोशिकाए डूबी रहती है। जिसके कारण वो सुचारु रूप से अपना काम कर पाती है। जब इन कोशिकाओं में पानी थोड़ी भी पानी की कमी पड़ती है। तब हमें प्यास महसूस होने लगती है।
इसलिए हमें स्वस्थ और निरोगी बने रहने के लिए उपयुक्त मात्रा में पानी की आवश्यकता पड़ती है। न कि मात्रा से अधिक।
डिहाइड्रेशन के लिए आसान घरेलू टेस्ट
हममें से ज्यादातर लोगो को यह नहीं पता होता कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं? जिसका सबसे बड़ा कारण न हो हमें कही पढ़ाया जाता है और न कही बताया जाता है। आखिर यह बात तो हम सभी को प्राथमिक स्तर पर पता होनी चाहिए। लेकिन अक्सर इन नियमो से हमारा कोई ताल्लुक नहीं होता।
जबकि आयुर्वेद आदि में तो शरीर में पानी की कमी को पहचानने के लक्षण बताये गए है। जिससे आजकल हमारा कोई परिचय नहीं है। फिर व्यवहार में आना तो दूर की बात है। किन्तु पानी की कमी को हम बड़ी ही आसानी से जान सकते है।
जिसके लिए हमें घरेलू टेस्ट करने की आवश्यक है। वह यह कि यदि कोई वयस्क व्यक्ति एक दिन में तीन या चार बार में, 750 एम एल के लगभग पेशाब का उत्सर्जन करता है। तो उसके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा है। लेकिन हम इन पर ध्यान न देकर इसी फेर में फसे रहते है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
हाइड्रेशन का पता लगाने में पेशाब के रंग की भूमिका

हाइड्रेशन का पता लगाने में पेशाब के रंग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अक्सर गाढ़ा पीले रंग का पेशाब पानी की कमी को बताता है। जबकि सफ़ेद रंग का होने वाला पेशाब, शरीर में पानी की अधिकता का परिचायक है। जबकि हल्के पीले ( पेल यलो ) रंग का पेशाब हाइड्रेशन को बताता है। जिसको न जानने वाले लोग यह कहते सुने जाते है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
प्यास के स्तर पर नज़र रखना: एक मुख्य संकेत
आमतौर पर हम पानी तभी पीते है। जब हमें प्यास लगती है। इसलिए शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी पीना आवश्यक है। लेकिन इसके लिए यह भी समझना आवश्यक है कि कितनी प्यास लगने पर पानी पीना है और कब प्यास नहीं लगने पर भी पानी पीना है। जबकि हम शरीर में पानी की कमी के लक्षण पर ध्यान ही नहीं देते।
पानी पीने का सामान्य नियम है। प्यास लगने पर पानी पीना। लेकिन आयुर्वेद में कुछ परिस्थितियों में बिना प्यास लगे भी पानी पीना आवश्यक बताया गया है। इसलिए हमें जानना आवश्यक है कि किन 3 परिस्थितियों में बिना प्यास के भी पानी पीना जरूरी है?
किन्तु अक्सर हम पानी पीने को लेकर गलती कर बैठते हैं। और बीमारियों के चपेट में पड़कर परेशान होते रहते है। किन्तु पानी पीने की आदत में बदलाव नहीं लाते। क्योंकि अक्सर आजकल की चिकित्सा विधा में इस पर कोई ध्यान ही नहीं दिया जाता। न हमें यह बताया जाता है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
हाइड्रेशन की जाँच के लिए ‘स्किन टरगर’ (त्वचा के लचीलेपन) का इस्तेमाल कैसे करें
शरीर में हाइड्रेशन को जांचने के लिए, हथेली के ऊपर की त्वचा को खींचकर छोड़े। यदि वह तुरंत ही ठीक हो जाती है तो आपके शरीर में पानी पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन यदि धीरे – धीरे सिकुड़ती है तो आपके शरीर में पानी के कमी है। लेकिन जो लोग इन बातों को नहीं जानते वो इसी चक्कर में फसे रहते है कि शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
हाइड्रेशन पर मौसम और गतिविधि का असर
हमारे शरीर के हाइड्रेशन पर मौसम और गतिविधि का पूरा – पूरा प्रभाव होता है। आयुर्वेद में भी ग्रीष्म और शरद ऋतु में पानी सैम मात्रा में पीने को कहा गया है। जबकि अन्य ऋतुओं में पानी न्यून मात्रा में पीने की बात बतलाई गई है।
ऋते शरन्निदाघाभ्यां पिबेत्स्वस्थोSपि चाल्पशः || अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय – 06/41 ||
वही जो मेहनतकश लोगो की गतिविधि ज्यादा होती है। जिनके कारण इन्हे अधिक प्यास लगती है। जबकि जो लोग आराम से बैठकर काम करते है। उन लोगों को कम प्यास लगती है। जिससे अक्सर लोगों को भ्रम हो जाता है कि कैसे पता करे कि हमारे शरीर में पानी की मात्रा सही है?
सही हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए टिप्स
शरीर में पानी की कमी का कैसे पता लगाएं?
निष्कर्ष :
अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर में आनुपातिक मात्रा में जल का रहना जरूरी है। न कि पानी की अधिक मात्रा का सेवन करना। लेकिन अफ़सोस है कि हममे से अधिक लोग पानी की अधिक मात्रा का ही सेवन कर रहे हैं। जिसके कारण बहुत ही कम उम्र में रोगों की चपेट में आकर अपनी आयु को कम कर रहे है।
मात्रा में पिया गया जो जल हमारे लिए अमृत तुल्य है। वही जल मात्रा से अधिक उपयोग करने पर विष के समान है। इसलिए आजीवन निरोगी बने रहने के लिए आवश्यकता से अधिक पानी पीना ठीक नहीं। अब यह अलग सवाल है कि हम लोगों को यह जानकारी नहीं है। अथवा हम तक यह जानकारियां आने नहीं दी जाती।
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जल का सेवन औषधि के समान ही करना उपयुक्त है। ठीक उसी प्रकार करना चाहिए। जैसे औषधि की जाती है।
उद्धरण :
- अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय – 06
- भावप्रकाश निघण्टु दिनचर्यादि प्रकरण
FAQ
दिन भर में कितना लीटर पानी पीना चाहिए?
दिन भर में हमे उतना ही पानी पीना चाहिए। जितनी हमारे शरीर को पानी की आवश्यकता हो। जिसको आजकल की भाषा में हाइड्रेट रहना कहा जाता है।