हम जीवों के जीवन का मूल आधार ही भोजन और पानी है। भोजन के पाचन की प्रक्रिया उपयुक्त पानी के अभाव में पूर्ण नहीं होती। पर जब तक हम सही समय एवं विधि से, भोजन के साथ और बाद पानी को पीते रहते है। तब तक हमारे शरीर में पाचन सुचारु रूप से होता रहता है। किन्तु बहुत से लोग इन बातों को नही जानते। जिससे वे असमंजस में रहते है कि खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं।

पानी हम प्राणियों का प्राण है। इसलिए पूर्ण निषेध करने पर भी पानी का निषेध नहीं लिया जाता। फिर भी आयुर्वेद आदि में इसका मात्रा से अधिक उपयोग वर्जित किया गया है। फिर चाहे हम इसका उपयोग खाना बनाने में करें या खाने में। इसलिए हमें यह जानना आवश्यक है कि खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं।
लेकिन यहाँ हम आयुर्वेद के दिनचर्या में वर्णित, खाने के बीच में पानी के पीने की बात करेंगे। ताकि हम आयुर्वेद शास्त्र के आधार पर जान सके कि हमें पानी कब पीना चाहिए और कब नहीं? ताकि पानी का कोई विपरीत प्रभाव, हमारे स्वास्थ्य पर न पड़े। जिससे हम अपनी पूर्ण आयु प्राप्त कर सके। किन्तु पूर्ण आयु की प्राप्ति के लिए यह जानना भी नितांत आवश्यक है कि स्वस्थ रहने के लिए कितना पानी पीना चाहिए?
क्या खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं
हमारा आयुर्वेद चिकित्सा और जीवनशैली के चरम सिद्धांतों का ख्यापक है। क्योकि लोक और परलोक के चरम सिद्धांतों के साक्षात प्रतिपादक भगवान् वेद है। फिर आयुर्वेद भी अर्थववेद का ही उपवेद है। तभी तो आयुर्वेद में वेद शब्द की अनुगति है। असल में आयुर्वेद हमारी आयु का रक्षण दो प्रकार से करता है –
- रोगो से बचाव करके
- और प्राप्त रोगों का उपचार करके
रोगों से बचाव करने में ऋतु-अनुकूल दिनचर्या और खान-पान, पर विशेष रूप से बल दिया गया है। जिसके कारण इन सिद्धांतों की उपयोगिता हर देश में, हर काल में, हर परिस्थिति में हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है। इसलिए हम सभी को जानने की आवश्यकता है कि खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं।
आमतौर पर हम अपने खानपान में भोजन से भी अधिक पानी का उपयोग करते हैं। फिर आयुर्वेद में जल और पृथ्वी तत्व में विकृति होने पर कफ रोगों का जनन होता है। जिससे हमें भोजन से कुछ अधिक ध्यान पानी के उपयोग पर रखना आवश्यक है। ताकि हम बीमारियों से बचकर, स्वस्थ बने रहें।
क्या खाने के बीच में पानी पीना चाहिए?

आयुर्वेद में आयु की रक्षा के लिए रोगों से बचाव की बात बताई गई है। जिसमे खान पान और दिनचर्या का विधिवत विधान किया गया है। जिससे हमारे शरीर में दोषों की विषमता न आने पाए। जिसमे पानी का सही समय और विधि से उपयोग शामिल है।
महर्षि वाग्भट्ट खाना खाने के बीच पानी पीने को लेकर कहते है कि –
भक्तस्यादौ जलं पीतमग्निसादं कृशांताम ||वाग्भट्ट सूत्र अध्याय 6/41||
अन्ते करोति स्थूलत्व मूर्ध्व चामा शयातकफम
मध्ये मध्या मध्यान्ग्ताम साम्यं धातूनां जरणम सुखम ||अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय 6/42||
आहार के बीच जल पीने से हमें तीन लाभ मिलते है – पीया गया जल
- अंगों में समानता ( न अधिकता और न न्यूनता ) लाता है।
- धातुओं में समता ( अन्यून और अनितरिक्त से रहित ) लाता है।
- अन्न को सुगमता से पचाता है।
किसी को भी स्वस्थ बने रहने के लिए इन गुणों की आवश्यकता होती ही है। जिन्हे हम केवल पानी को सही ढंग से पीकर प्राप्त कर सकते है। और बिना पैसा खर्च किये अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते है। लेकिन आजकल उल्टी गंगा बाह रही है। लोग पैसा और समय खर्च करके भी स्वास्थ्य की कल्पना नहीं कर सकते। इसलिए आज हम सभी को जानना अनिवार्य हो गया है कि खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं।
खाने के बीच में पानी पीने से क्या होता है?

आयुर्वेद के आचार्य भावप्रकाश अपने दिनचर्या प्रकरण में, आहार के बीच में पिए गए जल की महिमा करते हुए कह रहे है कि –
भुक्तस्यादौ जलं पीतं काशर्यमंदाग्निदोषकृत |
मध्येSग्निदीपनं श्रेष्ठमंते स्थौल्य कफप्रदम ||भाव प्रकाश सूत्र अध्याय 5 दिनचर्या प्रकरण सूत्र 158||
भोजन के मध्य में जल पीने से अग्नि का दीपन होता है। अग्नि की प्रबलता ही हम सभी के स्वास्थ्य की कुंजी है। इसलिए खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं का विचार किये बिना ही पानी पीना चाहिए।
किन्तु खाना खाते समय पानी की अतिरिक्त मात्रा के सेवन से बचना चाहिए। वही अन्न के मध्य में पानी पीने की विधि भी ठीक होनी चाहिए। जब जाकर हम खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं का, विचार किये बिना पानी पी सकते है। अन्यथा नहीं।
खाना खाते समय पानी पीना चाहिए कि नहीं
फिर आयुर्वेद के आचार्यों का समर्थन करते हुए, चाणक्य कह रहे है कि –
अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम |
भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम ||चाणक्य नीति अध्याय 8/7||
भोजन के बीच में पिया गया पानी अमृत के समान है। फिर अब खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं का संशय कहा रह जाता है? अस्तु हमें आहार के बीच में जल को अवश्य पीना चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी जानना चाहिए कि भोजन के बीच में थोडा–थोड़ा पानी पीना आवश्यक क्यों है?
खाना खाते समय पानी पीने का सही तरीका
उपरोक्त शास्त्र वचनों के अनुसार खाना खाते समय पानी पी सकते हैं। लेकिन अन्न के बीच में पानी पीने की विधि भी सही होनी चाहिए। नहीं तो हमें लाभ के स्थान पर हानि भी देखने को मिल सकती है।
तस्मान्नरो वह्रिविवर्धनाय मुहुर्मुहुर्वारि पीवेदभूरि || भावप्रकाश दिनचर्या प्रकरण श्लोक 157||
भोजन के बीच में बारम्बार थोड़ा थोड़ा जल अवश्य पीना चाहिए। कहने का आशय हर दो कवर ( बाईट ) के बाद एक सिप पानी पीना लाभकारी है। जिससे जीर्ण अन्न को पचने में सुगमता हो। लेकिन अक्सर लोग केवल खाना खाते समय पानी पीना चाहिए या नहीं को लेकर ही चिंचित रहते है।
निष्कर्ष :
आयुर्वेद के आचार्यों ने आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व, आहार के बीच में पानी पीना अमृत के सामान बताया है। किन्तु भोजन के बीच में पानी की उपयुक्त मात्रा और विधि सही होनी आवश्यक है। जिसके लिए बारंबार थोड़ा – थोड़ा जल जितनी प्यास हो केवल उतना ही पीना चाहिए। तब जाकर हम जान सकते है कि खाना खाते समय बीच में पानी पीना चाहिए या नहीं।
परन्तु आजकल के कथाकथित लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि खाना खाते समय पानी नहीं पीना चाहिए। यह पूर्णतया शास्त्र विरुद्ध बात है। खाना खाते समय पानी पीने के नुकसान नहीं, बल्कि खाने के बीच में पानी पीना अमृत है।
उद्धरण :
- अष्टांग संग्रह सूत्र अध्याय 6/42
- भाव प्रकाश सूत्र अध्याय 5 दिनचर्या प्रकरण सूत्र 158
FAQ
खाना खाने के बीच में पानी पीना चाहिए कि नहीं
भोजन के बीच में पिया गया जल अंगों में समानता और धातुओं में समता लाता है। जिससे भोजन अच्छी तरह पचता है। इसलिए खाना खाने के बीच में हर किसी को पानी अवश्य पीना चाहिए।
खाना खाते समय पानी पीना सही या गलत
शास्त्र हजारों सालों से परीक्षित और प्रयुक्त है। इसलिए शास्त्र सम्मत होने से सही है।
खाना खाते समय गर्म पानी पी सकते है?
पानी को गर्म करने से उसकी तासीर नहीं बदलती। इसलिए खाना खाते समय गर्म, गुनगुना और ठंडा पानी पिया जा सकता है। बस ध्यान यह रखना होता है कि तीखी चीजे खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। जो आमतौर पर बच्चे करते है। जैसे जंक और फ़ास्ट फ़ूड खाने के तुरंत बाद लोग पानी पीना पसंद करते है। जो ठीक नहीं।
