बवासीर के घरेलू उपाय और नुस्खे : Home Remedies For Piles In Hindi

गुदा की सिराओ के अग्रभाग में रक्तसंचय होकर फूलने को ही बवासीर कहते है। जिसमे गुदा के अंदर या बाहर किसी एक जगह गाँठ जैसी बन जाती है। जिसको बवासीर के मस्से कहते है। जिससे रोगी को उठने – बैठने जैसी बहुत सी गतिविधियों में समस्याओ का सामना करना पड़ता है। जिनको उपचारित करने में बवासीर के घरेलू उपाय अत्यंत प्रभावी है। जो एक प्रकार से बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज का ही अंश है। जिसमें नींबू से बवासीर का इलाज और दही से बवासीर का इलाज के साथ पेशाब से बवासीर का इलाज आदि अत्यधिक प्रचलित है। जिनको बवासीर का खुद इलाज करने के तरीके भी कहते है।

बवासीर के घरेलू उपाय

भारत के गाँवों में आज भी हमारे दादा – दादी बवासीर के मस्से का इलाज घरेलू नुस्खों से करते है। जिनको यह स्वास्थ्य का खजाना मानते है। आपने दादी मां अथवा दादी अम्मा के घरेलू नुस्खों वाली बात तो आप सब ने सुनी ही होगी, और जरुरत के हिसाब से कभी न कभी आजमाई भी होगी।  जिनको हर समस्या का कुछ न कुछ घरेलू उपाय पता ही होता था। जिनसे यह नवजात शिशुओ से लेकर वृद्ध व्यक्तियों की समस्याओ को चुटकी में सुलझा लेती थी। जो इतने कारगार होते थे कि बवासीर का इलाज घर बैठे कर देते थे। 

जिनके कारण ज्यादातर रोगो का उपचार सबसे पहले घरेलू उपायों से ही किया जाता है। जो आयुर्वेद आधारित होने से बहुत हद तक कारगार भी है। आयुर्वेद में बवासीर के पहले की अवस्था दस्त और पेचिस मानी गयी है। इसके पहले की अवस्था पेट में गैस बनना, पेट साफ़ न होने से कब्ज होना आदि को माना गया है। जिसको दूर करने में घरेलू उपाय बहुत ही कारगार है।

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बवासीर मीनिंग इन हिंदी ( bawaseer meaning in hindi )

आधुनिक चिकित्सीय प्रणाली में बवासीर को हेमोरोइड्स (hemorrhoids) कहा जाता है। जिसे संस्कृत में अर्श के नाम से जाना जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इनको मल उत्सर्जक अंगो में होने वाला रोग कहा गया है। जिसका तात्पर्य अंग विशेष की शिराओ में होने वाली मांस वृद्धि या अंकुर है। इसलिए बवासीर का पर्यायवाची अधिमांस है। इनको ही आमतौर पर बवासीर के मस्सो के नाम से जाना जाता है। जिनका उपचार बवासीर के घरेलू उपाय से भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है। 

सरल भाषा में बवासीर का मतलब ( bavasir means ) बवासीर में होने वाले मस्सो को समझा जाता है। जो शिराओ की नालियों में खून के जमने के कारण बनती है। जिसमे से कुछ में दर्द तो बहुत होता पर रक्त नहीं निकलता। जिसे बादी बवासीर के लक्षण कहा जाता है। जबकि कुछ में दर्द के साथ खून भी गिरता है। किन्तु कुछ लोगो को बिना दर्द के ही बवासीर के मस्सों से खून निकलता है। जिसको खूनी बवासीर का लक्षण कहते है। जिनको आसानी से बवासीर का इलाज घरेलू द्वारा खत्म किया जा सकता है।

बवासीर कैसे होती है ( piles causes in hindi )

बवासीर होने से मलत्याग करने में कठिनाई जैसी तमाम समस्याए होती है। जिनको बवासीर के लक्षण कहा जाता है। जिसके होने में निम्न कारण हो सकते है –  

  • पचने में भारी, रिफाइंड और दूषित खाद्य पदार्थो को खाने से
  • तीखे, चटपटे और मसालेदार वस्तुओ का खाने में अधिक प्रयोग करने से 
  • पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन न करने से
  • मादक पदार्थो का सेवन करने से 
  • अत्यधिक चिंता करने से
  • समय पर भोजन, आहार, नींद और परिश्रम न करने से
  • विरुद्ध और विपरीत भोज्य पदार्थो का सेवन करने से
  • दिन में सोने और रात को जगने से
  • भोजन में पर्याप्त मात्रा में उपयुक्त स्नेह ( घी, तेल आदि ) का उपयोग न करने से
  • प्लास्टिक के बोतल में रखा पानी पीने से
  • बहुत ठंडी और बहुत गरम पदार्थो को खाने से
  • बहुत अधिक वजन उठाने आदि से बवासीर हो सकती है।  

बवासीर कितने प्रकार के होते हैं ( bawasir kitne prakar ke hote hai )

आमतौर पर दो प्रकार की बवासीर देखने को मिलती है –

बादी बवासीर : ऐसी बवासीर जिसके मस्से से मवाज निकलती हो। 

खूनी बवासीर : ऐसे बवासीर जिसमे मल त्याग के दौरान या बाद में रक्त श्रावित होता हो। 

बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज ( bawaseer ka ramban ilaj )

बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज

बावासीर का उपचार आयुर्वेदीय सिद्धान्तानुसार बवासीर के कारण और लक्षण के आधार पर होता है। जिसमे मुख्य रूप से रोगी की देह प्रकृति और रोग के लक्षणों को परखा जाता है। तदनुरूप रोगी की देह प्रकृति के अनुरूप रोगी के रोग से प्राप्त होने वाले लक्षणों की साम्यता रखने वाली औषधियों का चयन होता है। तब जाकर पूर्ण रूपेण बवासीर के मस्सों का इलाज हो पाता है, अन्यथा नहीं। 

आयुर्वेदीय दवाइयों से बिना ऑपरेशन बवासीर का इलाज किया जाता है। जिनको बवासीर के घरेलू उपचार भी कहा जाता है। जो आपकी बवासीर को जड़ से खत्म करने का इलाज हो सकता है। यदि समय ( टाइम ) पर इस रोग के लक्षणों पर ध्यान दिया जाए। परन्तु आज की विडंबना यह है कि हमारा आपका शरीर रोग होने पर लक्षणों के माध्यम से संकेत करता है। लेकिन हम इनसे अनजान होने के कारण समझ नहीं पाते। 

आयुर्वेद में बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज की बहुत सी विधियां और दवाइयां बताई गई है। जिनको बवासीर का आयुर्वेदिक दवा भी कहा जाता है। जिनकी पहचान बवासीर की प्रकृति और रोगी की स्वाभाविक देहगत दोष के आधार पर किया जाता है। जिन्हे हम आमबोलचाल में बवासीर के घरेलू उपाय अथवा बवासीर का देशी इलाज ( bavasir ka desi ilaaj ) कहते है। 

बवासीर के घरेलू उपाय ( bawasir ke gharelu upay in hindi )

बवासीर का घरेलू उपाय बवासीर का प्राथमिक उपचार आमतौर पर माना जाता है। जिसमे विभिन्न प्रकार की हमारे आस – पास पायी जाने वाली औषधिया प्रयोग की जाती है। जो बवासीर के घरेलू उपाय कलाते है। जिन्हे आमबोलचाल की भाषा में बवासीर की देशी दवाई ( bawaseer ki desi dawai ) भी कहते है। बवासीर का घरेलू रामबाण इलाज आयुर्वेदिक उपचार ही है। बवासीर के घरेलू उपाय इतने प्रभावी होने पर भी बवासीर का इलाज कैसे किया जाए?

बवासीर का प्राकृतिक उपचार बवासीर का उपाय घरेलू आदि है। परन्तु इनका प्रयोग न होने से बवासीर के घरेलू उपायों पर आशंका बनी रहती है। जैसे – नींबू दूध से बवासीर का इलाज आदि। आयुर्वेद में मठ्ठा बवासीर का रामबाण इलाज ( bawasir ka ramban ilaj in hindi ) बताया गया है। जिसकी उपयोगिता बवासीर के क्षार, दाह और शस्त्र तीनो से कही अधिक बतायी गई है। अर्थात लक्षणों की साम्यता होने पर बवासीर के घरेलू उपाय बवासीर के रामबाण उपाय बन जाते है। 

इसलिए छोटा सा दिखने वाला बवासीर का घरेलू नुस्खा भी, बवासीर का स्थायी और पूर्ण उपचार हो सकता है। कुछ प्रसिद्द बवासीर का इलाज घरेलू उपाय इस प्रकार है –  

नींबू से बवासीर का इलाज ( nimbu se bawaseer ka ilaj ) 

नींबू से बवासीर का इलाज

निसंकोच बवासीर में नींबू के फायदे है। जिसको न जानने वाले पूछते है कि नींबू से बवासीर का इलाज कैसे करें? बवासीर में दूध और नींबू दोनों ही कमाल के है। यह दस्त आदि को रोकने के साथ पाचन तंत्र को व्यवस्थित कर कब्ज को दूर करते है। जिससे इनको बवासीर के रामबाण उपचारो में से एक है।

नींबू में साइट्रिक अम्ल, विटामिन सी के साथ इसके छिलको में सिट्रोन नामक उड़नशील तेल पाया जाता है। जिसके कारण यह दीपन, पाचन, रक्तपित्तप्रशमन और बुखार को दूर करने वाला आदि माना गया है। 

शुरुआती बवासीर में नींबू का प्रयोग पेट की समस्याओ को कम करता है। लेकिन पेट की गंभीर समस्याओ विशेषकर दस्त आदि में नींबू और दूध बहुत ही लाभ करते है। जिसको दूध और नींबू से बवासीर का इलाज कहा जाता है। 

दही से बवासीर का इलाज ( dahi se bawaseer ka ilaj )

दही से बवासीर का इलाज

नींबू और दूध से बवासीर का इलाज की तरह दही भी बवासीर के उपचार में उपयोगी है। दही स्वभाव से उष्ण, अग्निदीपक, स्निग्ध, कषाय रस युक्त, पचने में भारी, विपाक में अम्लरसयुक्त, शोथ, मेड और कफ करने वाला मना गया है। यह बल और शुक्र को बढ़ाने के साथ अतिसार, जुकाम, बुखार, अरुचि और कृशता में भी उत्तम होता है। 

बकरी का दही बवासीर में बहुत ही लाभकारी होता है। जिसके लिए इसका सेवन नित्य सुबह खाली पेट करना होता है। जबकि अन्य दही को जीरा, अजवाइन के छौक के साथ प्रयोग कर सकते है। वह भी बिना नमक के। शक्कर मिला हुआ दही प्यास, रक्तविकार और जलन को नष्ट करने वाला होता है। पंरतु दही का सेवन रात्रि में करना वर्जित है।  

पेशाब से बवासीर का इलाज ( peshab se bawaseer ka ilaj )

पेशाब से बवासीर का इलाज

आयुर्वेद में सभी मूत्रो में गोमूत्र को सबसे अधिक गुणकारी माना गया है। जिसका प्रयोग बवासीर के घरेलू उपाय में किया जाता है। यह बहुत से रोगो के उपचार की अमोघ दवा भी है। जैसे – पेट में दर्द होना, कान में दर्द होना आदि। यह प्लीहा, मलावरोध, खांसी आदि के साथ बवासीर की सूजन को भी घटाता है। जिसके लिए ताजे गोमूत्र से बवासीर के मस्सो को धोया जाता है।

पेशाब से बवासीर का इलाज कैसे होता है? गोमूत्र की तरह मानव मूत्र ( पेशाब ) भी बवासीर में उपयोगी है। जिसमे केवल पुरुष जाती के मूत्र को ही हितकारी माना गया है। बवासीर होने पर पुरुष के पेशाब को किसी पात्र में इकठ्ठा करके बवासीर के मस्सो पर डाला जाता है। फिर कुछ देर सुखाया जाता है। ऐसा दो तीन बार दोहरा करके पानी से धो लिया जाता है।   

फिटकरी से बवासीर का इलाज ( fitkari se bawaseer ka ilaj )

फिटकरी से बवासीर का इलाज

फिटकरी ( एलम ) कषाय रस युक्त, उष्ण, वात, पित्त, कफ और घाव आदि को दूर करने वाली है। बवासीर के मस्से भी मवाज आदि से भरकर व्रण ( फोड़े ) जैसे हो जाते है। जिसमे फिटकरी को पानी में घोलकर सफाई की जाती है। जिससे मस्सो की मवाज धीरे – धीरे निकल कर पिचकने लगती है। इसके साथ बवासीर के मस्सो में होने वाले दर्द कम करने में भी फिटकरी के फायदे बवासीर में है। फिटकरी और केले से बवासीर का इलाज निम्नवत है –

केला से बवासीर का इलाज ( kela se bawaseer ka ilaj )

केला से बवासीर का इलाज

केला का पका हुआ फल बल को बढ़ाने वाला, रक्तपित्त को ख़त्म करने वाला है। इसके साथ संग्राहक और जीवनीय भी है। जिसको खाने से खून की मात्रा बढ़ती है, आंतो की क्रिया सुधरती है एवं खून की अम्लता ( एसिडिटी ) भी कम होती है। जिससे बवासीर में कठोर मल को ढीला करता है। जिसके कारण गुदा पर रगड़ नहीं लगती और शौच क्रिया में आसानी होती है। यह बवासीर में केले के फायदे है। इसके साथ इसको दस्त में पथ्य के रूप में दिया जाता है। इतने सारे गुणों को रखने के कारण केला बवासीर के घरेलू उपाय कहलाता है। 

कपूर से बवासीर का इलाज ( kapoor se bawaseer ka ilaj )

कपूर से बवासीर का इलाज

केला और कपूर बवासीर के घरेलू उपाय है। जिसके कारण केला और कपूर से बवासीर का इलाज प्रसिद्द बवासीर के घरेलू उपायों में गिना जाता है। जबकि बवासीर में केला और कपूर का उपयोग न जानने वाले लोग पूछते है कि कपूर से बवासीर का इलाज कैसे किया जाता है?

आयुर्वेद में कपूर के शोथहर और वेदनाहर आदि गुण बातये गए है। जिससे बवासीर में कपूर के फायदे है। यह बवासीर में होने वाली सूजन और दर्द दोनों को ही दूर करने में सहायक है। जिसका बाहरी और भीतरी दोनों प्रयोग किया जा सकता है। 

पके हुए केले को छीलकर बीच से चीरकर, मटर की आधी दाल के बराबर कपूर डालकर खाने से बवासीर में फायदा होता है। यह कब्जियत होने से होने वाली बवासीर में भी फायदेमंद है, और खूनी बवासीर में लाभकारी है।  

प्याज से बवासीर का इलाज ( pyaj se bawaseer ka ilaj )

प्याज से बवासीर का इलाज

प्याज पाक में मधुर रस युक्त, अनुष्ण, किंचित कफकारक और केवल वातहर होता है। जिससे वातज बवासीर में प्याज खाने के फायदे है। इसके साथ यह बल और वीर्य को बढ़ाने वाला भी है। जिसकी कमी बवासीर रोगी में रहती ही है। जबकि प्याज के बीज को पीसकर नमक मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से फायदा होता है। 

मिट्टी के तेल से बवासीर का इलाज ( mitti ke tel se bawaseer ka ilaj )

कैरोसिन अथवा मिट्टी का तेल एक प्रकार का पेट्रोलियम उत्पाद है। जो संक्रमण को रोकने का काम करता है। पुराने समय में लोग इसे एंटीसेप्टिक की तरह प्रयोग करते थे। जिससे कट जाने, छिल जाने, जानवरो के खुरो में घाव होने आदि में इसका इस्तेमाल होता था।

बवासीर के घरेलू उपाय के रूप में मिटी के तेल को बवासीर के मस्सो पर लगाया जाता है। जिससे मस्सो की जलन आदि के साथ दर्द में राहत मिलती है। परन्तु ध्यान रहे मिटटी का तेल जहरीले हाइड्रोकार्बन से बनाता है। जिसके कारण नुकसानदेह हो सकता है।   

जीरा से बवासीर का इलाज ( jeera bawaseer ka ilaj )

जीरा बवासीर के घरेलू उपाय है। जिसके काले जीरे का प्रयोग बहुत ही लाभकारी है। यह बवासीर के सूजन को मिटाने में बहुत असरदार है। जिसके लिए इसके क्वाथ ( काढ़े ) से बवासीर के मस्सो को सेंका जाता है। ऐसा करने से बवासीर के मस्सों की सूजन कमहोकर पीड़ा में शांति मिलती है।  

हल्दी से बवासीर का इलाज ( haldi se bawaseer ka ilaj ) 

हल्दी से बवासीर का इलाज

हल्दी से बवासीर का इलाज इन हिंदी काफी प्रचलित उपाय है। हल्दी शादी विवाह से लेकर स्वास्थ्य प्रदायक और रोग निवारक गुणों से युक्त है। जिसके कारण हल्दी को बवासीर का घरेलू इलाज ( bawaseer ka gharelu ilaj ) माना गया है। इसमें घृतकुमारी के गूदे में इसको घिसकर सूजनयुक्त बवासीर के मस्सो पर लगाते है। यह एलोवेरा हल्दी से बवासीर का इलाज है। जो बवासीर की सूजन और दर्द दोनों को कम करने का काम करती है। 

गर्म पानी से बवासीर का इलाज ( garam pani se bawaseer ka ilaj )

बबासीर के मस्से जब बहुत कड़े हो जाते है। तब बवासीर में सिकाई करना आवश्यक हो जाता है। जिसके लिए किसी पात्र में उष्ण जल डालकर, कुछ समय तक गुदा के बल बैठते है। जिससे यह उपाय खूनी और वादी दोनों तरह की बवासीर में प्रयोग होता है।  के लिए, गर्म पानी का उपयोग किया जाता है। 

चुकंदर से बवासीर का इलाज ( chukandar bawaseer ka ilaj )

बवासीर के घरेलू उपाय बवासीर से छुटकारा पाने के आसान उपाय है। जिसमे चुकंदर फायदेमंद है। इसमें पाया जाने वाला फाइबर आंतो को सक्रिय करता है। जिससे पाचन की क्रिया में सुधार होता है। साथ ही आंतो में चिपका हुआ मल भी बाहर आने लगता है। जिससे बवासीर की कब्ज का रामबाण इलाज चुंकदर को माना जाता है। कब्ज ख़त्म होते ही बवासीर के मस्से स्वतः कम होने लगते है। 

नवरत्न तेल से बवासीर का इलाज ( navratan tel se bawaseer ka ilaaj )

नवरत्न तेल को ठंडा – ठंडा कूल – कूल कहा जाता है। जो नौ जड़ी बूटियों के मिश्रण से बना है। यह शरीर में होने वाले दर्द, थकान, सिर दर्द, अनिद्रा, माइग्रेन आदि को दूर करता है। त्वचा में कटने, जलने और छिलने जैसे अन्य बहुत से कामो में इसका उपयोग होता है। बवासीर में जलन होने पर नवरत्न तेल लाभ करता है। यह जलन को शांत करता है।  

शहद से बवासीर का इलाज ( shahad se bawaseer ka ilaaj )

मधु ( शहद ) मिले हुए मक्खन को खाने से बवासीर के मस्सों का नाश होता है। इसलिए बवासीर में शहद खाने के फायदे है। यह बहुत ही सरल और आसानी से किया जाने वाला बवासीर के घरेलू उपाय है। 

आक के पत्ते से बवासीर का इलाज ( aak ke patte se bawaseer ka ilaj )

आक के पत्तो पर एरंड तेल लगाकर सेकर बाँधने से, बवासीर के मस्सो में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। साथ ही यह बवासीर के मस्सों को भी कम करने में सहायक है।  

आक के दूध से बवासीर का इलाज ( aak ke doodh se bawaseer ka ilaj )

आक ( मदार ) की पट्टी को टहनी से तोड़ने पर दूध निकलता है। जिसे आक का दूध करते है। जो संक्रमण नाशक और विषैला होता है। जिसका लेप बवासीर के मस्सो पर करने से, मस्सों में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। 

ध्यान रहे : आक का दूध अत्यंत विषैला होता है। जो आँखों के लिए अत्यंत घातक है। इसकारण इसका उपयोग बड़ी ही सावधानी से करना चाहिए।    

अजवाइन से बवासीर का इलाज ( ajwain se bawaseer ka ilaj)

अजवाइन पाचक, रुचिकारक, अग्निदीपक, परिपाक में लघु, तिक्तरसयुक्त, पित्तवर्धक आदि गुणों से युक्त होने के कारण बवासीर में अजवाइन के फायदे है। यह पेट सम्बन्धी रोगो के साथ आनाह, गुल्म का भी नाश करता है। अजवाइन, सेंधानमक, सोंचरनमक, यवक्षार, आंवला चूर्ण और हींग को आधे से एक माशा की मात्रा में शजद के साथ दिया जाता है।     

चूना से बवासीर का इलाज ( choona se bawaseer ka ilaj )

चूना से बवासीर का इलाज

10 – 10 ग्राम चूना, तूतिया और संखिया को पीसकर, बवासीर के मस्सो पर लगाने से मस्सें सूखने लगते है।  इसलिए चूना को बवासीर के घरेलू उपाय कहते है। 

गुलकंद से बवासीर का इलाज ( gulkand se bawaseer ka ilaj )

गुलकंद स्वाद में मधुर, शीतल और बहुत से अन्य दिव्य गुणों से युक्त होता है। जिसके कारण यह पाचन समस्याओ में बढ़िया काम करता है। जिसका उपयोग दूध में मिलाकर और शरबत के रूप में भी किया जाता है। यह पित्त रोगो में बहुत ही फलदायक है। जिससे पित्त से होने वाली बवासीर में गुलकंद के फायदे है।

शरीर में पित्त को सम करने के लिए गुलकंद से गुणकारी है। जिसका प्रयोग पान के साथ भी किया जा सकता है। इसलिए गुलकंद को बवासीर के घरेलू उपाय कहते है। 

और पढ़े : एसिडिटी को जड़ से खत्म करने के घरेलू उपाय  

छाछ से बवासीर का इलाज ( chhachh se bawaseer ka ilaj )

बवासीर में छाछ पीने के फायदे है। यह पेट को ठंडा रखने के साथ भोजन की डाह को भी नष्ट करता है। परन्तु बवासीर रोग में यदि मलावरोध हो तो विशेष फायदा करता है। जिसमे अजवाइन और सोंठ का चूर्ण मिला हुआ छाछ पीना हितकर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि मठ्ठे से नष्ट हर बवासीर के मस्से पुनः उत्पन्न नहीं होते। जिसके कारण यह बवासीर का अचूक इलाज है। 

एलोवेरा से बवासीर का इलाज ( aloe vera se bawaseer ka ilaj )

एलोवेरा से बवासीर का इलाज

आयुर्वेदानुसार एलोवेरा तिक्त, मधुर और शीतवीर्य होने के साथ भेदन, दीपन, पाचन और शोथहर होता है। जिसके पत्तो के गूदो से निकलने वाला गूदा बवासीर के मस्सों की सूजन को कम करने में लाभदायक है।  घृतकुमारी के स्वरस में हल्दी मिलाकर लगाने से सभी प्रकार के मस्सों की सूजन और जलन में लाभ करता है।

पान के पत्ते से बवासीर का इलाज ( pan ke patte se bawaseer ka ilaj )

पान बवासीर के मस्से सुखाने का बढ़िया इलाज है। इसको खांसी, कफ विकार, आध्मान और सूजन को मिटाने वाला माना गया है। पान के पत्तो को गरम करके बवासीर के मस्सो पर बांधने से मस्सो का दर्द कम हो जाता है और मस्सा भी सूखने लगता है। जिससे पान को बवासीर के मस्से सुखाने का इलाज माना जाता है। 

नागदोन से बवासीर का इलाज ( nagdon se bawaseer ka ilaj )

नागदोन को बवासीर का पौधा भी कहते है। यह सुबह खाली पेट पीने से सभी प्रकार के बवासीर को नष्ट करने में सहायक है। बवासीर के घरेलू उपाय में इसकी चटनी को पानी में घोलकर पीया जाता है। यह पेट की पाचन समस्याओ को भी ठीक करती है।   

नारियल की जटा से बवासीर ( nariyal se bawaseer ka ilaj )

पानी वाले नारियल का छिलका नारियल की जटा कहलाता है। जो भूरे रंग की बाल जैसी नारियल के छिलके पर लगी रहती है। जिसको सूखाकर मिट्टी के पात्र में जला कर राख बना ले। फिर कपडे से छानकर रख ले। जिसका सेवन ताजे मठ्ठे के साथ करे। यह नारियल की जटा से बवासीर का प्राकृतिक रामबाण इलाज कलाता है। जबकि बवासीर में नारियल पानी पीने के फायदे भी है। 

मेथी से बवासीर का इलाज ( methi se bawaseer ka ilaj )

बवासीर के घरेलू उपाय में मेथी बहुत ही कारगार दवा है। यह विशेषकर खूनी बवासीर में अधिक उपयोगी है। जिसमे इसके बीजो को भूनकर फिर उसका फांट बनाकर प्रयोग करते है। 

और पढ़े : पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय 

नीम से बवासीर का इलाज ( neem se bawaseer ka ilaj )

नीम से बवासीर का इलाज

नीम से प्राप्त फल को निम्बोली कहते है। जो विरेचक और स्नेहक गुणों से युक्त होती है। जिसके कारण नीम की निम्बोली से बवासीर का इलाज किया जाता है। जिसमे इसका सेवन गुड़ के साथ कराया जाता है। नीम के पत्ते से बवासीर का इलाज किया जाता है। जिसमे बवासीर के मस्सों पर नीम की पत्तियों की पोल्टिस बाँधी जाती है। जिससे बवासीर के मस्सो का दर्द दूर होकर, सूखने लगता है। इसके कारण नीम को बवासीर के घरेलू उपाय कहते है। 

तुलसी के पत्ते से बवासीर का इलाज ( tulsi ke patte se bawaseer ka ilaj )

तुलसी को आयुर्वेद में कटु और तिक्त रस युक्त, उष्ण, दाह तथा पित्तकारक, अग्निदीपक, रक्तविकार, कफ और वायु को दूर करने वाली मानी गई है। जिससे इसका प्रयोग वादी बवासीर और खूनी दोनों तरह के बवासीर में होता है।

बादी बवासीर में तुलसी का आंतरिक प्रयोग करने से, विलोमित वायु अनुलोमित होकर पाचन समस्या को दुरुस्त कर मंदाग्नि को बढ़ाती है। जिससे बवासीर को अधिक बढ़ने का अवसर नहीं मिलता। जिससे जल्दी ही बवासीर के मस्से घटने या सूखने लगते है।

जबकि खूनी बवासीर में तुलसी का रस बाहरी रूप से प्रयोग होता है। जो बवासीर के मस्से के संक्रमण को रोकता है। जिससे यह नुस्खा बवासीर में अत्यंत उपयोगी माना गया है।  

किशमिश से बवासीर का इलाज ( kismish se bawaseer ka ilaj )

बवासीर के मस्सो की जलन को दूर करने में बवासीर में किशमिश के फायदे है। जिसको धोकर रात को पानी में भिगाकर पीसकर पिया जाता है। यह बहुत पुराने और शुरुआती बवासीर के घरेलू उपाय है। जिसमे मुनक्का भी फायदा करता है। इसलिए बवासीर में मुनक्का के फायदे भी है। किशमिश और मुनक्के का पानी पेट को ठंडा रखता है। जिससे पेट में अम्लता की मात्रा नियंत्रित रहती है।  

और पढ़े : पेट में जलन और दर्द होना 

दूध से बवासीर का इलाज ( doodh se bawaseer ka ilaj )

दूध से बवासीर का इलाज

बवासीर में दूध ( bavasir mein doodh ) पीना अभूत ही लाभदायक माना गया है। आयुर्वेद में सभी प्रकार के पेट रोगो में दूध की अत्यंत महिमा गाई गई है। जिसका मूलकारण दूध में पाया जाने वाला दोष है। वैसे तो सभी दूध के अपने अपने गन है। परन्तु बवासीर में गाय के दूध का विशेष महत्व है।

क्योकि यह मधुर रस युक्त, स्निग्ध, वात और पित्त को दूर करने वाला, शीतल, शुक्र बढ़ाने और आयु को बढ़ाने वाला माना गया है। वस्तुतः नियमित दूध पीने से बवासीर का 100 परसेंट इलाज हो सकता है। जिसका सेवन रात्रि काल में करना बहुत ही लाभकारी है। 

धनिया से बवासीर का इलाज ( dhaniya se bawaseer ka ilaj )

धनिया को आयुर्वेद में दीपन, पाचन, वातानुलोमक, दाहशामक इत्यादि गुणों से युक्त माना गया है। जिसके कारण यह स्वभाव से दाह और प्यास को मिटाने वाला कहा गया है। जो बुखार में होने वाले आंतरिक जलन और बड़ी हुई प्यास की शांति के लिए प्रयोग होता है।

पित्त के प्रकोप से होने वाली खूनी बवासीर में, घनिया के काढ़े में मिश्री मिलाकर देने से लाभ होता है। यह घरेलू उपाय जैसा लगने वाला आयुर्वेदीय उपाय है। इसलिए धनिया को उत्तम खुनी बवासीर का इलाज माना जाता है।   

बवासीर में गर्म पानी पीने के फायदे 

बवासीर में गर्म पानी पीना बहुत फायदेमन्द है। यह बवासीर के घरेलू उपाय सहित बहुत से रोगो का आसान उपाय है। बवासीर के कारण मल सख्त, कडा और कठोर होने पर गर्म पानी पीने से फायदा होता है। यह तुरंत मल को ढीला करता है। जिससे गुदा नली आदि में होने वाले मस्सो पर रगड़ न लगने से, मल आसानी से बाहर आ जाता है। 

बवासीर में गर्म पानी में बैठने के फायदे है। जिसमे किसी बड़े पात्र में गुनगुना पानी लेकर गुदा को डुबाकर कुछ समय तक बैठते है। जिससे बनासिर के मस्सो में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। साथ मस्सो में भरी गंदगी भी बाहर निकल जाती है। जिससे मस्से सूखने लगते है।  

बवासीर में त्रिफला चूर्ण के फायदे ( bawasir me triphala churna ke fayde )

अन्य रोगो की भाँती त्रिफला चूर्ण का फायदा बवासीर में भी है। जिसमे रोगी का बल, समय और रोग की तीव्रता को जानकार त्रिफला चूर्ण के साथ तक्र ( मठ्ठे ) का सेवन परम हितकारी है। जिसके साथ कुछ दिन तक यदि अन्न सेवन न करे, और केवल छाछ ही पिए तो अधिक फायदा होता है। यह श्रेष्ठ बवासीर के घरेलू उपाय है। जो शरीर में खाज खुजली होने पर भी लाभकारी है। 

अतिबला से बवासीर का इलाज ( atibalaa se bawaseer ka ilaj ) 

बवासीर के घरेलू उपाय है अतिबला। जिसका काढ़ा और सब्जी दोनों प्रयोग होता है।

अतिबला की पत्तियों का काढ़ा पीने से बवासीर में लाभ होता है।

1- 2 ग्राम अतिबला की जड़ के चूर्ण को मधु मिलाकर चाटने से बवासीर में लाभ होता है। या इसके काढ़े को पीने से लाभ होता है। 

थूहर से बवासीर का इलाज ( thoohar se bawaseer ka ilaj )

थूहर का पेड़ कटीले पत्तियों के आकार का होता है। जिसे सेहुड़ के नाम से भी जाना जाता है। जिसके पत्तियों को काटने से थूहर का दूध निकलता है। जिसमे हल्दी मिलाकर लेप तैयार कर, बवासीर के मस्सो पर लगाने से मस्से सूखकर झड़ जाते है।   

कोलगेट से बवासीर का इलाज ( colgate se bawaseer ka ilaj )

कोलगेट से बवासीर का इलाज

बवासीर के घरेलू उपाय के रूप में कोलगेट का प्रयोग कुछ लोग करते है। जिससे बवासीर की पीड़ा आदि में लाभ बताते है। परन्तु यह कितना कारगार है। यह आज भी शोध का विषय है। 

उपसंहार :

लोक व्यवहार में विख्यात यत्र – तत्र बिखरे लगभग सभी घरेलू उपाय आयुर्वेदीय उपाय है। अर्थात सरल और शीघ्र फल देने वाले आयुर्वेदीय उपायों को ही घरेलू उपाय के रूप में ख्यापित है। बवासीर के घरेलू उपाय सिद्धानानुरूप प्रयोग करने से लाभकारी है। जिनसे से कुछ पथ्य आदि के रूप में भी प्रयोग होते है। इसलिए  बवासीर के घरेलू उपाय अत्यंत लाभकारी है।

घरेलू उपायों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सस्ते, आसानी से सुलभ और तीव्र लाभकारी होते है। जिससे इनका प्रयोग हर कोई कर सकता है। आयुर्वेदीय ग्रंथो में इनका वर्णन होने से, इनको बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज माना जाता है। जिससे निर्भीकता पूर्वक हम इनका प्रयोग कर सकते है।

नींबू और दही रोजमर्रा के काम आने वाला पदार्थ है। जिससे नींबू से बवासीर का इलाज और दही से बवासीर का इलाज बवासीर होने पर हर कोई अपनाता है। जबकि पेशाब से बवासीर का इलाज भी बहुत असरकारक है। जिसका प्रयोग करने वाला बवासीर में आराम पाता है।  

इसलिए चिकित्सा सम्बन्धी विशेषज्ञीय सलाह लिए बिना, किसी भी दवा का सेवन हानिकारक हो सकता है। यह लेख केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। 

सन्दर्भ : 

भाव प्रकाश निघण्टु – गुडुच्यादि वर्ग, हरीतक्यादि वर्ग, आम्रदि वर्ग, कर्पूरादि वर्ग, दुग्ध वर्ग, दधि वर्ग, तक्र वर्ग, मूत्र वर्ग आदि। 

भैषज्यरत्नावली – अर्श रोग चिकित्सा प्रकरण 

योगरत्नाकर – अर्श चिकित्सा प्रकरण 

FAQ

बवासीर का इलाज कैसे होता है?

बवासीर के घरेलू उपाय जैसे – दही, मठ्ठा आदि से बवासीर का उपचार होता है।  

बवासीर कैसे होता है इन हिंदी?

शरीरगत दोषो के असंतुलन, शास्त्र विरुद्ध दिनचर्या और गलत खानपान आदि के कारण बवासीर होती है।  

लैट्रिन में जलन क्यों होती है?

बवासीर आदि रोग होने से मल में जलन होती है।  

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